डायलिसिस के बहाने रिटायर्ड शिक्षक से फ्रॉड, लिखवाई 50 करोड़ की जमीन

वाराणसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी से एक ऐसा चौंकाने वाला फ्रॉड सामने आया है, जिसमें एक बुजुर्ग रिटायर्ड शिक्षक से बड़ी ही चालाकी और सुनियोजित तरीके से धोखा देकर उनकी 50 करोड़ रुपये की करीब 60 बिस्वा ज़मीन हड़प ली गई।  हैरान करने वाली बात यह है कि, इस पूरी साजिश को अंजाम देने के लिए आरोपियों ने पीड़ित के इलाज, उनकी नियमित डायलिसिस कराने का सहारा लिया। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद पीड़िता के आरोपों और पेश किए गए दस्तावेजों को प्रथम दृष्टया सही पाते हुए 10 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दे दिया है।

इसे भी पढ़ें- प्रियंका चोपड़ा-महेश बाबू की फिल्म ‘वाराणसी’ की कहानी हुई लीक

कैसे सामने आया मामला

यह पूरा मामला रोहनिया थाना क्षेत्र की रहने वाली प्रमिला मिश्रा की शिकायत के बाद सामने आया।  प्रमिला मिश्रा ने कोर्ट में शिकायत दर्ज कराते हुए बताया कि, उनके पति ओम प्रकाश मिश्रा रिटायर्ड शिक्षक हैं।  कुछ लोगों ने डायलिसिस कराने का बहाना बनाकर   राजातालाब मुख्य मार्ग पर स्थित उनकी करीब 50 करोड़ रुपये मूल्य की 60 बिस्वा ज़मीन हड़प ली।

LAND SCAM

कोर्ट ने इस शिकायत पर सुनवाई करते हुए पेश किए गए साक्ष्यों और दस्तावेज़ों की जांच की। शिकायतों को प्रथम दृष्टया सही पाते हुए रोहनिया थाने में मुकदमा दर्ज करने का आदेश जारी कर दिया है।जानकारी के मुताबिक, शिकायतकर्ता प्रमिला मिश्रा का इकलौता बेटा अभिषेक मिश्रा पेशे से चिकित्सक हैं और मुरादाबाद में पोस्टेड है। आरोपियों ने उनके अकेले रहने का फायदा उठाया और उनकी जमीन धोखे से  हड़प ली।

ऐसे शुरू की साजिश

पुलिस जांच और शिकायत में सामने आई जानकारी के मुताबिक, 65 वर्षीय ओम प्रकाश मिश्रा की सेहत काफी समय से खराब चल रही थी, जिससे सप्ताह में दो बार उनकी डायलिसिस होती थी। इसी इलाज के खर्च का हवाला देकर आरोपियों ने परिवार को यह भरोसा दिलाया कि, अगर उनका आयुष्मान कार्ड बनवा दिया जाए, तो डायलिसिस का खर्च काफी हद तक कम हो सकता है। इसी झांसे में परिवार को फंसाकर आरोपियों ने आगे की साजिश को अंजाम देना शुरू किया।

आयुष्मान कार्ड बनवाने के नाम पर सबसे पहले आरोपियों ने ओम प्रकाश मिश्रा के नाम पर एक नया मोबाइल नंबर खरीदा। इसके बाद उनके नाम पर एक नया बैंक खाता भी खुलवा दिया गया। हैरान करने वाली बात ये रही कि, इसी नए मोबाइल नंबर को पीड़ित के पेंशन खाते से भी जोड़ दिया गया, जिसके बाद आरोपी बिना पीड़ित परिवार की जानकारी के इस खाते का इस्तेमाल करने लगे। इस तरह कदम-दर-कदम आरोपियों ने पीड़ित की पहचान और वित्तीय दस्तावेज़ों पर अपना नियंत्रण जमा लिया।

अचेत अवस्था में कराए गये दस्तखत

इस मामले का सबसे संवेदनशील और परेशान करने वाला पहलू वह घटना है, जो 7 अप्रैल को घटित हुई। दरअसल 30 मार्च को ओम प्रकाश मिश्रा की आंखों का मोतियाबिंद ऑपरेशन हुआ था, जिसकी वजह से उनकी आंखों पर काला चश्मा लगा हुआ था, जिससे उन्हें ठीक से दिखाई ने दे रहा था। इसी स्थिति का फायदा उठाते हुए आरोपी 7 अप्रैल को उन्हें डायलिसिस कराने के बहाने महमूरगंज स्थित एक निजी अस्पताल लेकर गये।

अस्पताल में डायलिसिस की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ओम प्रकाश मिश्रा लगभग अचेत अवस्था में थे। इसी हालत में आरोपी उन्हें सीधे उप निबंधक के कार्यालय ले गए, वहां कार्यालय के एक लिपिक की मिलीभगत से करोड़ों रुपये की इस संपत्ति की खरीद-बिक्री का सौदा पूरा कर दिया गया, जबकि पीड़ित उस समय अपनी मानसिक और शारीरिक स्थिति के चलते यह समझने की स्थिति में ही नहीं थे कि उनके साथ क्या किया जा रहा है।

होश आने के बाद हुआ खुलासा

इस पूरी साजिश का खुलासा तब हुआ जब कुछ दिनों बाद ओम प्रकाश मिश्रा थोड़ा ठीक हुए और आरोपियों से आयुष्मान कार्ड की प्रगति के बारे में पूछताछ शुरू की, तो वे सब ठीक ढंग से जवाब नहीं पाए। कई बार पूछने पर जब सटीक जवाब नहीं मिला तो मामला  संदिग्ध लगने लगा। इसके तुरंत बाद परिवार के ही दो करीबी सदस्य, प्रमिला मिश्रा का भतीजा विशाल मिश्रा और परिवार का ड्राइवर रवि उपाध्याय अचानक से गायब हो गए, जिससे इन दोनों पर शक गहरा गया।

LAND SCAM

जांच में सामने आया कि, ज़मीन को सीधे बेचने के बजाय आरोपियों ने एक सुनियोजित तरीका अपनाया। सबसे पहले राजातालाब स्थित इस करोड़ों की ज़मीन को कागज़ों में दान के रूप में दिखाया गया, ताकि आगे की प्रक्रिया में किसी तरह का शक न हो। इसके बाद इसी ज़मीन को भाजपा जिला उपाध्यक्ष सुरेश सिंह को बेच दिया गया। जांच में यह भी सामने आया कि इस पूरे सौदे को अंजाम देने में उप निबंधक अनिल कुमार और कार्यालय के लिपिक सत्यंशु सिंह की भी मिलीभगत रही, जिन्होंने बिना उचित सत्यापन के ही यह रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी करा दी।

10 के खिलाफ दर्ज हुआ मामला

कोर्ट के आदेश के बाद रोहनिया थाने में इस पूरे मामले में कुल 10 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। इनमें भाजपा जिला उपाध्यक्ष सुरेश सिंह, उप निबंधक अनिल कुमार, कार्यालय लिपिक सत्यंशु सिंह, पीड़िता का भतीजा विशाल मिश्रा और परिवार का ड्राइवर रवि उपाध्याय प्रमुख नाम हैं। जांच में सुरेश सिंह को इस पूरे फ्रॉड का मुख्य साजिशकर्ता माना गया है, क्योंकि आखिरकार करोड़ों की यह संपत्ति उन्हीं के नाम ट्रांसफर की गई थी।

 

इसे भी पढ़ें- वाराणसी में शुरू हुआ एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन, सीएम मोहन यादव ने बाबा विश्वनाथ के दरबार में टेका माथा

Related Articles

Back to top button