यूपी के 50 जिलों में आज आएगा भीषण तूफ़ान!, आपदा प्रबन्धन टीमें तैनात, घर से बाहर न निकलने का अलर्ट

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में इस समय मौसम लुकाछिपी खेल रहा है। कभी तेज गर्मी पड़ रही है, तो कभी बारिश, तेज आंधी और ओलावृष्टि हो रही है। जी हां, अप्रैल के पहले सप्ताह में तापमान 40 डिग्री के पार जाने की तैयारी कर रहा था, लेकिन अचानक से मौसम ने ऐसी करवट ले ली है कि, खेतों में पड़ी किसानों की फसलें बर्बाद हो रही हैं।

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60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी हवा

मौसम विभाग का पूर्वानुमान है कि, 7 और 8 अप्रैल को प्रदेश के एक बड़े हिस्से में 60 किमी प्रति घंटे क रफ्तार से हवाएं चलेंगी। साथ ही तेज बारिश, ओलावृष्टि औरआकाशीय बिजली गिरने की संभावना है। आईएमडी की मानें तो ये एक जानलेवा तूफान है।  उत्तर प्रदेश के करीब 50 जिलों में प्रशासन ने हाई अलर्ट घोषित किया है और लोगों को घरों से बाहर न निकलने की सख्त चेतावनी जारी की गई है।

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मौसम के इस बिगड़े मिजाज की शुरुआत पश्चिमी उत्तर प्रदेश से हो चुकी है, जहां धूल भरी आंधी ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त करना शुरू कर दिया है। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, यह मौसमी बदलाव एक अत्यंत सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण हुआ है, जिसे अरब सागर से आने वाली नमी ने और अधिक घातक बना दिया है।

इसके प्रभाव से न केवल तापमान में 8 से 10 डिग्री सेल्सियस तक की भारी गिरावट दर्ज की जाएगी, बल्कि यह किसानों के लिए काली रात जैसा साबित हो सकता है। लखनऊ, कानपुर, आगरा, मेरठ और गाजियाबाद जैसे बड़े शहरों में बादल छाए हुए हैं और हवाओं की गति धीरे-धीरे प्रचंड रूप धारण कर रही है। अगले 48 घंटे उत्तर प्रदेश के इतिहास में अप्रैल महीने के सबसे चुनौतीपूर्ण दिनों में से एक हो सकते हैं।

इन जिलों की स्थिति चिंताजनक

विशेष रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 11 जिलों, जैसे अलीगढ़, मथुरा, हाथरस, कासगंज, एटा, आगरा, फिरोजाबाद, मैनपुरी, इटावा, औरैया और जालौन में स्थिति सबसे अधिक चिंताजनक बनी हुई है। इन क्षेत्रों में 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाएं किसी बवंडर से कम नहीं होंगी, जो पुराने पेड़ों, बिजली के खंभों और कच्चे मकानों को जमींदोज करने की क्षमता रखती हैं।

प्रशासन ने इन इलाकों में आपदा प्रबंधन टीमों को तैनात कर दिया है और नगर निकायों को जलभराव से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा है। इसके साथ ही, रुहेलखंड और तराई के जिलों जैसे बिजनौर, अमरोहा और मुजफ्फरनगर में भी भारी ओलावृष्टि की आशंका जताई गई है, जिससे न केवल तापमान गिरेगा बल्कि सड़कों पर सफेद चादर बिछ सकती है।

इस प्राकृतिक बदलाव का सबसे दर्दनाक पहलू कृषि क्षेत्र से जुड़ा है। उत्तर प्रदेश का किसान इस समय अपनी साल भर की मेहनत यानी गेहूं की फसल की कटाई में व्यस्त है। खेतों में सुनहरी चमक बिखेरती गेहूं की फसल इस समय कटने के लिए तैयार खड़ी है, लेकिन ओलावृष्टि और तेज बारिश इसे मिट्टी में मिला सकती है।

आम की पैदावार पर भी संकट

कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि, अगर इस दौरान भारी बारिश और ओले गिरते हैं, तो फसल की गुणवत्ता खराब हो जाएगी और उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है। इसके अलावा आम की खेती करने वाले बागवानों के लिए भी यह समय किसी परीक्षा से कम नहीं है, क्योंकि तेज आंधी के कारण आम के बौर और छोटे फल टूटकर गिर सकते हैं, जिससे इस साल आम की पैदावार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

राजधानी लखनऊ और कानपुर जैसे मध्य उत्तर प्रदेश के जिलों में भी मौसम का असर दिखना शुरू हो गया है। यहां धूल भरी आंधी के कारण दोपहर में ही अंधेरा छा जाने जैसी स्थिति बन सकती है। मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि इस सिस्टम के प्रभाव से बिजली कड़कने और गिरने की घटनाएं बढ़ सकती हैं, जो विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में खुले में काम करने वाले लोगों के लिए घातक हो सकती हैं।

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गाजियाबाद और नोएडा समेत पूरे दिल्ली-NCR में भी 8 अप्रैल को भारी बारिश और आंधी का पीक रहने वाला है। यहां रहने वाले लोगों को सलाह दी गई है कि वे अपनी बालकनी में रखे सामान को सुरक्षित कर लें और बिजली के उपकरणों का इस्तेमाल सावधानी से करें, क्योंकि वोल्टेज में उतार-चढ़ाव या बिजली गिरने से बड़े नुकसान की संभावना है।

मुख्यमंत्री कार्यालय ले रहा अपडेट

प्रशासनिक स्तर पर मुख्यमंत्री कार्यालय लगातार जिलाधिकारियों के संपर्क में है और पल-पल की रिपोर्ट ली जा रही है। बिजली विभाग को विशेष रूप से निर्देश दिए गए हैं कि, आंधी के दौरान सुरक्षा के मद्देनजर विद्युत आपूर्ति बंद कर दी जाए, ताकि तारों के टूटने से किसी भी प्रकार की जनहानि को रोका जा सके।

उत्तर प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने दामिनी ऐप के माध्यम से लोगों को बिजली गिरने की सूचनाएं पहले ही भेजने की व्यवस्था की है। लोगों से अपील की गई है कि, वे आंधी के दौरान ऊंचे पेड़ों, साइनबोर्डों या पुराने ढांचों के नीचे शरण न लें। 9 अप्रैल तक यह सिस्टम धीरे-धीरे पूर्वी उत्तर प्रदेश की ओर बढ़ जाएगा, जिससे वाराणसी, प्रयागराज और गोरखपुर जैसे जिलों में भी गरज-चमक के साथ बारिश देखने को मिलेगी।

हालांकि, 10 अप्रैल से मौसम के दोबारा साफ होने की उम्मीद है, लेकिन तब तक यह आसमानी आफत प्रदेश को एक बड़े आर्थिक और शारीरिक नुकसान के मुहाने पर खड़ा कर चुकी होगी। अप्रैल की इस बेमौसम बरसात ने एक बार फिर ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के खतरों की ओर इशारा किया है। फिलहाल, अगले 48 घंटे पूरे उत्तर प्रदेश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं, जहां हर नागरिक को सतर्क रहने और सरकारी निर्देशों का पालन करने की आवश्यकता है ताकि इस प्राकृतिक आपदा के प्रभाव को कम किया जा सके।

 

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