
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के विकासनगर इलाके में गुरुवार सुबह उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक बहुमंजिला इमारत के बेसमेंट से धुआं निकलता देखा गया। मामला मामा चौराहा स्थित चर्चित अजीत टावर का है, जहां सुबह करीब 6 बजे अचानक आग भड़क उठी। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और पूरे बेसमेंट में काला धुआं भर गया।
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बड़ी त्रासदी टली
आपको बता दें कि, अजित टावर की इस बिल्डिंग में ही ग्राउंड फ्लोर पर देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई की शाखा संचालित होती है और ऊपरी मंजिलों पर दर्जनों परिवार निवास करते हैं। गनीमत यह रही कि, घटना के वक्त दमकल विभाग को तुरंत सूचना मिल गई, जिससे एक बड़ी त्रासदी होने से बाल-बाल बच गई।
अजीत टावर के बेसमेंट में स्थित सीढ़ियों नीचे बड़ी मात्रा में पुराना कबाड़ और अन्य ज्वलनशील सामान रखा हुआ था। स्थानीय लोगों के अनुसार, सुबह जब लोग सोकर उठे ही थे कि अचानक इमारत से धुएं के गुबार निकलने लगे। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि कुछ ही मिनटों में बेसमेंट में रखा सारा कबाड़ जलकर राख हो गया।
आग लगने की वजह से पूरी बिल्डिंग में धुएं के कारण दमघोंटू स्थिति पैदा हो गई थी, जिससे ऊपरी मंजिलों पर रहने वाले रह रहे लोगों में दहशत फैल गई। बैंक की शाखा होने के कारण सुरक्षा की दृष्टि से भी स्थिति बेहद संवेदनशील हो गई थी, क्योंकि आग अगर थोड़ी और फैलती तो बैंक के दस्तावेजों और संपत्ति को भारी नुकसान पहुंच सकता था।
पहले भी हो चुकी हैं आग लगने की घटनाएं
लखनऊ में आग लगने की यह कोई पहली घटना नहीं है। पिछले कुछ समय में शहर के विभिन्न व्यापारिक और रिहायशी इलाकों में अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी भारी पड़ती दिखी है। अभी हाल ही में लखनऊ के चारबाग इलाके के एक होटल में भीषण आग लगी थी, जिसमें वेंटिलेशन की कमी के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था।
उसी तरह, अमीनाबाद के संकरी गलियों वाले बाजारों में शॉर्ट सर्किट से लगी आग ने करोड़ों का माल स्वाहा कर दिया था। इन घटनाओं ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राजधानी की बहुमंजिला इमारतों में फायर सेफ्टी के इंतजामों को लेकर अब भी बड़ी लापरवाही बरती जा रही है, जो किसी भी वक्त बड़े जान-माल के नुकसान का कारण बन सकती है।
विकासनगर की इस घटना की जानकारी मिलते ही इंदिरा नगर फायर स्टेशन की टीम बिना वक्त गंवाए मौके पर पहुंच गई। दमकल कर्मियों ने अपनी जान जोखिम में डालकर बेसमेंट में प्रवेश किया और सबसे पहले वेंटिलेशन की व्यवस्था की। धुएं के कारण दृश्यता शून्य हो चुकी थी, जिसे कम करने के लिए टीम ने दरवाजे और खिड़कियां खोलकर धुआं बाहर निकाला। इसके बाद पानी की बौछारें कर आग पर पूरी तरह काबू पाया गया।
बैंक तक नहीं पहुंची आग
फायर टीम की मुस्तैदी का ही परिणाम था कि, आग बेसमेंट से ऊपर की ओर नहीं बढ़ पाई और ग्राउंड फ्लोर पर स्थित एसबीआई बैंक की शाखा पूरी तरह सुरक्षित बचा ली गई। साथ ही, ऊपरी मंजिलों पर मौजूद फ्लैटों तक भी आंच नहीं पहुंचने दी गई।
हजरतगंज के लेवाना होटल अग्निकांड जैसी बड़ी त्रासदी को झेलने के बाद भी लखनऊ की कई व्यावसायिक इमारतों के बेसमेंट आज भी कबाड़ घर बने हुए हैं, जो आग के लिए ईंधन का काम करते हैं। अजीत टावर की घटना ने एक बार फिर प्रशासन को सचेत किया है कि बेसमेंट में रखे जाने वाले सामानों की नियमित जांच कितनी अनिवार्य है। राहत की सबसे बड़ी बात यह रही कि इस पूरी घटना में कोई भी व्यक्ति हताहत नहीं हुआ है। हालांकि, बेसमेंट में रखा हजारों का सामान जलकर खाक हो गया है।
दमकल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि समय रहते कार्रवाई न होती तो रिहायशी इलाका होने के कारण नुकसान काफी बड़ा हो सकता था। फिलहाल आग लगने के सटीक कारणों की जांच की जा रही है, लेकिन शुरुआती तौर पर इसे शॉर्ट सर्किट से जोड़कर देखा जा रहा है। फायर ब्रिगेड ने बिल्डिंग प्रशासन को बेसमेंट में कबाड़ जमा न करने और वेंटिलेशन की उचित व्यवस्था बनाए रखने की सख्त हिदायत दी है।
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