
बांदा। एक समय था जब उत्तर प्रदेश का बुंदेलखंड क्षेत्र अपनी पथरीली जमीन, पानी की किल्लत और आर्थिक पिछड़ेपन के लिए जाना जाता था। लोग यहां आने से भी कतराते थे, लेकिन अब वहीं बुंदेलखंड विकास की एक नई इबारत लिख रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नए उत्तर प्रदेश के विजन और ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का असर अब यूपी में दिखने लगा है, जिससे इस क्षेत्र का बांदा जिला भी अछूता नहीं रहा।
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खत्म होगी बिजली की किल्लत
बांदा अब अपनी केन नदी और शजर पत्थर के लिए नहीं, बल्कि आने वाले समय में देश के मानचित्र पर एक ग्रीन एनर्जी हब के रूप में उभरने जा रहा है। इसका न सिर्फ पूरा खाका तैयार हो चुका, बल्कि 2800 करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश भी हो गया है, जो न केवल बांदा की बिजली की किल्लत को खत्म करेगा, बल्कि यहां के औद्योगिक परिदृश्य को पूरी तरह से बदल कर रख देगा।

बांदा में ऊर्जा के क्षेत्र में आने वाला यह बदलाव महज एक सरकारी घोषणा भर नहीं है, बल्कि धरातल पर इसकी तैयारी पूरी तेजी के साथ चल रही है। जिला प्रशासन और उद्योग विभाग के सक्रिय प्रयासों के चलते उन बाधाओं को दूर कर लिया गया है, जो अक्सर बड़े निवेश परियोजनाओं के आड़े आती थीं। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान जिस उत्साह के साथ निवेशकों ने बांदा के लिए एमओयू साइन किए थे, वे अब धरातल पर सोलर पैनलों और गैस संयंत्रों के रूप में आकार लेते दिखाई दे रहे हैं।
जिले में पांच विशाल सोलर पार्कों की स्थापना की प्रक्रिया अब अपने अंतिम चरणों की ओर बढ़ रही है। इन परियोजनाओं की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि, इनके लिए आवश्यक भूमि क्रय की प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता और गति के साथ पूरा कर लिया गया है। 2800 करोड़ रुपये से अधिक की यह समेकित निवेश राशि बांदा के इतिहास में ऊर्जा क्षेत्र का अब तक का सबसे बड़ा निवेश है।
जमीन पर उतर रहीं परियोजनाएं
उद्योग विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो सौर ऊर्जा क्षेत्र में निवेश की इच्छा जताने वाले 57 उद्यमियों में से पांच प्रमुख बड़े खिलाड़ियों ने अपनी परियोजनाओं को जमीन पर उतारने की शुरुआत कर दी है। राजस्व, वन और अन्य संबंधित विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करने की कार्यवाही युद्ध स्तर पर जारी है, ताकि निर्माण कार्य में कोई देरी न हो।
ऊर्जा उत्पादन की क्षमता के लिहाज से देखें, तो बांदा जल्द ही एक सरप्लस जिला बनने की राह पर है। वर्तमान में जिले में दो सोलर पार्क पहले से ही क्रियाशील हैं, जो करीब 75 मेगावाट बिजली पैदा कर ग्रिड को दे रहे हैं, लेकिन आगामी पांच परियोजनाओं के शुरू होते ही इसमें 240 मेगावाट की अतिरिक्त क्षमता जुड़ जाएगी। यह छलांग बांदा को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ पड़ोसी जिलों की मांग को पूरा करने में भी सक्षम बनाएगी। बिजली की आपूर्ति में सुधार होने का सीधा लाभ स्थानीय किसानों को सिंचाई के लिए और छोटे उद्यमियों को निर्बाध उत्पादन के लिए मिलेगा।
सोलर पार्क पर काम शुरू
जमीनी स्तर पर काम की प्रगति को देखें तो नरैनी तहसील का गुढ़ा क्षेत्र और आलोना का इलाका इस औद्योगिक क्रांति का केंद्र बन गया है। रिमझिम इस्पात प्लांट द्वारा 45 मेगावाट क्षमता के सोलर पार्क पर काम शुरू किया जा चुका है, जो इस बात का प्रमाण है कि निजी क्षेत्र अब बुंदेलखंड की संभावनाओं पर पूरा भरोसा कर रहा है। इसी तरह अबाडा परियोजना के तहत भी निर्माण गतिविधियां संचालित हो रही हैं। इन परियोजनाओं से न केवल स्वच्छ ऊर्जा पैदा होगी, बल्कि निर्माण और संचालन के दौरान हजारों स्थानीय युवाओं को रोजगार के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष अवसर भी प्राप्त होंगे।
बांदा की यह महत्वाकांक्षा सिर्फ सौर ऊर्जा तक ही सीमित नहीं है। जिले को एक मुकम्मल ग्रीन हब बनाने के लिए गैस आधारित ऊर्जा परियोजनाओं पर भी काम शुरू हो गया है। इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) ने बांदा और पड़ोसी चित्रकूट जिले के लिए एक व्यापक मास्टर प्लान तैयार किया है। इसके तहत क्षेत्र में आधुनिक गैस प्लांट स्थापित किए जाएंगे, जो न केवल स्वच्छ ईंधन का विकल्प देंगे, बल्कि क्षेत्र की ऊर्जा सुरक्षा को एक नया आयाम प्रदान करेंगे। गैस आधारित ऊर्जा, सौर ऊर्जा के लिए एक बेहतरीन पूरक साबित होगी, जिससे ग्रिड की स्थिरता बनी रहेगी।
बांदा के लिए तीन साल अहम
उपायुक्त उद्योग गुरुदेव का मानना है कि, बांदा का यह कायाकल्प जिले की आर्थिक नियति को बदल देगा। उनके अनुसार, प्रशासन का पूरा ध्यान इस बात पर है कि निवेशकों को सिंगल विंडो सिस्टम के तहत जल्द से जल्द सभी अनुमतियां मिलें। इन ग्रीन एनर्जी पार्कों की स्थापना से बांदा की छवि एक पिछड़े जिले से हटकर एक प्रगतिशील औद्योगिक केंद्र की बनेगी। यह निवेश न केवल स्थानीय जीडीपी में इजाफा करेगा, बल्कि भविष्य में यहां लगने वाले अन्य भारी उद्योगों के लिए सस्ती और हरित बिजली की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा।

आने वाले दो से तीन साल बांदा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होने वाले हैं। जैसे ही ये सोलर पैनल सूरज की किरणों को बिजली में बदलना शुरू करेंगे, वैसे ही बुंदेलखंड की इस तपती धूप को एक वरदान के रूप में देखा जाने लगेगा। बांदा का ग्रीन एनर्जी हब बनना न केवल उत्तर प्रदेश को वन ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि यह ग्लोबल वार्मिंग जैसी चुनौतियों के खिलाफ भारत की जंग में एक स्थानीय योगदान भी है। विकास की यह लहर अब रुकने वाली नहीं है, क्योंकि बांदा अब उजाले की एक नई किरण के साथ भविष्य की ओर कदम बढ़ा चुका है।
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