ईरान में 10 हजार सैनिक उतार सकता है अमेरिका, ट्रंप बना रहे ये गुप्त प्लान

वाशिंगटन। दुनिया इस समय एक बार फिर सांसें रोककर मिडिल ईस्ट की ओर देख रही है। अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक तरफ ईरान के साथ बातचीत के दरवाजे खोलने का दिखावा किया है, तो दूसरी तरफ पर्दे के पीछे एक ऐसी सैन्य बिसात बिछाई जा रही है जो किसी बड़े धमाके की ओर इशारा कर रही है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक ताजा और चौंकाने वाली रिपोर्ट ने पूरी दुनिया में खलबली मचा दी है। इस रिपोर्ट के अनुसार, पेंटागन और अमेरिकी रक्षा विभाग मिडिल ईस्ट में 10,000 अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती पर बेहद गंभीरता से विचार कर रहा है।

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हैरानी की बात यह है कि यह तैनाती उस समय होने जा रही है जब डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के ऊर्जा क्षेत्र पर हमलों को 10 दिनों के लिए टालने यानी सीजफायर का ऐलान किया है। जानकारों का मानना है कि यह 10 दिन का समय शांति के लिए नहीं, बल्कि ईरान पर निर्णायक प्रहार करने की तैयारी के लिए हो सकता है। क्या ट्रंप बातचीत के बहाने ईरान को फुसला रहे हैं ताकि 10 हजार सैनिकों के साथ एक बड़ी चढ़ाई की जा सके? यह सवाल इस समय वाशिंगटन से लेकर तेहरान तक गूंज रहा है।

 17 हजार सैनिकों का नया दस्ता तैयार

अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के उच्च पदस्थ अधिकारियों के हवाले से जो खबरें छनकर बाहर आ रही हैं, वे बेहद डरावनी हैं। रक्षा विभाग जिस 10 हजार अतिरिक्त सैनिकों की टुकड़ी को भेजने की योजना बना रहा है, वह उस 82वीं एयरबोर्न डिवीजन के अतिरिक्त होगी, जिसे पहले ही युद्ध क्षेत्र में जाने का आदेश मिल चुका है।

US Iran War

यदि इस योजना पर अंतिम मुहर लग जाती है, तो अकेले इस नए अभियान के तहत करीब 17,000 अमेरिकी सैनिक पश्चिम एशिया की ओर कूच करेंगे। गौर करने वाली बात यह है कि मिडिल ईस्ट में पहले से ही 40 से 50 हजार अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। इन अतिरिक्त सैनिकों के आने के बाद इस क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य शक्ति का घनत्व इतना बढ़ जाएगा कि ईरान की सीमाओं पर दबाव असहनीय हो सकता है।

पेंटागन की योजना केवल पैदल सैनिकों तक सीमित नहीं है। दो ‘मरीन एक्सपेडिशनरी यूनिट’ की भी तैनाती प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, जिसके तहत 5,000 जांबाज मरीन कमांडो और नौसेना के हजारों अन्य कर्मी समुद्र के रास्ते ईरान को घेरने की तैयारी में हैं।

ट्रंप का का माइंड गेम

डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी चिर-परिचित शैली में माइंड गेम्स खेलना शुरू कर दिया है। पहले उन्होंने 27 मार्च को हमलों की समयसीमा 5 दिनों के लिए बढ़ाई थी, जिसे अब बढ़ाकर 6 अप्रैल कर दिया गया है। ट्रंप का दावा है कि ईरान ने उनसे बातचीत के लिए समय मांगा है और वे ‘सौदा’ करने के करीब हैं। हालांकि, शांति वार्ता में शामिल मध्यस्थों का कहना कुछ और ही है। उनके अनुसार, तेहरान ने अतिरिक्त समय की कोई आधिकारिक मांग नहीं की है।

यह विरोधाभास संकेत देता है कि ट्रंप इस समयसीमा का उपयोग ईरान पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए कर रहे हैं। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर सीधे ईरानी नेताओं को चेतावनी देते हुए लिखा है कि, बहुत देर होने से पहले बातचीत की मेज पर आ जाओ, क्योंकि एक बार कार्रवाई शुरू हो गई तो पीछे मुड़ने का कोई रास्ता नहीं बचेगा। ट्रंप का यह बयान स्पष्ट करता है कि यह सीजफायर शांति की गारंटी नहीं, बल्कि युद्ध से पहले की आखिरी चेतावनी है।

ईरान की मजबूरी या ट्रंप का दावा

गुरुवार को एक और चौंकाने वाले बयान में ट्रंप ने कहा कि ईरान इस समय अमेरिका से समझौता करने की भीख मांग रहा है। गौरतलब है कि अमेरिका ने ईरान के सामने 15 सूत्रीय युद्धविराम योजना रखी थी, जिसे शुरुआत में तेहरान ने ठुकरा दिया था, लेकिन अब ट्रंप का दावा है कि, ईरान के आर्थिक और ऊर्जा क्षेत्र पर मंडराते खतरे ने उन्हें घुटनों पर ला दिया है।

ट्रंप की दोतरफा रणनीति 

ईरान के तेल और गैस सेक्टर को निशाना बनाने की धमकी देकर उसकी अर्थव्यवस्था को पंगु बनाना।

10 हजार अतिरिक्त सैनिकों की खबर लीक करके ईरानी सेना (IRGC) के हौसले पस्त करना।

विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप एक कुशल डीलर की तरह व्यवहार कर रहे हैं। वे ईरान को यह दिखाना चाहते हैं कि उनके पास बातचीत की मेज पर बैठने का विकल्प है, लेकिन यदि वे नहीं मानते, तो 10 हजार सैनिकों की चढ़ाई के साथ प्लान-बी पूरी तरह तैयार है।

पूरी दुनिया की नजरें अब 6 अप्रैल की तारीख पर टिकी हैं। यदि तब तक कोई ठोस समझौता नहीं होता है, तो मिडिल ईस्ट में एक भीषण आग सुलग सकती है। 82वीं एयरबोर्न डिवीजन और मरीन यूनिट्स की सक्रियता बताती है कि, अमेरिका केवल सुरक्षा के लिए सैनिक नहीं बढ़ा रहा, बल्कि वह किसी भी समय ऑफेंसिव यानी आक्रामक रुख अपनाने की स्थिति में रहना चाहता है।

अमेरिकी रक्षा अधिकारियों का मानना है कि 10 हजार अतिरिक्त सैनिकों की तैनाती से ईरान के प्रॉक्सी समूहों (जैसे हिजबुल्लाह और हूतियों) को भी कड़ा संदेश जाएगा। ट्रंप यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि यदि इजरायल या अन्य सहयोगियों पर कोई बड़ा हमला होता है, तो अमेरिका की प्रतिक्रिया इतनी तेज और घातक हो कि ईरान उसे संभाल न पाए।

डोनाल्ड ट्रंप का यह 10 दिवसीय युद्धविराम का धमाका एक दोधारी तलवार है। एक तरफ यह कूटनीति की आखिरी उम्मीद है, तो दूसरी तरफ एक बड़े सैन्य आक्रमण की प्रस्तावना। 10 हजार सैनिकों की यह संभावित तैनाती ईरान को यह बताने के लिए काफी है कि अमेरिका अब केवल धमकियों तक सीमित नहीं रहेगा। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि मिडिल ईस्ट में शांति का सूरज उगेगा या बारूद का धुंआ आसमान को काला कर देगा।

 

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