
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया के आसमान पर मंडराते युद्ध के बादलों और ईरान-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने पूरी दुनिया को चिंता में डाल दिया है। खाड़ी संकट के इस दौर में जहां एक ओर महाशक्तियां अपनी रणनीतियों में उलझी हैं। वहीं भारत सरकार का पूरा ध्यान इस अशांत क्षेत्र में फंसे अपने लाखों नागरिकों की सुरक्षा और उनकी सकुशल वतन वापसी पर केंद्रित है। खाड़ी के इस रणक्षेत्र में छिपे खतरों के बावजूद भारतीय कूटनीतिक मिशनों ने जिस मुस्तैदी से बचाव अभियान चलाया है, वह आज पूरी दुनिया के लिए एक मिसाल बन गया है।
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हालात हो रहे जटिल
विदेश मंत्रालय की चौबीसों घंटे चलने वाली निगरानी और जमीनी स्तर पर भारतीय दूतावासों की सक्रियता का ही परिणाम है कि अब तक 11 लाख से ज्यादा भारतीय नागरिक मौत के साये से निकलकर सुरक्षित अपने घरों तक पहुंच चुके हैं।

खाड़ी और पश्चिम एशिया में मौजूदा हालात दिन-ब-दिन जटिल होते जा रहे हैं। ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर को बरकरार रखने की कोशिशों पर जिस तरह के मतभेद उभरकर सामने आए हैं, उसने तेल आपूर्ति से लेकर समुद्री व्यापार तक को खतरे में डाल दिया है। ऐसी चुनौतीपूर्ण स्थिति में भारत ने अपनी तटस्थता और कूटनीतिक कौशल का परिचय देते हुए सभी पक्षों से संपर्क बनाए रखा है।
विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि, उनकी पहली और आखिरी प्राथमिकता युद्धग्रस्त क्षेत्रों में फंसे हर एक भारतीय की हिफाजत सुनिश्चित करना है। मंत्रालय न केवल दिल्ली से बल्कि तेहरान, तेल अवीव, रियाद और दुबई जैसे महत्वपूर्ण केंद्रों से पल-पल की जानकारी जुटा रहा है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तत्काल मदद पहुंचाई जा सके।
नाविक भी निकले सुरक्षित
समुद्री मार्ग से होने वाले व्यापार और वहां काम करने वाले भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर भी सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। हाल ही में होर्मुज स्ट्रेट से गुजरते समय भारतीय नाविकों को लेकर जो चिंताएं थीं, उन्हें सरकार ने स्पष्ट तौर पर दूर कर दिया है। 18 अप्रैल 2026 को होर्मुज की रणनीतिक जलधारा से सुरक्षित बाहर निकले तेल टैंकर देश गरिमा की खबर ने राहत की बड़ी लहर पैदा की है।
इस विशाल जहाज पर सवार सभी 31 भारतीय नाविक पूरी तरह सुरक्षित हैं और वे भारतीय अधिकारियों के लगातार संपर्क में हैं। करीब 97,422 मीट्रिक टन कच्चा तेल लेकर भारत आ रहा यह जहाज 22 अप्रैल तक मुंबई के तट पर पहुंचने की उम्मीद है। इस जहाज की सफल यात्रा यह दर्शाती है कि, युद्ध के खतरों के बीच भी भारतीय नाविकों और व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए कूटनीतिक स्टेकहोल्डर्स के साथ समन्वय कितना प्रभावी है।
हवाई मार्ग से रेस्क्यू ऑपरेशन की बात करें, तो यह आंकड़ा हैरान करने वाला है। 28 फरवरी से लेकर 20 अप्रैल तक की संक्षिप्त अवधि में लगभग 11 लाख 30 हजार हवाई यात्रियों को खाड़ी देशों से सुरक्षित भारत लाया जा चुका है। खाड़ी क्षेत्र के जिस देश में भी एयरस्पेस यानी हवाई मार्ग खुला है, वहां से भारत के लिए उड़ानें चालू हैं।
इन रास्तों से निकाले जा रहे लोग
सरकार ने स्पष्ट किया है कि, जब तक आखिरी भारतीय सुरक्षित नहीं लौट आता, यह सिलसिला थमेगा नहीं। विशेष रूप से ईरान में फंसे भारतीयों के लिए तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने एक अनूठा और सुरक्षित मार्ग तैयार किया है। ईरान से सीधे उड़ानें संभव न होने की स्थिति में भारतीयों को आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते सुरक्षित निकाला जा रहा है। अब तक इस वैकल्पिक मार्ग से 2,358 नागरिकों को वतन पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है, जिनमें 1,041 स्टूडेंट और 657 भारतीय मछुआरे शामिल हैं, जो वहां संघर्ष के कारण अधर में लटके हुए थे।
खाड़ी के युद्धग्रस्त क्षेत्र से भारतीयों की वापसी की प्रक्रिया भौगोलिक चुनौतियों के हिसाब से तय की गई है। ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से करीब 110 फ्लाइट्स का संचालन हुआ है। इसी तरह से सऊदी अरब और ओमान के भी विभिन्न एयरपोर्ट से भारत के लिए उड़ानें जारी हैं। कतर का भी एयरस्पेस कुछ हद तक खुला हुआ है और लगभग 10 से 11 उड़ानें रोज संचालित हो रही हैं। यह सक्रियता दर्शाती है कि, भारत ने अपने नागरिकों के लिए खाड़ी क्षेत्र में एक सुरक्षा घेरा तैयार कर लिया है।
सऊदी अरब का मिला साथ
कुवैत जैसे देशों में जहां एयरस्पेस पूरी तरह बंद है, वहां कूटनीति के जरिए जमीनी रास्तों का इस्तेमाल किया जा रहा है। कुवैत में फंसे भारतीयों को पहले सऊदी अरब के रास्ते लाया जा रहा है और फिर वहां से विमानों के जरिए भारत भेजा जा रहा है। बहरीन का एयरस्पेस खुला है और बहरीन का गल्फ एयर भी भारत के लिए सीमित उड़ानें शुरू करने की योजना पर काम कर रहा है, जिससे वहां फंसे प्रवासियों को राहत मिलेगी। इराक का एयरस्पेस भी फिलहाल खुला हुआ है, जिसका इस्तेमाल भारत की यात्रा के लिए एक वैकल्पिक ट्रांजिट पॉइंट के तौर पर किया जा सकता है।

इजरायल और जॉर्डन के मोर्चे पर भी भारतीय दूतावास अत्यधिक सक्रियता दिखा रहे हैं। इजरायल का एयरस्पेस सीमित रूप से खुला होने के कारण भारतीय नागरिकों के लिए जॉर्डन और मिस्र के रास्ते यात्रा सुनिश्चित की जा रही है। सरकार ने इन देशों के साथ विशेष समन्वय किया है ताकि भारतीय नागरिकों को यात्रा में किसी प्रकार की अड़चन न आए। ईरान की स्थिति सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण है क्योंकि वहां से फिलहाल कार्गो या चार्टर्ड उड़ानें ही संचालित हो रही हैं। यही कारण है कि तेहरान स्थित भारतीय दूतावास आर्मेनिया और अजरबैजान के रास्ते भारतीयों को स्वदेश भेज रहा है।
22 अप्रैल को मुंबई पहुंचेंगी रेस्क्यू फ्लाइट्स
विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि जो भारतीय नागरिक अभी भी कार्यस्थल की मजबूरियों या अन्य कारणों से खाड़ी देशों में रुके हुए हैं, उनके हितों की रक्षा के लिए संबंधित स्टेकहोल्डर्स के साथ लगातार संपर्क जारी है। भारतीय दूतावासों ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं जो 24 घंटे काम कर रहे हैं। इस संकट ने यह सिद्ध कर दिया है कि वैश्विक राजनीति के उतार-चढ़ाव के बीच भारत अपने नागरिकों की सुरक्षा के प्रति कितना गंभीर है। आने वाले कुछ दिन खाड़ी क्षेत्र के लिए काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं, और भारत की नजर अब 22 अप्रैल को मुंबई पहुंचने वाले देश गरिमा और अन्य रेस्क्यू फ्लाइट्स पर टिकी है।
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