अयोध्या : रामलला आसन पर विराजमान

चार घंटे तक चली पूजा के बाद गर्भगृह में स्थापित की गई भगवान की प्रतिमा

अयोध्या I रामलला की मूर्ति को गुरुवार को गर्भगृह में बने आसन पर रख दिया गया है। मूर्ति खड़ी करने से पहले पूजन किया गया। चार घंटे तक चली पूजा के बाद भगवान श्रीराम की मूर्ति नृत्य मंडप में पहुंची और विधि-विधान से रामलला की मूर्ति स्थापित की गई। मूर्ति पूरी तरह से ढकी हुई है। आवरण को प्राण प्रतिष्ठा के वक्त ही हटाया जाएगा। बताया जा रहा है कि अब मूर्ति को गंध वास के लिए सुगंधित जल में रखा जाएगा। फिर अनाज, फल और घी में भी रखा जाएगा।

16 जनवरी से शुरू हुए प्राण प्रतिष्ठा अनुष्ठान का गुरुवार को तीसरा दिन था। 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा की जाएगी। नवनिर्मित राम मंदिर में प्राण-प्रतिष्ठा समारोह से ठीक पहले अयोध्या नगरी पूरी तरह सज-धजकर तैयार हो चुकी है। भगवान राम तथा उनके धनुष एवं बाणों को चित्रित करने वाली कलाकृतियों से सुसज्जित फ्लाईओवर पर लगी स्ट्रीटलाइट और पारंपरिक ‘रामानंदी तिलक’ विषय पर आधारित डिजाइन वाले सजावटी लैंपपोस्ट चहुंओर छटा बिखेर रहे हैं। इधर, ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि मुख्य वेदी पर रामलला विराजमान की ही प्राण प्रतिष्ठा होनी चाहिए। स्वयंभू प्रतिमा की जगह दूसरी मूर्ति स्थापित नहीं की जा सकती।

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