
लखनऊ। दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले कई दिनों से आमरण अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक की सेहत लगातार खराब होती जा रही है। जम्मू कश्मीर के जाने-माने पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले 17 दिनों से अनशन पर हैं। उनका वज़न आठ किलो से भी ज्यादा कम हो गया है। उनकी सेहत दिन प्रतिदिन बिगडती जा रही है। उनकी इस हालत पर चिंता जताते हुए समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर एक भावुक पोस्ट लिख कर वांगचुक से अनशन खत्म करने की अपील की है।
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कीमती है वांगचुक का जीवन
अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट में बेहद विनम्र लहजे के साथ सोनम वांगचुक से आग्रह किया कि, वे अपना अनशन समाप्त कर दें। उन्होंने लिखा, वांगचुक का जीवन पूरी दुनिया के लिए बेहद कीमती है, क्योंकि उनमें मानवता और पर्यावरण के प्रति जितनी प्रतिबद्धता है, उतनी ही प्रतिबद्धता वे लोकतंत्र की रक्षा के लिए भी दिखाते रहे हैं।

सपा मुखिया ने आगे लिखा, जिस भाजपा सरकार को जगाने के लिए वांगचुक आमरण अनशन पर बैठे हैं, वह सरकार सिद्धांतविहीन और भ्रष्ट व्यवस्था का प्रतीक बन चुकी है, वह जागने वाली नहीं है। उन्होंने आगे लिखा, ऐसी असंवेदनशील और निष्ठुर व्यवस्था के सामने किसी के भी त्याग या बलिदान का कोई मोल नहीं रह जाता।
बीजेपी पर बोला हमला
अखिलेश यादव ने अपने बयान में भाजपा पर सीधा और तीखा हमला बोलते हुए कहा कि, पार्टी से किसी भी तरह के नैतिक बदलाव या सदाचार की उम्मीद करना पूरी तरह बेकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि, भाजपा नेताओं के लिए किसी भी इंसान की ज़िंदगी की कोई अहमियत नहीं है, बल्कि उनके लिए सिर्फ धन-संपत्ति ही सबसे ऊपर है। उन्होंने यह भी कहा कि, भाजपा नेता भ्रष्टाचार के ज़रिए कमाई गई दौलत के घमंड में डूबे हुए हैं। ऐसे लोगों से किसी सुधार या बदलाव की अपेक्षा रखना बेमानी है।
सपा प्रमुख ने बेहद तीखी टिप्पणी करते हुए लिखा, जिन लोगों में अहंकार भरा होता है, वे कभी नहीं सुधरते। उन्होंने कहा कि सत्याग्रह जैसे शब्द का असली अर्थ वही लोग समझ सकते हैं, जो नैतिकता और त्याग में विश्वास रखते हों, लेकिन जो लोग सत्ता की भूख में मंदिरों के चढ़ावे तक नहीं छोड़ रहे हैं, वे सत्याग्रह की गहराई क्या समझेंगे।
सपा मुखिया ने आरोप लगाया कि, ऐसे नेताओं को न तो युवाओं के भविष्य की चिंता होती है और न ही उनके माता-पिता व परिवार के सपनों की परवाह। उन्होंने आगे लिखा, ऐसे लोग सिर्फ अपने स्वार्थ के लिए काम करते हैं। आम जनता के हितों से उनका कोई सरोकार नहीं होता।
वांगचुक को बताया प्रेरणास्रोत
पोस्ट में सोनम वांगचुक की सराहना करते हुए अखिलेश यादव ने लिखा उन्हें लोकतंत्र, पर्यावरण और युवाओं के संघर्ष के लिए एक मार्गदर्शक प्रकाशस्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि, जो लोग लोकतंत्र का गला घोंटने का काम कर रहे हैं, जिनके भ्रष्ट गठजोड़ देश की व्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं, उन्हें हराने और स्थायी रूप से सत्ता से बाहर करने के लिए वांगचुक जैसे लोगों का मनोबल और नैतिक बल हर सच्चे भारतीय के लिए प्रेरणा का स्रोत बना रहना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि, वांगचुक आगे भी देशवासियों, युवाओं, लोकतंत्र और पर्यावरण से जुड़े संघर्षों में नकारात्मक शक्तियों के खिलाफ डटे रहेंगे और उनकी यही भावना समाज को नई दिशा देती रहेगी।
राजनीतिक मुद्दा बना वांगचुक का अनशन
सोनम वांगचुक का यह लंबा अनशन अब सिर्फ एक सामाजिक आंदोलन नहीं रह गया है, बल्कि देश की राजनीति में भी हलचल मचा दी है। उनके इस अनशन से एक तरफ जहां सरकार पर दबाव बढ़ रहा है, वहीं विपक्ष इस मुद्दे पर लगातार अपनी प्रतिक्रिया दे रहा है। अखिलेश यादव का यह बयान भी इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है, जिसमें उन्होंने एक तरफ वांगचुक की सेहत को लेकर चिंता जताई, तो दूसरी तरफ सत्तारूढ़ पार्टी पर तीखे आरोप भी लगाए हैं।
बिगड़ती सेहत ने बढ़ाई चिंता
17 दिनों से लगातार जारी अनशन ने सोनम वांगचुक की सेहत पर गंभीर असर डाला है। आठ किलो से ज्यादा वज़न घटने की खबर ने उनके समर्थकों और शुभचिंतकों को परेशान कर दिया है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी लंबे समय तक चलने वाले अनशन को लेकर सतर्कता बरतने की सलाह दे रहे हैं, क्योंकि अब उनकी सेहत पर बुरा प्रभाव पड़ने का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। यही वजह है कि, विभिन्न राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के नेता वांगचुक से लगातार अपील कर रहे हैं कि वे अपनी सेहत को ध्यान में रखते हुए अनशन समाप्त करें।
खैर, अखिलेश यादव का यह बयान एक साथ दो संदेश दे रहा है, एक तरफ सोनम वांगचुक के प्रति उनका सम्मान देखने को मिला रहा है और उनकी सेहत को लेकर चिंता है, तो वहीं दूसरी तरफ सत्तारूढ़ पार्टी पर तीखा राजनीतिक हमला भी है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वांगचुक अपना अनशन समाप्त करते हैं या सरकार की तरफ से उनकी मांगों पर कोई ठोस प्रतिक्रिया सामने आती है।
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