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एडवा, एपवा व भारतीय महिला फेडेरेशन ने कहा छात्राएं अन्याय के खिलाफ खोले मुंह

लखनऊ। महिलाओं और बच्चियों पर हो रही हिंसा के खिलाफ एडवा, एपवा व भारतीय महिला फेडेरेशन के 15 दिवसीय अभियान के तहत शनिवार को आलमबाग के एक डिग्री कालेज में छात्राओं के साथ संवाद किया गया। प्रोग्राम के आरंभ में संविधान की प्रस्तावना का पाठ किया गया। एडवा, एपवा व भारतीय महिला फेडेरेशन ने कहा छात्राएं अन्याय के खिलाफ खोले मुंह।

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एडवा, एपवा व भारतीय महिला फेडेरेशन ने कहा छात्राएं अन्याय के खिलाफ खोले मुंह

छात्राओं से संवाद करते हुए एडवा की मधु गर्ग ने कहा कि लड़कियों के साथ भेदभाव का आरंभ उनके जन्म से पहले ही आरंभ हो जाता है। उनको जन्म लेने से ही रोका जाता है और यदि वे दुनिया में आ भी गईं तो परिवार में ही उनके साथ भेदभाव होता है वहीं लड़कों को “मर्द” बनाकर पाला जाता है जो उनकी हिंसक प्रवृत्ति को बढ़ावा देता है । लड़कियों के साथ बढ़ती हिंसा का एक बड़ा कारण है कि बाजार की ताकतों ने उन्हें एक इंसान नहीं बल्कि “वस्तु” बना दिया है। एडवा, एपवा व भारतीय महिला फेडेरेशन ने कहा छात्राएं अन्याय के खिलाफ खोले मुंह।

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सामाजिक कार्यकर्ता नाइश हसन ने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि आज संविधान के मूल्यों को अपने जीवन में अंगीकार करने की जरूरत है । उन्होंने कहा कि सभी समुदायों की महिलाओं  के हक़ में बने कानूनों के लिए महिलाओं ने ही लड़ाई लड़ी है । एडवा, एपवा व भारतीय महिला फेडेरेशन ने कहा छात्राएं अन्याय के खिलाफ खोले मुंह।

नाइश ने महिलाओं की आर्थिक स्वतंत्रता पर बल देते हुए कहा कि महिला की आर्थिक आजादी उसके सशक्तिकरण की एक आवश्यक शर्त है । भारतीय महिला फेडेरेशन की कांति मिश्रा ने छात्राओं से अन्याय के खिलाफ चुप्पी तोड़ने का आह्वाहन किया। महिला हिंसा के खिलाफ यह अभियान जारी रहेगा । एडवा, एपवा व भारतीय महिला फेडेरेशन ने कहा छात्राएं अन्याय के खिलाफ खोले मुंह।