
फतेहपुर। जिले में पुलिस ने एक ऐसे ही संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो यूनिक रिश्ता डॉट कॉम जैसी फर्जी शादी की वेबसाइट्स के जरिए शादी के इच्छुक युवकों को अपना शिकार बनाता था। करीब डेढ़ साल से राधानगर के एक रिहायशी इलाके में फल-फूल रहे इस काले कारोबार का पर्दाफाश तब हुआ जब साइबर सेल की नजर प्रतिबिंब पोर्टल पर दर्ज शिकायतों पर पड़ी। पुलिस ने छापेमारी कर गिरोह के छह सदस्यों को गिरफ्तार कर लिया है जबकि मास्टरमाइंड की तलाश में दबिश दी जा रही है।
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18 महीने से चल रहा था खेल
फतेहपुर जिले के राधानगर इलाके में पिछले अठारह महीनों से चल रहे इस बड़े साइबर अपराध नेटवर्क की जड़ें बहुत गहरी थीं। साइबर क्राइम पुलिस और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने राधानगर के देवीगंज स्थित मिलाप कोठी पर छापा मारकर एक सुव्यवस्थित कॉल सेंटर का खुलासा किया। यह सेंटर राजेश पांडेय नामक व्यक्ति के मकान की तीसरी मंजिल पर किराये के एक बड़े हॉल में संचालित हो रहा था।
पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक ने मामले का विवरण देते हुए बताया कि, इस गिरोह ने ठगी के लिए बाकायदा एक कॉर्पोरेट ढांचा तैयार कर रखा था। गिरफ्तार किए गए लोगों में छत्तीसगढ़ का आदित्य यदु, मध्य प्रदेश का अनिल कुमार और कानपुर निवासी दिनेश कुमार बंजारा शामिल हैं। इनके साथ ही फतेहपुर की तीन युवतियां नीलम, श्रेया मिश्रा और तनु शर्मा भी पकड़ी गई हैं, जो इस गिरोह में टीम लीडर के तौर पर सक्रिय थीं।
गिरोह के काम करने का तरीका बेहद शातिर और मनोवैज्ञानिक था। मुख्य आरोपी आदित्य ने पूछताछ में बताया कि, वे यूनिक रिश्ता डॉट कॉम के अलावा सात अन्य फर्जी वेबसाइट्स संचालित करते थे। जब भी कोई व्यक्ति इन वेबसाइट्स पर शादी के लिए अपना पंजीकरण करता तो गिरोह की लड़कियां उसे फौरन कॉल करती थीं। वे बेहद शालीनता से बात करते हुए युवकों को झांसा देती थीं कि उनकी प्रोफाइल को बीस से अधिक लड़कियों ने पसंद किया है और वे उनसे बात करने के लिए बेताब हैं।
लड़कियों की फोटो भेज ऐंठते थे पैसे
युवकों का विश्वास जीतने के लिए उन्हें सोशल मीडिया से उठाई गई अनजान लड़कियों की खूबसूरत तस्वीरें भेजी जाती थीं, जिनका वास्तव में उस संस्था से कोई संबंध नहीं होता था। इन फोटो और मोबाइल नंबरों को उपलब्ध कराने के नाम पर युवकों से दो हजार नौ सौ निन्यानवे रुपये से लेकर उन्नीस हजार नौ सौ निन्यानवे रुपये तक के मैरिज पैकेज के नाम पर पैसे ऐंठे जाते थे।
जांच में यह भी सामने आया है कि इस कॉल सेंटर के अंदर करीब तेरह अन्य लड़कियां भी काम कर रही थीं जिन्हें शहर में बांटे गए विज्ञापनों और पंफ्लेट के जरिए नौकरी का झांसा देकर जोड़ा गया था। इन लड़कियों को पांच हजार रुपये प्रति माह का निश्चित वेतन दिया जाता था, लेकिन जो लड़की ग्राहक को ज्यादा लंबी बातों में फंसाकर अधिक पैसे मंगवाती थी उसे अलग से भारी कमीशन और बोनस दिया जाता था।
ठगी होते से बंद होते जाते थे सिम
पुलिस को छापेमारी के दौरान मौके से एक सौ सैंतीस नए सिमकार्ड का एक बड़ा पैकेट मिला है जो कानपुर की नंदनी नामक महिला ने भेजा था। नंदनी एक प्रतिष्ठित सिम विक्रेता कंपनी में काम करती है और वह मास्टरमाइंड अमित के माध्यम से फर्जी आईडी पर तैयार किए गए सिमकार्ड गिरोह को उपलब्ध कराती थी। ठगी की प्रक्रिया पूरी होते ही ये सिमकार्ड तुरंत बंद कर दिए जाते थे ताकि पुलिस लोकेशन ट्रैक न कर सके।
पुलिस अधीक्षक ने बताया कि इस पूरे गिरोह का असली सूत्रधार आगरा का रहने वाला अमित है जो सिकंदरा रोड स्थित अपने आवास से पूरे नेटवर्क को नियंत्रित करता है। अमित ने अलग-अलग नामों से कई फर्जी वेबसाइट्स जैसे शुभ मंगल जोड़ी, शादी पार्टनर, ड्रीम पार्टनर, परफेक्ट रिश्ते, शुभ मैट्रोमोनियल, विवाह गाइड और वर-वधू डॉट कॉम पंजीकृत करा रखी थीं। अमित का सहयोगी दिनेश बंजारा कानपुर के सीसामऊ में शुभ-मंगल नाम की एक और वेबसाइट का ऑफिस चला रहा था।
इन लोगों ने पुलिस और प्रशासन की नजरों से बचने के लिए बाकायदा उद्यम पोर्टल और लेबर ऑफिस में अपनी फर्मों का पंजीकरण करा रखा था ताकि ऊपर से यह एक वैध बिजनेस जैसा प्रतीत हो सके। यह गिरोह हर महीने करीब आठ से दस लाख रुपये की ठगी कर रहा था। ठगी की रकम को ट्रांजेक्शन के जटिल जाल में फंसाने के लिए टीम लीडर तनु शर्मा और अन्य के बैंक खातों का उपयोग किया जाता था।
दस डेबिट कार्ड और नौ अलग-अलग बैंक खाते मिले
पुलिस को आरोपी आदित्य के पास से दस डेबिट कार्ड और नौ अलग-अलग बैंक खाते मिले हैं। इतना ही नहीं ठगी की इसी काली कमाई से आरोपियों ने हाल ही में एक आलीशान एसयूवी कार खरीदी थी जिसे पुलिस ने एमवी एक्ट के तहत जब्त कर लिया है। शहर के रिहायशी इलाके में पिछले डेढ़ साल से इतना बड़ा रैकेट चल रहा था लेकिन स्थानीय राधानगर पुलिस और खुफिया विभाग को इसकी कानों-कान भनक तक नहीं लगी। आसपास के निवासियों का कहना है कि, उस हॉल में किसी भी बाहरी व्यक्ति का प्रवेश पूरी तरह वर्जित था और केवल काम करने वाले कर्मचारी ही अंदर जा सकते थे।
मकान मालिक जो शिक्षा विभाग से जुड़े बताए जा रहे हैं उन्हें भी पुलिस ने पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है। हालांकि उनके पास रेंट एग्रीमेंट मौजूद था, लेकिन पुलिस इस बात की गहनता से जांच कर रही है कि क्या उन्हें हॉल के भीतर होने वाली इन अवैध गतिविधियों की पहले से जानकारी थी।
आगरा और कानपुर से जुड़े हैं तार
पुलिस अधीक्षक अभिमन्यु मांगलिक ने स्पष्ट किया है कि गिरोह के तार आगरा और कानपुर से गहराई से जुड़े हैं और फरार मास्टरमाइंड अमित व सिम सप्लायर नंदनी की गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमें रवाना कर दी गई हैं। इसके साथ ही अब जिले भर के उन सभी रिहायशी इलाकों में सघन जांच के आदेश दिए गए हैं जहाँ संदिग्ध कॉल सेंटर या बिना सत्यापन के किरायेदार रह रहे हैं। साइबर पुलिस ने आम जनता को भी आगाह किया है कि वैवाहिक वेबसाइट्स पर किसी भी प्रकार का भुगतान करने से पहले पूरी सावधानी बरतें।
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