
चमोली। उत्तर प्रदेश के अयोध्या स्थित राम मंदिर में हो रहे चढ़ावा चोरी के मामले के बाद अब बद्रीनाथ मंदिर में भी चंदा चोरी की घटना सामने आई है। इससे देश भर में हलचल मच गई है। मामले में विवाद बढ़ता देख उत्तराखंड सरकार ने जांच और तेज कर दी है। इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तराखंड पुलिस की ओर से जानकारी दी गई है कि, बद्रीनाथ मंदिर में दान की कथित चोरी की जांच कर रही विशेष जांच टीम, यानी एसआईटी, को बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की ओर से 18 पन्नों की एक विस्तृत आंतरिक जांच रिपोर्ट सौंपी गई है।
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यह रिपोर्ट जांच के लिहाज से एक महत्वपूर्ण दस्तावेज मानी जा रही है, क्योंकि इसमें मंदिर प्रशासन की तरफ से की गई आंतरिक जांच के निष्कर्ष शामिल हैं। इसके साथ ही सीसीटीवी फुटेज के गहन विश्लेषण के आधार पर SIT ने इस मामले में कई और नए संदिग्धों की भी पहचान की है, जिससे जांच का दायरा अब पहले से कहीं अधिक विस्तृत होता जा रहा है।
सीसीटीवी फुटेज से मिले अहम सुराग
पुलिस के मुताबिक, 25 जून और 29 जून की सीसीटीवी फुटेज में कुछ और संदिग्ध व्यक्ति दिखाई दे रहे हैं, जिनकी पहचान के आधार पर अब एसआईटी आने वाले दिनों में और लोगों से पूछताछ करने की तैयारी में है। पुलिस की ओर से यह भी बताया गया है कि एसआईटी ने 29 जून और 2 जुलाई की फुटेज को पूरी तरह से बरामद कर लिया है। आज इसी फुटेज की गहन जांच की जाएगी। इससे पहले टीम ने 22 जून और 25 जून की फुटेज भी बरामद की थी, जिसका विश्लेषण जांच प्रक्रिया के तहत पहले ही पूरा किया जा चुका है।

पुलिस विभाग की ओर से स्पष्ट तौर पर यह बयान दिया गया है कि, बद्रीनाथ मंदिर से दान की कथित चोरी के मामले की जांच अभी भी जारी है और एसआईटी इस मामले में सीसीटीवी फुटेज की बारीकी से जांच करते हुए इसमें शामिल लोगों की सही पहचान करने के लिए हर संभव सबूत जुटाने में जुटी हुई है। इस तरह की गहन और सिलसिलेवार जांच प्रक्रिया से यह स्पष्ट होता है कि प्रशासन इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रहा है और किसी भी दोषी को बख्शने के मूड में नहीं है।
कहां पहुंचा जांच का दायरा
इस पूरे मामले में जांच की प्रगति की बात करें तो बुधवार को एसआईटी की टीम ने मंदिर परिसर से कई महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत जब्त किए थे। इस कार्रवाई के दौरान मामले की जांच में जुटे एसआईटी अधिकारी महादेव उनियाल ने इस बात की पुष्टि की कि पुलिस ने मंदिर में चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर सामने आई अनियमितताओं की पहचान करने के मकसद से निगरानी से जुड़े रिकॉर्ड अपने कब्जे में ले लिए हैं।
यह कदम जांच की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रगति माना जा रहा है, क्योंकि इन निगरानी रिकॉर्ड्स के विश्लेषण से यह पता चल सकेगा कि चढ़ावे के प्रबंधन में आखिर कहां-कहां चूक हुई और इसके पीछे कौन-कौन लोग जिम्मेदार हो सकते हैं। इससे पहले 14 जुलाई को भी इस मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम देखने को मिला था, जब बद्रीनाथ मंदिर में दान की कथित चोरी की जांच के लिए विशेष रूप से गठित की गई एक समिति ने बद्रीनाथ धाम का प्रत्यक्ष दौरा किया था।
बारीकी से की जा रही समीक्षा
इस दौरे के दौरान समिति के सदस्यों ने मंदिर में आने वाले दान के प्रबंधन और परिवहन से जुड़ी पूरी प्रक्रिया की बारीकी से समीक्षा की। इसके साथ ही समिति ने मतगणना कक्ष में मौजूद व्यवस्थाओं का भी गहन निरीक्षण किया, ताकि यह पता लगाया जा सके कि, दान के रूप में प्राप्त होने वाली राशि की गिनती और उसके प्रबंधन में कहीं कोई खामी तो नहीं है।
इसी कड़ी में एक और महत्वपूर्ण घटनाक्रम में एसआईटी ने मंदिर के मुख्य कार्यकारी अधिकारी यानी सीईओ सोहन सिंह रंगद के साथ-साथ उनके निजी सहायक अतुल डिमरी से भी पूछताछ की। इस पूछताछ का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना था कि मंदिर परिसर में निगरानी व्यवस्था में आखिर कहां-कहां कमियां रह गई थीं, जिनके चलते दान की चोरी जैसी घटना को अंजाम दिया जा सका। मंदिर के इतने वरिष्ठ अधिकारियों से पूछताछ किया जाना यह दर्शाता है कि, जांच एजेंसी इस मामले में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं बरतना चाहती और हर संभावित पहलू की गहनता से जांच कर रही है।
राम मंदिर मामले के बाद खुलासा
गौरतलब है कि, यह पूरा मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में राम मंदिर से जुड़े चंदा चोरी के एक अन्य मामले ने भी राजनीतिक हलकों में काफी हलचल मचा रखी है।

दोनों ही मामलों की एक साथ चर्चा होने से यह विषय और भी अधिक संवेदनशील बन गया है, क्योंकि दोनों ही मामले प्रमुख धार्मिक स्थलों से जुड़े हुए हैं और इनमें आस्था से जुड़े धन के दुरुपयोग जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं। ऐसे में बद्रीनाथ मंदिर मामले में हो रही जांच पर आम जनता के साथ-साथ धार्मिक संगठनों और राजनीतिक दलों की भी विशेष नजर बनी हुई है।
मामले की तह में जा रही SIT
फिलहाल, एसआईटी की टीम पूरी तत्परता के साथ इस मामले की तह तक पहुंचने में जुटी हुई है। सीसीटीवी फुटेज के लगातार विश्लेषण, डिजिटल सबूतों की जब्ती और मंदिर के वरिष्ठ अधिकारियों से हो रही पूछताछ, ये सभी कदम इस बात का संकेत देते हैं कि, जांच एजेंसी इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है। आने वाले दिनों में जैसे-जैसे और अधिक फुटेज की जांच पूरी होगी और नए संदिग्धों से पूछताछ की जाएगी, वैसे-वैसे इस मामले में और भी नई जानकारियां सामने आने की उम्मीद है।
18 पन्नों की आंतरिक जांच रिपोर्ट
बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति की तर से सौंपी गई 18 पन्नों की आंतरिक जांच रिपोर्ट भी इस पूरी जांच प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकती है, क्योंकि इसमें मंदिर प्रशासन के स्तर पर पहले से की गई समीक्षा के निष्कर्ष दर्ज हैं। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस रिपोर्ट और सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण के आधार पर एसआईटी आगे किस तरह की कार्रवाई करती है और इस पूरे प्रकरण में आखिरकार किन-किन लोगों की भूमिका सामने आती है।
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