उत्तराखंड से सोमनाथ के लिए रवाना हुए 700 श्रद्धालु, धामी ने दिखाई हरी झंडी

  • हर्रावाला रेलवे स्टेशन से रवाना हुए यात्री

  • सीएम धामी ने दिखाई हरी झंडी

  • उत्तराखंड की सकारात्मक पहचान बनाएं: धामी

देहरादून। उत्तराखड़ के सीएम पुष्कर सिंह धामी ने सोमवार को रेलवे स्टेशन हर्रावाला से ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के उपलक्ष्य में वेरावल (सोमनाथ) के लिए विशेष रेल यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। सीएम ने श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दी और कहा ये  केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि राष्ट्र के स्वाभिमान, सांस्कृतिक चेतना और सनातन परंपराओं से जुड़ने का सशक्त माध्यम बताया।

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संस्कृति विभाग की सराहना की

मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि, छह दिवसीय इस विशेष रेल यात्रा में प्रदेश के अलग-अलग वर्गों से लगभग 700 श्रद्धालु हिस्सा ले रहे हैं।  इस यात्रा में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी माताएं-बहनें, विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थी, संत समाज के प्रतिनिधि और समाज के विभिन्न वर्गों के लोग शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने इस पूरी पहल के लिए राज्य के संस्कृति विभाग की सराहना की और भगवान सोमनाथ तथा बाबा केदार से सभी यात्रियों की मंगलमय, सुरक्षित और सुखद यात्रा की कामना की।

श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए सीएम धामी ने कहा कि, यह यात्रा भारत की हज़ारों वर्ष पुरानी सनातन परंपरा, गौरवशाली विरासत और राष्ट्रीय स्वाभिमान से जुड़ने का एक विशेष अवसर है। उन्होंने 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल सोमनाथ मंदिर को भारत की अटूट आस्था, अदम्य विश्वास और पुनरुत्थान का प्रतीक बताया।

भारत हर चुनौती का सामना करने में सक्षम

उन्होंने कहा कि, कई आक्रमणों और विध्वंस के बावजूद सोमनाथ मंदिर ने पूरी दुनिया को यह संदेश दिया है कि, भारत हर चुनौती के बाद पहले से भी अधिक शक्ति और संकल्प के साथ आगे बढ़ता है। धामी ने कहा कि, ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ राष्ट्रबोध और सांस्कृतिक गौरव का अनुभव कराने वाला एक विशेष और महत्वपूर्ण अवसर है।

सीएम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल की सराहना करते हुए कहा कि, पीएम मोदी के नेतृत्व में देश में एक अभूतपूर्व सांस्कृतिक पुनर्जागरण का दौर चल रहा है। उन्होंने अयोध्या से सोमनाथ, केदारनाथ से काशी विश्वनाथ और महाकाल से बद्रीनाथ धाम तक मंदिरों के जीर्णोद्धार करते हुए कहा  कि यह सब भारत की सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा दे रहा है।

उत्तराखंड को आध्यात्मिक राजधानी विकसित करने पर जोर

उन्होंने आगे कहा कि मंदिर सिर्फ पूजा-अर्चना करने के स्थान भर नहीं हैं, बल्कि यह भारतीय सभ्यता, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा की एक तरह से जीवनरेखा हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि, लंबे समय तक जिन धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहरों की उपेक्षा होती रही, आज उन्हें फिर से उचित सम्मान और गौरव प्राप्त हो रहा है, जो बदलते भारत की एक नई तस्वीर पेश करता है।

CM DHAMI

सीएम ने कहा, पीएम मोदी से प्रेरणा लेकर उत्तराखंड सरकार भी देवभूमि उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने की दिशा में लगातार काम कर रही है। उन्होंने बताया कि, केदारखंड और मानसखंड के मंदिर क्षेत्रों के सौंदर्यीकरण के साथ-साथ हरिपुर कालसी स्थित यमुनातीर्थ के पुनरुद्धार पर भी काम किया जा रहा है।

कई परियोजनाओं पर चल रहा काम

इसके अलावा हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर और शारदा कॉरिडोर जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं को भी आगे बढ़ाया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि, भारतीय संस्कृति, दर्शन और इतिहास के गहन अध्ययन और शोध को बढ़ावा देने के उद्देश्य से दून विश्वविद्यालय में ‘सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज’ की स्थापना भी की गई है, जो इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

धामी ने कहा कि, राज्य सरकार देवभूमि उत्तराखंड के सांस्कृतिक मूल्यों और उसके मूल स्वरूप की रक्षा के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए राज्य में धर्मांतरण विरोधी कानून और दंगारोधी कानून लागू किए गए हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि, अवैध अतिक्रमण के खिलाफ चलाए गए विशेष अभियान के तहत अब तक 13 हज़ार एकड़ से भी अधिक सरकारी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि, यह अभियान केवल भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने भर का प्रयास नहीं है, बल्कि यह देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान और उसकी पवित्रता की रक्षा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

समान नागरिक संहिता का जिक्र

धामी ने अपने संबोधन में राज्य में लागू की गई समान नागरिक संहिता का भी ज़िक्र किया। उन्होंने कहा कि, इसके ज़रिए राज्य के सभी नागरिकों के लिए समान कानून और समान न्याय व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। इसके साथ ही उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में उठाए गए कदमों की भी जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि, राज्य में 250 से अधिक अवैध मदरसों को सील किया गया है और मदरसा बोर्ड की जगह उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की स्थापना की गई है, ताकि शिक्षा को राष्ट्र निर्माण का एक प्रभावी माध्यम बनाया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि, राज्य सरकार का लक्ष्य ऐसा उत्तराखंड बनाना है, जहां आधुनिक विकास और सनातन संस्कृति, दोनों समान रूप से आगे बढ़ें। उन्होंने विश्वास जताया कि, जनता के सहयोग और आशीर्वाद से यह संकल्प ज़रूर साकार होगा।

सीएम ने श्रद्धालुओं से की अपील

सीएम ने श्रद्धालुओं से अपील की,कि वे जहां भी जाएं, देवभूमि उत्तराखंड की संस्कृति, संस्कार और ‘अतिथि देवो भवः’ की भावना का प्रतिनिधित्व करें। उन्होंने कहा कि, यह सभी यात्री सिर्फ सोमनाथ के दर्शन करने के लिए नहीं जा रहे हैं, बल्कि वे उत्तराखंड की आध्यात्मिक चेतना, समृद्ध परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रतिनिधि के तौर पर भी जा रहे हैं। उन्होंने सभी यात्रियों से अपने आचरण, व्यवहार और विचारों के ज़रिए राज्य की सकारात्मक पहचान को और मज़बूत बनाने का आह्वान किया।

इस मौके पर विधायक बृजभूषण गैरोला, देहरादून के मेयर सौरभ थपलियाल सहित कई अन्य जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक भी मौजूद रहे, जिन्होंने इस विशेष यात्रा की शुरुआत के गवाह बनकर इस आयोजन को और भी खास बना दिया।

 

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