40 साल बाद भारत-न्यूजीलैंड रिश्तों की नई शुरुआत, 2030 तक का रोडमैप तैयार

 नई दिल्ली। भारत और न्यूजीलैंड के रिश्तों में एक नया अध्याय जुड़ गया है। दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय संबंधों को औपचारिक रूप से ‘रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक पहुंचा दिया है, जो कूटनीतिक दृष्टि से बड़ा कदम माना जा रहा है। इस ऐतिहासिक फैसले के साथ ही दोनों पक्षों ने ‘इंडिया-न्यूजीलैंड स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप: रोडमैप 2030’ नामक दस्तावेज़ को भी अपनी मंजूरी दे दी है, जिसके ज़रिए आने वाले चार वर्षों में व्यापार, कृषि, सुरक्षा, नवाचार और आपसी जनसंपर्क जैसे कई अहम क्षेत्रों में सहयोग को नई गति दी जाएगी।

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यह बड़ा निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की न्यूजीलैंड यात्रा के दौरान लिया गया। इसकी खासियत यह है कि, पिछले चार दशकों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली आधिकारिक न्यूजीलैंड यात्रा है। इस लिहाज़ से इसे दोनों देशों के कूटनीतिक इतिहास में एक मील का पत्थर कहा जा सकता है।

रणनीतिक साझेदारी की घोषणा 

भारत और न्यूजीलैंड की सरकारों की तरफ से जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि, दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों ने आपसी सहमति से रिश्तों को रणनीतिक साझेदारी के दर्जे तक ले जाने का फैसला किया।

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इसके साथ ही स्वीकृत हुए रोडमैप 2030 को अगले चार वर्षों के लिए दोनों देशों के सहयोग की रूपरेखा और मार्गदर्शक दस्तावेज़ माना जा रहा है। दोनों नेताओं ने इस मौके पर कहा कि, इस कदम का उद्देश्य केवल मौजूदा सहयोग को मज़बूत करना ही नहीं, बल्कि नए क्षेत्रों की पहचान कर उनमें साझा प्रयास करना और द्विपक्षीय के अलावा बहुपक्षीय मंचों पर भी तालमेल बढ़ाना है।

40 वर्षों बाद ऐतिहासिक यात्रा

प्रधानमंत्री मोदी 10 और 11 जुलाई को न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के निमंत्रण पर इस देश के आधिकारिक दौरे पर पहुंचे। यह तथ्य कि पिछले 40 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने न्यूजीलैंड की औपचारिक यात्रा नहीं की थी। इस दौरे को और भी खास बना देता है। विश्लेषकों का मानना है कि, यह यात्रा भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति और इस क्षेत्र में साझेदार देशों के साथ रिश्ते मज़बूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संकेत है।

2030 तक व्यापार बढ़ाने का लक्ष्य

‘रोडमैप 2030’ के अंतर्गत दोनों देशों ने एक स्पष्ट और महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। योजना के मुताबिक, साल 2030 तक भारत और न्यूजीलैंड के बीच वस्तुओं और सेवाओं का द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाकर करीब 7 अरब न्यूजीलैंड डॉलर, यानी लगभग 35 हज़ार करोड़ रुपये तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए दोनों पक्ष व्यापार में आने वाली बाधाओं को दूर करने, निवेश के नए रास्ते खोलने और आर्थिक साझेदारी को मज़बूत बनाने पर मिलकर काम करेंगे।

FTA पर हुए हस्ताक्षर

इस यात्रा के दौरान एक और अहम उपलब्धि भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर हस्ताक्षर होना रहा। दोनों प्रधानमंत्रियों ने इस समझौते का स्वागत करते हुए इसे जल्द से जल्द लागू करने की दिशा में काम करने पर सहमति जताई।

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संयुक्त बयान के अनुसार, यह समझौता व्यापारिक बाधाओं को घटाएगा, दोनों देशों के बीच आर्थिक रिश्तों को मज़बूती देगा और साथ ही न्यूजीलैंड से भारत में विदेशी निवेश आकर्षित करने में भी सहायक साबित होगा।

‘विकसित भारत 2047’ में न्यूजीलैंड की भागीदारी

इस साझेदारी की एक दिलचस्प कड़ी यह भी है कि, न्यूजीलैंड ने भारत के महत्वाकांक्षी ‘विकसित भारत 2047’ लक्ष्य में सहयोग देने की इच्छा जताई है। इसके तहत दोनों देश व्यापार, कृषि, कौशल विकास, नवाचार, स्वच्छ ऊर्जा और खेल जैसे विविध क्षेत्रों में साझा प्रयास करेंगे। यह दिखाता है कि, यह साझेदारी सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं, बल्कि दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों से भी जुड़ी हुई है।

कस्टम प्रक्रियाएं होंगी आसान

व्यापार को सुगम बनाने के मकसद से दोनों देशों ने 2025 के ‘ऑथराइज्ड इकोनॉमिक ऑपरेटर्स म्यूचुअल रिकग्निशन अरेंजमेंट’ (AEO-MRA) को लागू करने पर भी सहमति जताई है।

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यह व्यवस्था 2024 में हुए कस्टम्स कोऑपरेशन अरेंजमेंट के दायरे में काम करेगी और इसका मकसद भरोसेमंद व्यापारियों के लिए सीमा-शुल्क प्रक्रियाओं को सरल और तेज़ बनाना है।

पर्यटन और सीधी उड़ानों को बढ़ावा

आपसी पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों ने एक मेमोरेंडम ऑफ अरेंजमेंट पर भी हस्ताक्षर किए। साथ ही दोनों नेताओं ने विमानन कंपनियों से भारत और न्यूजीलैंड के बीच सीधी नॉन-स्टॉप उड़ानें शुरू करने की अपील की, ताकि दोनों देशों के बीच यात्रियों और कारोबारियों की आवाजाही और आसान हो सके।

कृषि, बागवानी और डेयरी क्षेत्र में नया सहयोग

दोनों देशों ने बागवानी, वानिकी, पशुपालन और डेयरी जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है। इस साझेदारी के तहत न्यूजीलैंड, भारत में कीवी, सेब और शहद के उत्पादन को बेहतर बनाने के लिए उत्पादकता से जुड़ी योजनाओं पर काम करेगा। इसके अतिरिक्त भारत में एक कीवी उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने और पशुपालन-डेयरी क्षेत्र में सहयोग के लिए भी एक अलग समझौता ज्ञापन पर सहमति बनी है।

समुद्री क्षेत्र में भी बढ़ेगा तालमेल

समुद्री क्षेत्र को लेकर भी दोनों देशों के बीच अहम बातचीत हुई। भारत के महानिदेशालय नौवहन और मेरिटाइम न्यूजीलैंड के बीच नाविकों के कौशल प्रमाणपत्रों की पारस्परिक मान्यता को और मज़बूत करने के लिए बातचीत जारी रखने पर सहमति बनी। दोनों पक्षों का मानना है कि इससे नाविकों की आवाजाही आसान होगी और समुद्री क्षेत्र में सहयोग को नई ताकत मिलेगी।

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कुल मिलाकर देखा जाए, तो प्रधानमंत्री मोदी की यह न्यूजीलैंड यात्रा सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि ठोस नीतिगत और आर्थिक परिणामों वाली साबित हुई है। व्यापार लक्ष्य, मुक्त व्यापार समझौता, कृषि-डेयरी सहयोग और सामरिक साझेदारी जैसे कदम आने वाले वर्षों में भारत-न्यूजीलैंड रिश्तों को नई दिशा दे सकते हैं, और क्षेत्रीय भू-राजनीति के लिहाज़ से भी इसके व्यापक असर देखे जा सकते हैं।

 

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