
नई दिल्ली। संसद के आगामी मानसून सत्र की शुरुआत से पहले संसद सचिवालय ने सांसदों के लिए एक बेहद जरूरी एडवाइजरी जारी की है। इस एडवाइजरी में लिखा गया है कि, सांसद, संसद परिसर के अंदर स्मार्ट वॉच, स्मार्ट चश्मा से साथ ही किसी भी तरह के अन्य स्मार्ट डिवाइसेस का इस्तेमाल करने से बचें। सचिवालय का कहना है कि, इससे परिसर के भीतर सुरक्षा और सांसदों की निजता बनी रहेगी, साथ ही संसदीय विशेषाधिकार का उल्लंघन होने से भी बचा जा सकेगा।
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20 जुलाई से शुरू होगा मानसून सत्र
आपको बता दें कि, संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा। एक महीने तक चलने वाले इस सत्र के लिए सुरक्षा एजेंसियां और संसद प्रशासन पहले से ही सतर्कता बरतने में जुट गये हैं। इसी कड़ी में ये एडवाइजरी भी जारी की गई है।

लोकसभा सचिवालय ने बुधवार को जारी एक एडवाइजरी में स्पष्ट किया कि, इस समय आधुनिक और अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसेस बाजार में बड़े पैमाने पर उपलब्ध हैं। ये आम लोगों तक आसानी से पहुंच चुके हैं, लेकिन इनमें से कई डिवाइसेस में ऐसे फीचर मौजूद होते हैं, जो संसद जैसे संवेदनशील और सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण परिसर के भीतर इस्तेमाल किए जाने पर खतरनाक साबित हो सकते हैं।
सचिवालय द्वारा जारी एडवाइजरी में यह बात स्पष्ट रूप से कही गई है कि, सांसदों को इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि, देश में स्मार्ट चश्मे, पेन कैमरे, स्मार्ट वॉच और इसी श्रेणी के तमाम अन्य एडवांस्ड डिवाइस अब आसानी से और बड़े पैमाने पर उपलब्ध हैं। इन डिवाइसेस की खास बात यह है कि, ये देखने में सामान्य वस्तुओं जैसे ही लगते हैं, लेकिन इनमें छिपे कैमरे, रिकॉर्डिंग सुविधाएं और डेटा ट्रांसमिशन जैसी क्षमताएं मौजूद हो सकती हैं।
कार्यवाही लीक होने का जोखिम
सचिवालय इस बात से चिंतित है कि अगर इन उपकरणों का इस्तेमाल संसद परिसर के भीतर किया जाता है, तो इससे न सिर्फ सांसदों की निजता को खतरा पैदा हो सकता है, बल्कि संसद में होने वाली गोपनीय चर्चाओं और कार्यवाही से जुड़ी संवेदनशील जानकारियां सदन से बाहर जा सकती हैं। इसके अलावा ऐसे उपकरणों के जरिए संसदीय विशेषाधिकारों का हनन होने की भी आशंका जताई गई है, जो कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में सदस्यों को प्राप्त संवैधानिक अधिकारों के लिहाज से एक गंभीर मसला माना जाता है।
केवल स्मार्ट डिवाइसेस को लेकर ही बल्कि और भी कई चीजों का जिक्र एडवाइजरी में किया गया है। एडवाइजरी में कहा गया है कि, सांसद संसद भवन परिसर के भीतर किसी भी प्रकार का प्रदर्शन करने, धरना देने, नारेबाजी करने, तख्तियां लहराने, हथियार लेकर आने और किसी भी तरह का धार्मिक अनुष्ठान आयोजित करने से परहेज करें। यह सलाह इस लिहाज से महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले कई सत्रों के दौरान संसद परिसर में इस तरह की गतिविधियां देखी गई हैं, जिनकी वजह से संसदीय कामकाज प्रभावित हुआ है।
विरोध प्रदर्शन न करने की अपील
लोकसभा सचिवालय ने विभिन्न संसदीय बुलेटिनों में यह भी उल्लेख किया है कि, उसके संज्ञान में यह बात आई है कि, हाल के दिनों में पोस्टर, तख्तियों और बैनरों पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की मदद से तैयार किए गए चित्र, तस्वीरें और कई बार आपत्तिजनक प्रकृति के नारे भी प्रदर्शित किए जा रहे हैं।

यह एक नया और चिंताजनक रुझान है, क्योंकि पहले के समय में सांसद पारंपरिक तरीके से हाथ से लिखी तख्तियों या छपे हुए बैनरों का इस्तेमाल करते थे, वहीं अब तकनीक के दुरुपयोग से बनाई गई सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है। सचिवालय ने इस पर गंभीरता दिखाते हुए सभी सदस्यों से आगामी मानसून सत्र के दौरान संसद परिसर के भीतर इस प्रकार की गतिविधियों से पूरी तरह बचने का अनुरोध किया है।
इसके साथ ही सचिवालय ने एक अन्य बुलेटिन में यह भी आग्रह किया है कि, सदस्य संसद भवन के प्रवेश द्वारों के ठीक सामने किसी भी प्रकार का विरोध-प्रदर्शन या धरना आयोजित न करें। इसके पीछे तर्क यह दिया गया है कि, इस तरह की गतिविधियों से सदनों की बैठक के दौरान अन्य सांसदों को अपने संसद कक्षों तक आने-जाने में गंभीर बाधा का सामना करना पड़ता है, जिससे संसदीय कामकाज की व्यवस्था में खलल पड़ता है।
परिसर में अनुशासन बनाए रखें
सचिवालय ने अपनी एडवाइजरी में यह भी स्पष्ट किया है कि, सांसदों को संसद भवन परिसर का उपयोग किसी भी प्रकार के प्रदर्शन, धरने, हड़ताल, अनशन या फिर किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के आयोजन के लिए नहीं करना चाहिए। यह परिसर विशुद्ध रूप से विधायी कार्यों और संसदीय गतिविधियों के लिए निर्धारित है, इसलिए इसका उपयोग अन्य उद्देश्यों के लिए किया जाना उचित नहीं माना जाता।
सचिवालय की इस पूरी एडवाइजरी के पीछे मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि, संसद भवन परिसर के भीतर के सभी क्षेत्र और मार्ग सांसदों के लिए बिना किसी प्रकार की रुकावट के हमेशा खुले और सुगम बने रहें। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए परिसर के भीतर कई प्रकार की गतिविधियों पर पहले से ही प्रतिबंध लगाया गया है। इन प्रतिबंधित वस्तुओं और गतिविधियों में किसी भी तरह के शस्त्र लाना, बैनर और तख्तियां प्रदर्शित करना, लाठियां, भाले, तलवारें और डंडे जैसी वस्तुएं परिसर में लाना शामिल है। इन सभी नियमों का उद्देश्य संसद परिसर के भीतर शांति और अनुशासन बनाए रखना है, ताकि विधायी कार्य बिना किसी व्यवधान के सुचारु रूप से संपन्न हो सके।
पहले भी जारी हो चुकी है एडवाइजरी
यह पहला मौका नहीं है जब संसद सचिवालय को इस तरह की एडवाइजरी जारी करनी पड़ी हो। इससे पहले भी कई बार ऐसा हुआ है जब विपक्षी दलों के सदस्यों द्वारा किए गए प्रदर्शन, नारेबाजी और विभिन्न मुद्दों पर तख्तियां प्रदर्शित करने की वजह से संसद की कार्यवाही लंबे समय तक बाधित रही है। कई सत्रों के दौरान सदनों की कार्यवाही को बार-बार स्थगित करना पड़ा और कई-कई दिनों तक कोई महत्वपूर्ण विधायी कामकाज नहीं हो सका, जिससे जनता के महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा और निर्णय लेने की प्रक्रिया प्रभावित हुई। इसे लेकर एडवाइजरी जारी की जा चुकी है।
इसका एक ताजा उदाहरण पिछले बजट सत्र के दौरान देखने को मिला था, जब सदन के भीतर कथित रूप से अनुशासनहीन व्यवहार करने के आरोप में कई सांसदों को निलंबित कर दिया गया था। निलंबन के बाद इन सांसदों ने संसद भवन के एक प्रवेश द्वार पर ही कई दिनों तक अपना विरोध-प्रदर्शन जारी रखा था, जिसकी वजह से उस क्षेत्र में आवाजाही प्रभावित हुई थी।
संसद सचिवालय द्वारा जारी की गई मौजूदा एडवाइजरी को इसी संदर्भ में एक एहतियाती कदम के तौर पर देखा जा रहा है, ताकि आगामी मानसून सत्र के दौरान इस तरह की स्थितियों की पुनरावृत्ति न हो और संसद का कामकाज सुचारु रूप से संपन्न हो सके।
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