
दफ्तर की तीसरी मंजिल तक पहुंचते-पहुंचते हांफने लगना या बाजार में थोड़ा तेज चलते ही सीना भारी लगने लगना, यह सुनने में बहुत मामूली बात लगती है। आमतौर पर लोग इसे उम्र बढ़ने, नींद पूरी न होने या रोज की भागदौड़ की थकान मानकर टाल देते हैं। कुछ हद तक ये सही भी है, क्योंकि शरीर कभी-कभी सच में सुस्त महसूस करता है, लेकिन दिक्कत तब शुरू होती है, जब यही सांस फूलना बार-बार होने लगे या पहले जिस काम में जरा भी परेशानी नहीं होती थी, अब उसी काम को करने में सांस उखड़ने लगे। यहीं से इसे नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।
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आखिर क्यों फूलती है सांस
सांस फूलने की सबसे आम वजहें आमतौर पर उतनी डरावनी नहीं होतीं जितना लोग सोचते हैं। फिटनेस की कमी, बढ़ा हुआ वजन, खून की कमी यानी एनीमिया या फेफड़ों से जुड़ी कोई परेशानी ,ये सब आम कारण हैं, जिनकी वजह से रोजमर्रा की मामूली एक्टिविटी में भी सांस भारी लगने लगती है, जो लोग महीनों या सालों से किसी तरह की शारीरिक गतिविधि नहीं करते, उनके लिए भी अचानक सीढ़ियां चढ़ना या तेज चलना मुश्किल हो सकता है।

उनकी सांस फूलना कोई बड़ी बात नहीं मानी जाती, क्योंकि उनका शरीर उस मेहनत का आदी नहीं होता। लेकिन कुछ मामलों में यही लक्षण किसी बड़ी बीमारी की तरफ इशारा भी कर सकता है। इनमें दिल की सेहत सबसे अहम पहलू है।
दिल और सांस का कनेक्शन
नेशनल हार्ट, लंग एंड ब्लड इंस्टीट्यूट के मुताबिक, सांस का फूलना हृदय से जुड़ी दिक्कतों के शुरुआती संकेतों में गिना जाता है। इसकी वजह समझना ज्यादा मुश्किल नहीं है। दिल का काम है शरीर के हर हिस्से तक खून और उसके जरिए ऑक्सीजन पहुंचाना। जब दिल यह काम ठीक तरह से नहीं कर पाता, चाहे वजह कोई भी हो, तो शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। नतीजा यह होता है कि हल्की मेहनत में भी सांस तेजी से फूलने लगती है। जैसे शरीर ऑक्सीजन की कमी पूरी करने के लिए ज्यादा हवा खींचने की कोशिश कर रहा हो।
इसका मतलब यह बिलकुल नहीं है कि, जिसे भी सीढ़ियां चढ़ते हुए सांस फूले, उसे तुरंत दिल की बीमारी मान लिया जाए। ऐसा सोचना भी गलत होगा और बेवजह की घबराहट पैदा करेगा। असली बात यह है कि, अगर यह समस्या बार-बार हो या पहले से ज्यादा तेज हो तो इसे संयोग या कमजोरी मानकर नहीं टालना चाहिए, बल्कि डॉक्टर से जांच करवा लेनी चाहिए। समय पर पता चलने पर इलाज भी आसान होता है और बड़ा खतरा टाला जा सकता है।
ये संकेत मिले तो सतर्क हो जाएं
सांस फूलना अकेले आए तो शायद उतनी चिंता की बात नहीं, लेकिन अगर इसके साथ कुछ और लक्षण भी दिखें, तो यह ध्यान देने का सीधा इशारा है। जैसे कि
- सीने में दर्द या किसी तरह का दबाव महसूस होना
- दिल की धड़कन का अचानक तेज हो जाना या धड़कन का पैटर्न सामान्य से अलग लगना
- असामान्य रूप से ज्यादा थकान महसूस होना, वो भी बिना किसी खास मेहनत के
- चक्कर आना या ऐसा लगना जैसे बेहोशी आने वाली है
- पैरों, टखनों या पंजों में सूजन दिखना
इनमें से कोई भी लक्षण अगर सांस फूलने के साथ-साथ दिखे, तो इसे अनदेखा नहीं करना चाहिए। अगर हालत यह हो जाए कि आराम से बैठे या लेटे रहने पर भी सांस फूलना बंद नहीं हो रही है या यह समस्या अचानक बढ़ जा रही है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। कई बार लोग सोचते हैं, थोड़ा आराम कर लेंगे तो ठीक हो जाएगा, लेकिन दिल से जुड़े मामलों में यह टालमटोल भारी पड़ सकती है।
जांच क्यों जरूरी?
बहुत से लोग डॉक्टर के पास तभी जाते हैं जब तकलीफ हद से ज्यादा बढ़ जाती, जबकि सच यह है कि शुरुआती स्टेज में पता चलने वाली दिक्कतें अक्सर आसानी से संभल जाती हैं, चाहे वो जीवनशैली में बदलाव से हो या दवाओं की मदद से। एक साधारण सी जांच, जैसे ईसीजी या ब्लड टेस्ट, यह साफ कर सकती है कि, सांस फूलने की वजह दिल है, फेफड़े हैं, खून की कमी है या सिर्फ फिटनेस की कमी। बिना जांच के अंदाजा लगाना, चाहे वो घबराहट में हो या लापरवाही में, दोनों ही तरीके नुकसानदेह साबित हो सकते हैं।
दिल को मजबूत रखने के लिए रोज की छोटी-छोटी आदतें
अच्छी खबर यह है कि दिल की सेहत बनाए रखना कोई बहुत मुश्किल काम नहीं है, बशर्ते इसे रोज की आदत बना लिया जाए।
सबसे पहले, शरीर को हिलाना-डुलाना जरूरी है। रोज कम से कम आधा घंटा टहलना, हल्की एक्सरसाइज करना या कोई भी शारीरिक गतिविधि दिल को मजबूत बनाने में मदद करती है। इसके साथ खाने-पीने का ध्यान रखना भी जरूरी है। जैसे तला-भुना, ज्यादा नमक और ज्यादा चीनी वाला खाना। संतुलित डाइट दिल की सेहत को अच्छी रखती है।
धूम्रपान और तंबाकू का सेवन दिल की सेहत की सबसे बड़ी दुश्मन है, इसलिए इनसे दूरी बनाना जरूरी है। साथ ही वजन को कंट्रोल में रखना भी दिल पर पड़ने वाले दबाव को कम करता है।

एक और बात जो अक्सर नजरअंदाज हो जाती है वह है नियमित जांच। हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल, ये तीनों ही ऐसी स्थितियां हैं जो अक्सर बिना किसी लक्षण के शरीर में पनपती रहती हैं और दिल पर असर डालती हैं, इसलिए साल में एक बार इनकी जांच करवाना और डॉक्टर की सलाह के मुताबिक इलाज लेना बेहद जरूरी है।
नींद और तनाव को भी हल्के में नहीं लेना चाहिए। पूरी नींद न लेना और लगातार तनाव में रहना, दोनों ही दिल की सेहत पर धीरे-धीरे असर डालते हैं, भले ही यह असर तुरंत दिखाई न दे।
सीढ़ियां चढ़ते हुए एक-आध बार सांस भारी लगना कोई असामान्य बात नहीं है, खासकर अगर आप लंबे समय से एक्टिव नहीं रहे हों। लेकिन जब यह बात-बात पर होने लगे या पहले की तुलना में साफ तौर पर बढ़ जाए, तो इसे बस थकान है कहकर टालना सही नहीं है। शरीर अक्सर बड़ी बीमारियों से पहले छोटे-छोटे संकेत देता है और सांस का फूलना उन्हीं में से एक हो सकता है। थोड़ी सी सतर्कता और समय पर डॉक्टर से मिल लेना बड़े खतरे से आपको बचा सकता है।
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