बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। ताजा मामला सुनामगंज जिले का है, जहां एक हिंदू व्यक्ति की बेरहमी से पिटाई कर उसे जहर खिलाने के बाद मौत के घाट उतार दिया गया। इस घटना के बाद से हिंदू समुदाय में डर और आक्रोश का माहौल है।
सुनामगंज में जॉय महापात्रो की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत
गुरुवार को सुनामगंज जिले में जॉय महापात्रो नाम के एक हिंदू व्यक्ति पर कथित तौर पर एक स्थानीय व्यक्ति ने हमला किया। परिजनों का आरोप है कि पहले महापात्रो को बेरहमी से पीटा गया और बाद में जबरन जहर खिला दिया गया। परिवार और दोस्तों का कहना है कि यह कोई सामान्य घटना नहीं, बल्कि एक सुनियोजित हत्या है।
ICU में इलाज के दौरान तोड़ा दम
हमले के बाद जॉय महापात्रो की हालत बिगड़ने पर उन्हें सिलहट एमएजी उस्मानी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने उन्हें ICU में रखा, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना ने बांग्लादेश में रह रहे हिंदू अल्पसंख्यकों की चिंता और बढ़ा दी है।
नरसिंगदी में भी हो चुकी है हिंदू व्यक्ति की हत्या
यह पहला मामला नहीं है। अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के कार्यकाल के दौरान अल्पसंख्यकों पर हमलों में तेजी देखी जा रही है। कुछ दिन पहले नरसिंगदी शहर में एक 40 वर्षीय हिंदू व्यक्ति की अज्ञात हमलावरों ने धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी थी, जिससे पूरे इलाके में भय का माहौल बन गया।
पत्रकार और व्यापारी भी बने निशाना
5 जनवरी को जशोर के कोपलिया बाजार में हिंदू व्यापारी और पत्रकार राणा प्रताप की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इससे पहले 18 दिसंबर को मयमनसिंह में एक कपड़ा फैक्ट्री में काम करने वाले दीपू चंद्र दास को ईशनिंदा के आरोप लगाकर पीट-पीटकर मार डाला गया था और बाद में उनके शव को पेड़ से बांधकर जला दिया गया।
शरियतपुर में खोकन चंद्र दास की दर्दनाक मौत
31 दिसंबर 2025 को शरियतपुर में व्यापारी खोकन चंद्र दास पर चाकू से हमला कर उन्हें जला दिया गया था। गंभीर हालत में उन्हें ढाका ले जाया गया, जहां तीन दिन बाद इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना ने भी अल्पसंख्यक समुदाय को झकझोर कर रख दिया।
मानवाधिकार संगठनों ने उठाए सवाल
लगातार हो रही इन हत्याओं को लेकर मानवाधिकार संगठनों और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी और स्थानीय स्तर पर कमजोर कार्रवाई से अपराधियों के हौसले बढ़ रहे हैं, जिससे हिंदू समुदाय में डर और असुरक्षा का माहौल गहराता जा रहा है।
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