
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अगले साल यानी 2027 की शुरुआत में विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसका आहट अभी से सियासी गलियारों में सुनाई देने लगी है। बीजेपी ने अपनी चुनावी तैयारियों को अंतिम रूप देना शुरू कर दिया है। प्रदेश में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने यानी जीत की हैट्रिक लगाने के उद्देश्य से केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने खुद इस चुनाव की कमान संभाल ली है। शाह चुनावी रणनीति बनाने में जुट गए हैं।
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शाह जल्द करेंगे यूपी का दौरा
पार्टी के ही कुछ सूत्रों से खबर मिली है कि, अमित शाह जल्द ही उत्तर प्रदेश के कई जिलों का दौरा करने वाले हैं। इस दौरे में वे पार्टी की जमीनी तैयारियों का जायजा तो लेंगे ही साथ ही कार्यकर्ताओं को भी सीधे संबोधित करेंगे और उन्हें जीत का मंत्र देंगे। सूत्रों की मानें तो शाह का पूरा कार्यक्रम अभी तैयार किया जा रहा है, लेकिन संभावना जताई जा रही है कि वे अपने यूपी दौरे की शुरुआत ब्रज क्षेत्र से कर सकते हैं। आपको बता दें, कि ये क्षेत्र वैचारिक और सांस्कृतिक रूप से खासा अहम माना जाता है।
पिछले चुनाव का लेखा-जोखा
अगर साल 2022 के विधानसभा चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालें, तो बीजेपी ने कुल 376 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से पार्टी को 255 सीटों पर जीत मिली थी। गठबंधन सहयोगियों को मिलाकर यह आंकड़ा 273 सीटों तक पहुंच गया था। हालांकि, इसके उलट पार्टी को 121 सीटों पर हा,र का भी सामना करना पड़ा था। अब यही सीटें बीजेपी की रणनीति का प्रमुख केंद्र हैं।

दिलचस्प बात यह है कि, 2022 के चुनाव में करीब 49 सीटें ऐसी थीं, जहां जीत और हार का अंतर महज पांच हजार वोटों से भी कम का था। पार्टी का आकलन है कि, इन सीटों पर संगठन की मजबूती, बूथ मैनेजमेंट और उम्मीदवार के व्यक्तिगत प्रदर्शन में थोड़ा सुधार करके नतीजे पलटे जा सकते हैं। यही वजह है कि, पार्टी इन सीटों पर बेहद ध्यान दे रही है।
4 श्रेणियों में बांटी गईं सीटें
बीजेपी ने इस बार अपनी चुनावी रणनीति को और वैज्ञानिक तरीके से तैयार करने के लिए सभी सीटों को चार अलग-अलग कैटेगरी में बांटा है। पहली कैटेगरी ‘A’ में वे सीटें रखी गई हैं, जहां पार्टी पिछले तीन चुनावों से लगातार जीत दर्ज करती आ रही है। दूसरी कैटेगरी ‘B’ में वे सीटें शामिल हैं, जहां पार्टी को जीत तो मिली, लेकिन बेहद कम अंतर से। तीसरी कैटेगरी ‘C’ उन सीटों की है, जहां पार्टी को लगातार दो बार से मामूली अंतर से हार झेलनी पड़ी है। वहीं चौथी कैटेगरी ‘D’ में वे सीटें आती हैं, जिन्हें पारंपरिक रूप से समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गढ़ माना जाता रहा है।
इसके अलावा पार्टी का विशेष फोकस उन 61 सीटों पर भी है, जहां बीजेपी 2012, 2017 और 2022 तीनों ही चुनावों में एक बार भी जीत हासिल नहीं कर पाई है। इन सीटों के लिए पार्टी नए सिरे से बूथ स्तर का फीडबैक जुटाएगी, जातीय समीकरणों का बारीकी से विश्लेषण करेगी, लाभार्थी योजनाओं से जुड़े मतदाताओं से सीधा संपर्क साधेगी और संभावित उम्मीदवारों का व्यापक सर्वे भी कराएगी। चूंकि अमित शाह पिछले दो विधानसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश की जीत के मुख्य रणनीतिकार रहे हैं, इसलिए पार्टी के भीतर इस बार भी तीसरी जीत को लेकर काफी उत्साह और भरोसा नजर आ रहा है।
टिकट बंटवारे को लेकर मंथन तेज
चुनावी तैयारियों के बीच टिकट वितरण को लेकर भी पार्टी के भीतर बड़ा मंथन शुरू हो चुका है। सूत्रों के अनुसार, तीन या उससे अधिक बार चुनाव लड़ चुके नेताओं के पूरे राजनीतिक रिकॉर्ड को बारीकी से खंगाला जा रहा है। इसमें देखा जा रहा है कि, पिछली बार कितने वोटों से हार या जीत हुई थी, जीत-हार का अंतर कितना रहा, अपने ही बूथ पर उम्मीदवार का प्रदर्शन कैसा था और संगठन के भीतर उसकी पकड़ कितनी मजबूत है।

इस पूरी कवायद का सीधा मतलब यह है कि, अब सिर्फ किसी नेता का बड़ा कद या पुराना अनुभव टिकट पाने की गारंटी नहीं रह गया है। अगर किसी नेता की जीत की संभावना कमजोर आंकी जाती है, तो उसका टिकट कटना लगभग तय माना जा रहा है। यानी इस बार का टिकट वितरण पूरी तरह से परफॉर्मेंस बेस्ड रहने की उम्मीद है।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद बना सिरदर्द
हालांकि, पार्टी के सामने चुनौतियों की भी कमी नहीं है। हाल ही में सामने आया राम मंदिर चढ़ावे में चोरी का विवाद 2022 में हारी गई सीटें और 2024 के लोकसभा चुनाव में मिला झटका। ये सभी मुद्दे पार्टी के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। चूंकि राम मंदिर लंबे समय से बीजेपी की सबसे बड़ी वैचारिक पहचान और भावनात्मक मुद्दे के तौर पर स्थापित रहा है। ऐसे में चढ़ावा चोरी जैसा विवाद पार्टी के लिए सिर्फ प्रशासनिक ही नहीं, बल्कि राजनीतिक और भावनात्मक स्तर पर भी एक बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। यही कारण है कि अमित शाह की रणनीति में इस पूरे मामले को संभालना भी एक अहम हिस्सा माना जा रहा है।
अखिलेश यादव ने भी तेज की तैयारी
बीजेपी अकेले मैदान में नहीं है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव भी चुनावी तैयारियों में जोर शोर से जुट गये हैं। खबर है कि, वे जल्द ही एक रथ यात्रा निकालकर सीधे जनता के बीच पहुंचने की योजना बना रहे हैं। दरअसल उत्तर प्रदेश की सत्ता का समीकरण सिर्फ राज्य तक सीमित नहीं है। साल 2027 में यूपी में जीत दर्ज करना 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए भी बीजेपी की राह आसान बना सकता है। यही वजह है कि दोनों ही प्रमुख दल इस चुनाव जो जीतने का पूरा दमखम लगाएं हैं।
कुल मिलाकर देखा जाए तो अमित शाह के सामने इस बार तीन बड़ी चुनौतियां हैं। पिछली बार हारी गई 121 सीटों का हिसाब बराबर करना, 61 मुश्किल सीटों पर पहली बार जीत दर्ज कराने का मिशन पूरा करना और 2022 में कम अंतर से हारी-जीती सीटों के मार्जिन को मजबूत करना। इन सबके बीच अमित शाह की रणनीति एकदम स्पष्ट नजर आ रही है। इस बार टिकट सिर्फ और सिर्फ उन्हीं चेहरों को मिलेगा, जिनमें जीत दिलाने का माद्दा हो।
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