सबंधों को पटरी पर लाने की कवायद तेज, 8 अप्रैल को दिल्ली में एस जयशंकर से मिलेंगे बांग्लादेश के विदेश मंत्री

नई दिल्ली। दक्षिण एशिया की राजनीति में एक बड़े बदलाव और लंबे समय से जारी तनाव के बाद अब भारत और बांग्लादेश के रिश्तों में जमी बर्फ पिघलती नजर आ रही है। बांग्लादेश की सत्ता से शेख हसीना के निष्कासन और उसके बाद मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान दोनों देशों के बीच जो कड़वाहट पैदा हुई थी, उसे दूर करने के लिए अब नई दिल्ली-ढाका एक नई शुरुआत कर रहे हैं।

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भारत आ रहे विदेश मंत्री खलीलुर रहमान 

फरवरी 2026 में तारिक रहमान द्वारा बांग्लादेश के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद, दोनों देशों के बीच संबंधों को पटरी पर लाने की कवायद तेज हो गई है। इसी रणनीतिक सुधार की कड़ी में बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान अगले सप्ताह भारत के महत्वपूर्ण दौरे पर नई दिल्ली पहुंच रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार, खलीलुर रहमान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ एक उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक करेंगे। यह दौरा न केवल राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह संदेश भी है कि, बांग्लादेश की नई बीएनपी सरकार भारत के साथ आपसी सम्मान और सहयोग के आधार पर आगे बढ़ना चाहती है। हालांकि, बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन वैश्विक कूटनीतिक हलकों में इस मुलाकात को गेम चेंजर माना जा रहा है।

कई संवेदनशील मुद्दों पर होगी चर्चा

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच यह महत्वपूर्ण मुलाकात 8 अप्रैल को प्रस्तावित है। बीएनपी (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) सरकार के सत्ता में आने के बाद यह बांग्लादेश की ओर से भारत की पहली उच्च स्तरीय आधिकारिक यात्रा होगी। पिछले एक साल में दोनों देशों के बीच अविश्वास की एक गहरी खाई बन गई थी, जिसे पाटने की जिम्मेदारी अब खलीलुर रहमान और एस. जयशंकर के कंधों पर है।

इस बैठक का प्राथमिक उद्देश्य केवल औपचारिकता निभाना नहीं, बल्कि उन संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा करना है जो पिछले कुछ महीनों में विवाद का कारण बने थे। भारत के लिए बांग्लादेश एक नेबरहुड फर्स्ट नीति का अहम हिस्सा है। वहीं बांग्लादेश की नई सरकार के लिए भारत के साथ व्यापारिक और सामरिक संतुलन बनाए रखना उसकी आर्थिक स्थिरता के लिए अनिवार्य है। इस दौरे के एजेंडे में सबसे ऊपर गंगा जल संधि का मुद्दा है।

गंगा जल समझौते के नवीनी करण पर बात

बता दें कि, भारत और बांग्लादेश के बीच 12 दिसंबर 1996 को ऐतिहासिक गंगा जल समझौता हुआ था, जिसकी समय सीमा दिसंबर 2026 में समाप्त होने वाली है। 30 साल पुरानी इस संधि के नवीनीकरण पर अब तक कोई ठोस बातचीत शुरू नहीं हो पाई है।

बांग्लादेश के लिए गंगा के पानी का बंटवारा एक बेहद संवेदनशील और जीवन रेखा से जुड़ा मुद्दा है। अधिकारियों का कहना है कि, खलीलुर रहमान इस संधि को आगे बढ़ाने या इसके नए प्रारूप पर विशेष रूप से चर्चा करेंगे। यदि समय रहते इस पर सहमति नहीं बनी, तो यह भविष्य में दोनों देशों के बीच जल-विवाद का बड़ा कारण बन सकता है। भारत भी पश्चिम बंगाल की चिंताओं और बांग्लादेश की जरूरतों के बीच एक संतुलन बनाने की कोशिश करेगा।

बैठक का दूसरा सबसे बड़ा मुद्दा वीजा सेवाओं का सामान्य होना है। जुलाई 2024 में बांग्लादेश में हुई हिंसा और तख्तापलट के बाद सुरक्षा कारणों से भारत ने बांग्लादेशी नागरिकों के लिए पर्यटक वीजा निलंबित कर दिए थे। वर्तमान में केवल चिकित्सा और आपातकालीन वीजा ही जारी किए जा रहे हैं।

वीजा सेवा बहाली पर चर्चा

बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था और स्वास्थ्य क्षेत्र काफी हद तक भारत पर निर्भर है। हर साल लाखों बांग्लादेशी इलाज, पर्यटन और व्यापार के लिए भारत आते हैं। वीजा निलंबन से न केवल बांग्लादेशी नागरिक परेशान हैं, बल्कि भारतीय पर्यटन और चिकित्सा उद्योग पर भी इसका असर पड़ा है। खलीलुर रहमान इस मुद्दे को एस. जयशंकर के सामने प्रमुखता से रखेंगे और सुरक्षा प्रोटोकॉल को मजबूत करते हुए वीजा सेवाओं को फिर से बहाल करने की मांग करेंगे।

दिल्ली में द्विपक्षीय वार्ता के तुरंत बाद, दोनों देशों के विदेश मंत्री 10 से 12 अप्रैल तक मॉरीशस में आयोजित होने वाले 9वें हिंद महासागर सम्मेलन में भाग लेंगे। अंतरराष्ट्रीय मंच पर दोनों मंत्रियों की एक साथ मौजूदगी यह दर्शाएगी कि दक्षिण एशिया और हिंद महासागर क्षेत्र की सुरक्षा व स्थिरता के लिए भारत और बांग्लादेश एक साथ काम करने को तैयार हैं। यह सम्मेलन समुद्री सुरक्षा, व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा और चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने का एक बड़ा अवसर होगा।

 सकारात्मक संदेश

भारत ने शुरुआत से ही बांग्लादेश की नई सरकार के साथ सकारात्मक संकेत दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तारिक रहमान के पद संभालने के तुरंत बाद उन्हें बधाई दी थी। एक विशेष कूटनीतिक पहल करते हुए पीएम मोदी ने तारिक रहमान, उनकी पत्नी जुबैदा रहमान और उनकी बेटी जैमा रहमान को भारत आने का आधिकारिक निमंत्रण भी दिया है।

मोदी ने अपने संदेश में कहा था कि भारत आपसी सहमति के आधार पर तारिक रहमान और उनके परिवार का हार्दिक स्वागत करने के लिए उत्सुक है। यह निमंत्रण बीएनपी सरकार के प्रति भारत के बदलते और लचीले रुख का परिचायक है। जानकारों का मानना है कि विदेश मंत्री खलीलुर रहमान के इस दौरे के दौरान ही प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत यात्रा की तारीखों और रूपरेखा पर भी चर्चा हो सकती है।

साझा विकास के रास्ते तय करने की कोशिश

शेख हसीना के भारत में शरण लेने और उसके बाद बांग्लादेश में हिंदुओं व अल्पसंख्यकों पर हुए हमलों की खबरों ने भारत में चिंता पैदा की थी। वहीं, बांग्लादेश में बीएनपी के कुछ धड़ों में इंडिया आउट  जैसे अभियान भी देखे गए थे। ऐसे में खलीलुर रहमान के सामने चुनौती यह है कि वे भारत को यह भरोसा दिलाएं कि बांग्लादेश की धरती का इस्तेमाल भारत विरोधी गतिविधियों के लिए नहीं होगा।

वहीं, भारत के लिए भी यह जरूरी है कि वह बांग्लादेश की नई सत्ता के साथ एक नया समीकरण बनाए, ताकि वहां चीन या अन्य विरोधी ताकतों का प्रभाव न बढ़े। अविश्वास के इस दौर में ‘पीपल-टू-पीपल’ (आम नागरिकों के बीच) संपर्क को फिर से बहाल करना सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।

खलीलुर रहमान का यह दिल्ली दौरा केवल एक कूटनीतिक यात्रा नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया की नई भू-राजनीतिक हकीकत का संकेत है। गंगा जल समझौता, वीजा बहाली और सुरक्षा सहयोग ऐसे स्तंभ हैं जिन पर भविष्य के रिश्तों की इमारत खड़ी होगी। यदि 8 अप्रैल की यह बैठक सफल रहती है, तो यह माना जाएगा कि भारत और बांग्लादेश ने अपने सबसे कठिन दौर को पीछे छोड़ दिया है और एक परिपक्व पड़ोसी की तरह साझा विकास के रास्ते पर आगे बढ़ रहे हैं।

 

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