
इस्लामाबाद। मानसून के आते ही पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में मरियम नवाज सरकार तनाव में आ गई है। बारिश का मौसम शुरू होते ही सरकार ने अपने सिंचाई विभाग को सतर्क कर दिया है। साथ ही ये निर्देश भी दिया है कि, वह बाढ़ से निपटने की तैयारियां शुरू कर दे और 24 घंटे हाईअलर्ट पर रहे। दरअसल, इस बार सिर्फ मानसूनी बरसात की वजह से डर नहीं है, बल्कि भारत द्वारा सिंधु जल संधि को निलंबित रखने से भी मरियम सरकार तनाव में है। पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद रद्द हुए सिन्धु जल संधि ने पाकिस्तानी अधिकारियों की नींद उड़ा दी है। इस संधि के रद्द होने के बाद से अब उन्हें यह अंदाजा लगाना मुश्किल हो गया है कि, नदियों का पानी किस रफ्तार और किस मात्रा में उनकी तरफ आएगा।
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नहीं मिल रही सटीक जानकारी
लाहौर के कमिश्नर नौमान यूसुफ की अध्यक्षता में हाल ही में एक अहम बैठक हुई, जिसमें बाढ़ की तैयारियों को लेकर गहन मंथन किया गया। इस बैठक की जानकारी रखने वाले एक सूत्र के हवाले से पाकिस्तानी अखबार डॉन में लिखा गया है कि, हालात बेहद पेचीदा हो चुके हैं। दरअसल, अब सिंचाई विभाग के पास नदियों के बहाव को लेकर वह पुख्ता और सटीक जानकारी नहीं है, जो पहले भारत से नियमित रूप से मिला करती थी।

विभाग को अब सोशल मीडिया और अन्य अनौपचारिक माध्यमों से मिलने वाली सूचनाओं के सहारे पानी की रफ्तार और मात्रा का अंदाजा लगाना पड़ रहा है। हालांकि, ये तरीका न तो भरोसेमंद है और न ही सटीक आकलन के लिए पर्याप्त। यही वजह है कि, सरकार अब बड़े पैमाने पर और पहले से कहीं ज्यादा सतर्कता के साथ तैयारियों में जुट गई है, ताकि किसी भी अनहोनी से निपटा जा सके।
अतिरिक्त सावधानी बरतने के निर्देश
बैठक में मौजूद सिंचाई विभाग के एक अधिकारी ने खुलकर स्वीकार किया कि, पिछले साल अप्रैल में जब से भारत ने सिंधु जल संधि को निलंबित किया है, तब से डेटा साझा करने के मामले में एक तरह की चुप्पी छा गई है। भारत की तरफ से अब वह जानकारी नहीं मिल रही, जो कभी दोनों देशों के बीच सहयोग की एक अहम कड़ी हुआ करती थी। इस स्थिति को भांपते हुए कमिश्नर नौमान यूसुफ ने अपने अधीनस्थ अधिकारियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने के सख्त निर्देश दिए हैं।

इस पूरे घटनाक्रम पर एक अधिकारी ने कमिश्नर के निर्देशों का हवाला देते हुए बड़ी बेबाकी से अपनी बात रखी। उनके शब्दों में साफ झलकता है कि, प्रशासन किस कदर बेचैन है। अधिकारी ने कहा कि, अगर भारत की ओर से नदियों के बहाव और बाढ़ की स्थिति से जुड़ी जानकारी नहीं मिल रही, तो उन्हें बेहद सतर्क रहना होगा। उन्होंने आगे समझाया कि, अगर हालात सामान्य दिखते भी हैं, तो भी मध्यम बाढ़ के लिए तैयार रहना जरूरी है। अगर स्थिति मध्यम स्तर की नजर आए, तो तुरंत हाई-फ्लड कैटेगरी के तहत कदम उठाए जाने चाहिए।
आपात स्थिति से निपटने के लिए रहें तैयार
उसी अधिकारी ने यह भी कहा कि, नदी के बहाव को लेकर भारत की तरफ से जानकारी साझा करने में जो हिचकिचाहट देखी जा रही है, वह उनकी तैयारियों में सबसे बड़ी अड़चन है। यही वजह है कि लाहौर कमिश्नर ने अपनी टीम को बिना देरी किए तैयारी में जुट जाने का निर्देश दिया है, ताकि मानसून के दौरान किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटा जा सके।
फ़िलहाल, नदियों का बहाव अभी सामान्य बना हुआ है, लेकिन ये कब विकराल रूप ले लेती हैं कोई अंदाजा नहीं होता। लाहौर कमिश्नर ने अपने जूनियर अधिकारियों से कहा है कि, वे किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए बाढ़ संबंधी सभी इंतजामों को जल्द से जल्द अंतिम रूप दें, ताकि आखिरी वक्त में किसी तरह की जल्दबाजी न करनी पड़े।
पाकिस्तानी अख़बार डॉन में एक सिंचाई विभाग के अधिकारी से हुई बातचीत का हवाला देते हुए लिखा है कि, भारत की तरफ से जानकारी साझा करने में दिखाई जा रही अनिच्छा उनकी तैयारियों के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बन रही है।
पिछले साल बाढ़ ने मचाई थी तबाही
लाहौर में तैनात अधिकारियों का कहना है कि, फिलहाल घबराने जैसी कोई बात नहीं है, स्थिति नियंत्रण में है। रावी, सिंध, काबुल, झेलम, चिनाब और सतलुज समेत सभी प्रमुख नदियों में पानी का बहाव इस वक्त सामान्य स्तर पर बना हुआ है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन पूरी तरह चौकन्ना है, क्योंकि पिछले साल आई बाढ़ ने पंजाब प्रांत में जो तबाही मचाई थी, उसे भूलना आसान नहीं है। यही कारण है कि, इस बार अधिकारी कोई भी जोखिम उठाने के मूड में नहीं हैं। वे अतिरिक्त एहतियात बरत रहे हैं।
पिछले साल अगस्त के महीने में रावी नदी का पानी लाहौर के कई रिहायशी इलाकों में घुस गया था। इस बाढ़ ने वहां की सड़कों को पूरी तरह डुबो दिया था, जबकि सैकड़ों घर और बुनियादी ढांचे भी क्षतिग्रस्त हो गये थे। इस आपदा में नदी किनारे बसे कम से कम 31 गांव प्रभावित हुए थे। अकेले लाहौर शहर में करीब 82,952 लोगों को इस बाढ़ की मार झेलनी पड़ी थी। इतने बड़े पैमाने पर हुए नुकसान की यादें अभी भी ताजा हैं। यही वजह है कि, इस बार पंजाब सरकार के हाथ-पांव पहले से ही फूले हुए नजर आ रहे हैं।
क्या है पूरा विवाद
अब जरा समझते हैं कि आखिर यह पूरा विवाद क्या है, तो आपको बता दें कि, सिंधु जल संधि (IWT) भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी प्रणाली के पानी के बंटवारे को लेकर हुआ एक ऐतिहासिक समझौता है, जो 1960 में दोनों देशों के बीच हस्ताक्षरित हुआ था।

दशकों तक यह संधि दोनों पड़ोसी देशों के बीच सहयोग की एक मिसाल मानी जाती रही है, भले ही दोनों देशों के रिश्तों में कई बार खटास आई हो, लेकिन कभी इस समझौते को विवाद में नहीं लाया गया, लेकिन बीते साल अप्रैल में पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद भारत ने इस संधि को निलंबित करने का बड़ा फैसला लिया। इस फैसले के बाद से भारत की तरफ से पाकिस्तान को नदियों के पानी के बहाव से जुड़ा डेटा मिलना पूरी तरह बंद हो गया है, जिसने पाकिस्तानी पक्ष में गहरी चिंता पैदा कर दी है।
अब देखना यह है कि आने वाले मानसून में यह अनिश्चितता पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के लिए कितनी भारी साबित होती है। फिलहाल तो प्रशासन हर मोर्चे पर सतर्क नजर आ रहा है, लेकिन असली परीक्षा तब होगी जब बारिश अपने पूरे शबाब पर होगी और नदियां उफान पर आएंगी।
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