Astrology: रंक से राजा बनाते हैं ये 2 ग्रह, खुश करने के लिए करें ये उपाय, भर जाएगी खाली तिजोरी

हिंदू ज्योतिष शास्त्र में ग्रहों की चाल और उनकी स्थिति का मनुष्य के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। अक्सर हम देखते हैं कि, कुछ लोग कम मेहनत के बावजूद अपार धन-दौलत और सुख-सुविधाओं का आनंद लेते हैं, जबकि कुछ लोग दिन-रात पसीना बहाने के बाद भी आर्थिक तंगी से जूझते रहते हैं। ज्योतिष विज्ञान के अनुसार, यह सब आपकी कुंडली में बैठे ग्रहों का खेल है। विशेष रूप से बृहस्पति (गुरु) और शुक्र ये दो ऐसे ग्रह हैं, जिनमें व्यक्ति को फर्श से अर्श तक पहुंचाने की शक्ति होती है। यदि आपकी कुंडली में ये दो ग्रह मजबूत हैं, तो धन की वर्षा निश्चित है, लेकिन इनका कमजोर होना आपको कर्ज के दलदल में धकेल सकता है।

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बृहस्पति और शुक्र ग्रह

ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति ग्रह को देवगुरु का दर्जा प्राप्त है। इन्हें भाग्य, ज्ञान, संतान और सबसे महत्वपूर्ण धन का कारक माना जाता है। यदि किसी जातक की कुंडली में बृहस्पति शुभ और मजबूत स्थिति में विराजमान हैं, तो उसे जीवन भर आर्थिक स्थिरता बनी रहती है। ऐसा व्यक्ति न केवल धन कमाता है, बल्कि समाज में मान-सम्मान और पद-प्रतिष्ठा भी प्राप्त करता है। बृहस्पति की कृपा से करियर में उच्च पद और व्यापार में निरंतर प्रगति के मार्ग प्रशस्त होते हैं।

दूसरी ओर, शुक्र ग्रह को दैत्यगुरु माना जाता है, लेकिन भौतिक संसार में यह ग्रह सुख, विलासिता, प्रेम और वैभव का प्रतीक है। यदि आपकी कुंडली में शुक्र मजबूत है, तो आप एक राजसी जीवन का आनंद लेते हैं। अच्छी गाड़ियां, आलीशान घर और सभी प्रकार की सुख-सुविधाएं शुक्र की ही देन हैं। जब शुक्र और बृहस्पति दोनों का तालमेल सही बैठता है, तो व्यक्ति को राजयोग प्राप्त होता है, जिससे वह रंक से राजा बन जाता है।

कैसे पहचाने साथ नहीं दे रहे ग्रह

यदि आप कड़ी मेहनत कर रहे हैं, लेकिन फिर भी पैसा हाथ में नहीं टिकता, तो यह ग्रहों की कमजोरी का संकेत हो सकता है। जब आर्थिक मामलों से संबंधित ग्रह पीड़ित होते हैं, तो अप्रत्याशित खर्च अचानक बढ़ जाते हैं। जमा की गई बचत बिना किसी ठोस कारण के खत्म होने लगती है। निवेश किए गए धन में लगातार घाटा होना, बार-बार नौकरी छूटना या व्यवसाय में मंदी छा जाना इसके प्रमुख लक्षण हैं। इसके अलावा, यदि व्यक्ति लगातार कर्ज के बोझ तले दबता जा रहा है, तो समझ लेना चाहिए कि शुक्र या बृहस्पति में से कोई एक ग्रह दोषपूर्ण स्थिति में है।

करें ये उपाय

शास्त्रों में इन ग्रहों को शांत करने और मजबूत बनाने के कई प्रभावी उपाय बताए गए हैं। सबसे प्रमुख उपाय कनकधारा स्तोत्र का पाठ माना जाता है। आदि शंकराचार्य द्वारा रचित यह स्तोत्र देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने का अमोघ अस्त्र है। मान्यता है कि, जो व्यक्ति नियमित रूप से कनकधारा स्तोत्र का पाठ करता है, उसके घर से दरिद्रता का नाश होता है और धन प्राप्ति के नए मार्ग खुलते हैं।

वास्तु शास्त्र के अनुसार, धन के देवता भगवान कुबेर का निवास उत्तर दिशा में होता है, इसलिए घर की उत्तर दिशा को हमेशा साफ-सुथरा और खाली रखना चाहिए। अपनी धन की अलमारी या तिजोरी को इस प्रकार रखें कि, उसका मुख उत्तर दिशा की ओर खुले। इसके अतिरिक्त, राहु और केतु के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए प्रतिदिन सात प्रकार के अनाज पक्षियों को खिलाने की सलाह दी जाती है। इससे ग्रहों की बाधाएं दूर होती हैं और आर्थिक प्रगति के द्वार खुलते हैं।

गुरु बृहस्पति को करें मजबूत

देवगुरु बृहस्पति को प्रसन्न करने के लिए गुरुवार का दिन सर्वोत्तम है। इस दिन जातक को पीले रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए। केले के पेड़ की पूजा करना और उसके सम्मुख शुद्ध घी का दीपक जलाना अत्यंत फलदायी होता है। दान का भी विशेष महत्व है। गुरुवार को गरीबों को पीली मसूर की दाल, हल्दी, चने की दाल या केसर का दान करना चाहिए। मंत्रों की शक्ति भी इसमें सहायक है, ‘ॐ गुरुवे नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करने से बृहस्पति की कृपा प्राप्त होती है और बुद्धि व धन का विकास होता है।

शुक्र ग्रह  को मजबूत करने के उपाय

शुक्र ग्रह की शुभता प्राप्त करने के लिए शुक्रवार के दिन सफेद वस्त्र पहनने चाहिए। चूंकि शुक्र सौंदर्य और स्वच्छता के प्रिय हैं, इसलिए स्वयं को साफ-सुथरा रखना और सुगंधित इत्र का प्रयोग करना लाभकारी होता है। देवी महालक्ष्मी की आराधना करें और उन्हें सफेद फूल खासकर कमल या गुलाब अर्पित करें। शुक्रवार को चावल, दूध, चीनी या सफेद मिठाई का दान करने से शुक्र दोष शांत होता है। शुक्र के विशेष मंत्र ‘ॐ शुक्राय नमः’ का जाप करने से जीवन में भौतिक सुखों की कमी नहीं रहती और विलासितापूर्ण जीवन का सपना पूरा होता है।

 

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