
न्यूयार्क। न्यू जर्सी की रहने वाली एरिका टेट की कहानी इन दिनों दुनियाभर में चर्चा का विषय बनी हुई है। एरिका का दावा है कि वह करीब 7 घंटे तक क्लिनिकली डेड रहीं और इस दौरान उन्होंने उस दुनिया का अनुभव किया, जिसे आम तौर पर लोग परलोक या स्वर्ग कहते हैं। इस अनुभव ने उनकी सोच और जीवन दृष्टिकोण पूरी तरह बदल दिया।
2015 का दर्दनाक हादसा
साल 2015 में 32 वर्षीय एरिका न्यू जर्सी के पैलिसेड्स क्लिफ्स इलाके में हाइकिंग कर रही थीं। इसी दौरान उनका पैर फिसल गया और वह करीब 60 फीट गहरी खाई में गिर गई। हादसा इतना गंभीर था कि उनकी रीढ़ की हड्डी, पसलियां और हाथ फ्रैक्चर हो गए और दोनों फेफड़े भी क्षतिग्रस्त हो गए। सहायता के लिए कॉल किया गया, लेकिन सही लोकेशन न मिलने के कारण रेस्क्यू टीम को पहुंचने में लगभग 7 घंटे लग गए। अस्पताल में डॉक्टरों के अनुसार उनकी हालत बेहद नाजुक थी और वह क्लिनिकली मृत घोषित की जा चुकी थीं।
मौत के करीब पहुंचकर महसूस किया क्या?
एरिका का कहना है कि इस दौरान उन्होंने खुद को अपने शरीर से अलग महसूस किया और ऊपर से अपने घायल शरीर को देख पा रही थीं। उन्हें किसी तरह का दर्द नहीं था, बल्कि एक अजीब सी शांति और सुकून का अहसास हो रहा था। उन्होंने बताया कि उनकी पूरी जिंदगी जैसे आंखों के सामने फिल्म की तरह घूम रही थी, और वे अपने पुराने फैसलों, रिश्तों और दूसरों को दिए गए दुख को गहराई से समझ रही थीं।
न स्वर्ग-नरक, न फरिश्ते, सिर्फ रोशनी
एरिका के अनुसार इस अनुभव में न तो कोई स्वर्ग-नरक था और न ही कोई फरिश्ता या न्याय करने वाली शक्ति। वहां सिर्फ तेज और चमकदार रोशनी थी, जो उन्हें अपनी ओर खींच रही थी। वह इसे ‘यूनिवर्सल कॉन्शसनेस’ या ईश्वर का रूप मानती हैं। यह रोशनी प्यार, शांति और अपनापन से भरी थी।
आध्यात्मिक सोच की ओर बदलाव
इस हादसे से पहले एरिका ईश्वर या आध्यात्मिकता में विश्वास नहीं करती थीं, लेकिन इस अनुभव के बाद उनका दृष्टिकोण पूरी तरह बदल गया। अब उनका मानना है कि मौत अंत नहीं है, बल्कि एक भ्रम है। उनके अनुसार सभी इंसान एक ही ऊर्जा से जुड़े हैं और किसी को दुख देना दरअसल खुद को नुकसान पहुंचाने जैसा है। एरिका लोगों को संदेश देती हैं कि स्वर्ग और नर्क की चिंता करने के बजाय करुणा, प्रेम और एकता के साथ जीवन जीना ज्यादा महत्वपूर्ण है।



