सिद्धू-अमरिंदर की कलह सुलझाने के चक्कर में बुरे फंसे हरीश रावत, कर बैठे बड़ी गलती

पंजाब में अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की अंतर्कलह ख़त्म होने का नाम ही नहीं आ रही है। इसी अंतर्कलह के बीच में पंजाब कांग्रेस के प्रभारी हरीश रावत ने सिख समुदाय को लेकर आपत्तिजनक बयान देकर पार्टी की सियासी जंग को हवा दे दी थी। हालांकि अब उन्होंने अपने बयान पर काफी मांग ली है। दरअसल, हरीश रावत ने अपने एक बयान में पंजाब कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू और अन्य चार कार्यकारी अध्यक्षों को पांच प्यारे बोल दिया था, जिसे लेकर सिख जगत में काफी नाराजगी थी। रावत के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किये जाने की मांग चल रही है।

हरीश रावत ने ट्वीट कर दिया बड़ा बयान

हरीश रावत ने ट्वीट करते हुए माफी मांगी है और लिखा है कि कभी आप आदर व्यक्त करते हुये, कुछ ऐसे शब्दों का उपयोग कर देते हैं जो आपत्तिजनक होते हैं। मुझसे भी कल अपने माननीय अध्यक्ष व चार कार्यकारी अध्यक्षों के लिए पंज प्यारे शब्द का उपयोग करने की गलती हुई है। मैं देश के इतिहास का विद्यार्थी हूँ और पंज प्यारों के अग्रणी स्थान की किसी और से तुलना नहीं की जा सकती है। मुझसे ये गलती हुई है, मैं लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए क्षमा प्रार्थी हूँ।

हरीश रावत ने अपने ट्वीट में आगे लिखा कि मैं प्रायश्चित स्वरूप अपने राज्य के किसी गुरुद्वारे में कुछ देर झाड़ू लगाकर सफाई करूंगा। मैं सिख धर्म और उसकी महान परंपराओं के प्रति हमेशा समर्पित भाव और आदर भाव रखता रहा हूँ।

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हरीश रावत ने इस ट्वीट के माध्यम से बताया कि मैंने चंपावत जिले में स्थित श्री रीठा साहब के मीठे-रीठे, देश के राष्ट्रपति से लेकर न जाने कितने लोगों को प्रसाद स्वरूप पहुंचाने का काम किया है। जब मुख्यमंत्री बना तो श्री नानकमत्ता साहब और रीठा साहब, जहां दोनों स्थानों पर श्री गुरु नानक देव जी पधारे थे, सड़क से जोड़ने का काम किया। हिमालयी सुनामी के दौर में हेमकुंड साहिब यात्रा सुचारू रूप से चल सके, वहां मेरे कार्यकाल में हुए काम को आज भी देखा जा सकता है।

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