
जैसलमेर। तपती रेत, चिलचिलाती धूप और पानी की एक-एक बूंद के लिए मीलों तक चलने वाली मशक्कत के तौर पर पहचान बना चुके थार के रेगिस्तान की तस्वीर अब बदलती हुई नजर आ रही है। दरअसल, केंद्र और राजस्थान सरकार ने मिलकर यहां एक ऐसी अनोखी परियोजना का निर्माण कर दिया है जिसकी चर्चा आज पूरी दुनिया में हो रही है।
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हल हुई 50 लाख लोगों की समस्या
रेत से बनी यहां की धरती पर सदियों से पानी की किल्लत बनी हुई थी जिसे अब दूर कर दिया गया है। इसके लिए लगभग 28 किलोमीटर लंबी एक कृत्रिम झील बनाई गई है। इस परियोजना की सबसे खास बात यह है कि, झील का पानी रेत में समाकर बर्बाद न हो जाए, इसके लिए पूरी झील के तल में एक विशाल प्लास्टिक की चादर बिछाई गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस बड़ी परियोजना का औपचारिक उद्घाटन इसी महीने में किया जायेगा। इसके बाद जैसलमेर और बाड़मेर के लगभग 50 लाख लोगों की पानी की समस्या हमेशा के लिए दूर हो जाएगी।

आपको बता दें कि, रेगिस्तानी इलाकों में सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि यहां की सूखी और भुरभुरी रेतीली मिट्टी पानी को बहुत जल्दी सोख लेती है, जिससे पानी की समस्या यहां हमेशा बनी रहती थी। इस चुनौती से निपटने के लिए इंजीनियरों ने एक स्मार्ट तकनीक अपनाई। झील की खुदाई पूरी होने के बाद इसके तल को पूरी तरह जलरोधी (वॉटरप्रूफ) बनाने के लिए वहां 300 माइक्रोन मोटी हाई-डेंसिटी पॉलीथीन शीट बिछाई गई। यह मोटी प्लास्टिक परत पानी और नीचे की रेत के बीच एक मजबूत दीवार की तरह काम करेगी और पानी रिसकर ज़मीन में नहीं जा सकेगा।
… तो बेअसर हो जाती परियोजना
इसके अलावा, इस संवेदनशील प्लास्टिक शीट को तेज़ धूप, पानी के दबाव और तेज़ हवाओं से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए इसके ऊपर मिट्टी की एक सुरक्षात्मक परत भी चढ़ाई गई है। अगर यह वॉटरप्रूफिंग तकनीक इस्तेमाल न की जाती, तो करोड़ों लीटर पानी लोगों के घरों तक पहुंचने से पहले ही रेत में समा जाता और पूरी परियोजना बेअसर हो जाती।

पश्चिमी राजस्थान के इन सरहदी इलाकों जैसलमेर और बाड़मेर के लिए इंदिरा गांधी नहर जीवनरेखा की तरह काम करती है, लेकिन हर साल नहर की सफाई और मरम्मत के लिए नहरबंदी की जाती है, जो कई हफ्तों तक चलती है। इस दौरान नहर के ज़रिए होने वाली पानी की सप्लाई पूरी तरह ठप हो जाती है, जिससे यहां पानी की भारी किल्लत हो जाती थी। लोगों को पानी के लिए तरसना पड़ता था। इस झील का निर्माण इस समस्या का स्थायी हल निकालने के मकसद से किया गया है, ताकि नहरबंदी के दौरान भी लोगों को पानी की समस्या से न जूझना पड़े।
242 करोड़ रुपये की लागत से बनी झील
लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के अधिशासी अभियंता रामपाल मूंदियारा के मुताबिक, पहले इस इलाके में नहरबंदी के दौरान पानी का भंडारण करने के लिए कोई बड़ा और पर्याप्त जलाशय मौजूद नहीं था, जिसकी वजह से हर साल पानी का संकट गहरा जाता था। इस समस्या का दीर्घकालिक समाधान निकालने के लिए राजस्थान जल प्रदाय विभाग ने करीब 242 करोड़ रुपये की लागत से इस रणनीतिक जल-भंडार का निर्माण करवाया।
झील की खासियतें
झील की लंबाई: करीब 28 किलोमीटर
गहराई: लगभग 33 फीट
जल भंडारण क्षमता: करीब 1.41 अरब लीटर (141 करोड़ लीटर)
कुल लागत: लगभग 242 करोड़ रुपये
लाभार्थी: जैसलमेर और बाड़मेर के लगभग 50 लाख निवासी
तमाम समस्याओं का स्थायी समाधान बनेगी झील
इतनी बड़ी क्षमता वाला यह जलाशय आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र की पानी से जुड़ी तमाम समस्याओं का स्थायी समाधान बन सकता है।इस परियोजना को केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी ‘जल जीवन मिशन’ से जोड़कर देखा जा रहा है, जिसका उद्देश्य हर घर तक नल के ज़रिए पानी पहुंचाना है।

यह प्रोजेक्ट जनवरी 2023 में शुरू हुआ था और अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है। झील में पानी भरने का काम मई 2026 में ही शुरू कर दिया गया था। अब जुलाई में इसके औपचारिक उद्घाटन के साथ यह परियोजना पूरी तरह चालू हो जाएगी।
इंजीनियरिंग की बड़ी उपलब्धि
इस झील के शुरू होने के बाद थार के रेगिस्तान में रहने वाले लाखों लोगों को जीवन दान मिलेगा क्योंकि पानी बिना कुछ भी संभव नहीं होता। ऐसे में अब यहां की पानी समस्या हमेशा के लिए दूर हो जाएगी और लोग सुकून से अपना रोजमर्रा का काम कर सकेंगे। इस विशाल भंडारण झील में पर्याप्त पानी हमेशा उपलब्ध रहेगा। थार के रेगिस्तान में बनी यह 28 किलोमीटर लंबी कृत्रिम झील सिर्फ एक इंजीनियरिंग उपलब्धि नहीं, बल्कि लाखों लोगों की ज़िंदगी बदलने वाला कदम भी साबित होगी। प्लास्टिक शीट की मदद से पानी को रेत में समाने से बचाने की यह तकनीक आने वाले समय में देश के अन्य रेगिस्तानी और जल-संकट वाले इलाकों के लिए भी एक मिसाल बन सकती है। जैसलमेर और बाड़मेर के 50 लाख लोगों के लिए यह परियोजना निश्चित रूप से एक नई उम्मीद की किरण लेकर आई है।
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