
तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। अमेरिका द्वारा ईरान के छह राज्यों पर एक साथ हमला किए जाने के बाद तेहरान ने सोमवार एक साथ तीन देशों, कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जोरदार बमबारी की। मिसाइलों दद्वारा किये गये इस हमले से पूरे खाड़ी क्षेत्र में दहशत फैल गई। इस हमले से युद्ध विराम की उम्मीदों को गहरा झटका दिया।
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IRGC ने हमलों की जिम्मेदारी
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने आधिकारिक रूप से इन हमलों की ज़िम्मेदारी ली है। ईरानी सरकारी मीडिया के हवाले से आई खबरों पर गौर करें तो, IRGC ने दावा किया कि, उसने जॉर्डन, बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को टारगेट बनाया, जिसकी पुष्टि सोमवार को ईरानी सरकारी मीडिया ने भी की।

हमले में जॉर्डन का प्रिंस हसन एयरबेस प्रमुख निशाना बना, जहां ईरान ने फ्यूल टैंक और मिसाइल डिपो को उड़ाने का दावा किया। वहीं, बहरीन में अमेरिका के ड्रोन कमांड सेंटर को भी निशाना बनाया गया, जिसके साथ ही कुवैत के अली अल सलेम एयरबेस को भी टारगेट किया गया।
ईरान ने साफ चेतावनी दी है कि, अगर अमेरिका ने हमले बंद नहीं किये, तो वह मिडिल ईस्ट में स्थित उसके ठिकानों को पूरी तरह तबाह करने से पीछे नहीं हटेगा। IRGC का यह बयान ट्रंप प्रशासन के लिए सीधी धमकी माना जा रहा है, क्योंकि इससे पहले भी ईरान कई बार खाड़ी में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बना चुका है।
जार्डन में घुसी ईरानी सेना
जॉर्डन की सेना ने दावा किया है कि, उसने ईरान की ओर से दागी गई चार मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया। जॉर्डन के सैन्य सूत्रों के मुताबिक, सुबह-सुबह एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरानी क्षेत्र से जॉर्डन की हवाई सीमा में घुसी चार मिसाइलों को इंटरसेप्ट कर मार गिराया और इसमें किसी तरह की जनहानि या संपत्ति के नुकसान की खबर नहीं है।
वहीं, कुवैत ने भी अपने एयर डिफेंस सिस्टम की सक्रियता का दावा किया। ‘अल जज़ीरा’ की एक रिपोर्ट में लिखा है कि, कुवैती सेना के जनरल स्टाफ ने बताया कि, एयर डिफेंस सिस्टम ने दुश्मन की कई मिसाइलों को हवा में ही निष्क्रिय कर दिया। इसके अलावा बहरीन में भी सुरक्षा एजेंसियां अलर्ट पर हैं और मिसाइल हमलों की चेतावनी देने वाले सायरन कई बार बजाए जा चुके हैं।
यूएस ने 140 ईरानी सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना
आपको बता दें कि, इस पूरे टकराव की शुरुआत अमेरिकी हमलों से हुई थी। ‘फॉक्स न्यूज’ की रिपोर्ट में लिखा गया है कि, अमेरिकी सेना ने एक ही रात में करीब 140 ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इस हमले के साथ ही पिछली तीन रातों में कुल हमलों की संख्या 300 से भी ज्यादा हो गई।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के दावों पर गौर करे इन हमलों में ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम, तटीय रडार साइट्स, मिसाइल और ड्रोन क्षमताओं के साथ-साथ छोटी नौकाओं को भी निशाना बनाया गया, जिनमें फाइटर जेट्स, नौसैनिक जहाज़ों और वन-वे अटैक ड्रोन्स का इस्तेमाल किया गया।
मिडिल ईस्ट में तनाव
अमेरिकी हमलों का असर ईरान के भीतर भी साफ नज़र आया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इन हमलों में ईरान के भीतर दर्जनों लोग हताहत हुए हैं और कई महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचा है। ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली खामेनेई के निधन के बाद चल रहे शोक और अंतिम संस्कार समारोहों के बीच ही यह संघर्ष लगातार तेज़ होता जा रहा है, जिससे मिडिल ईस्ट में तनाव गहरा गया है।
कुवैत में आम नागरिकों को भी नुकसान
इस जंग का असर सिर्फ सैन्य ठिकानों तक सीमित नहीं रहा। कुवैत की तरफ से जारी एक रिपोर्ट में बताया गया है कि, उसके तीन उत्तरी बॉर्डर पोस्ट को नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा एक ड्रोन हमले ने कुवैत ऑयल कंपनी के एक ऑफशोर ड्रिलिंग प्लेटफॉर्म को भी निशाना बनाया, जिसमें एक कर्मचारी घायल हो गया। इस घटना ने साफ कर दिया है कि, यह संघर्ष अब सिर्फ सैन्य टकराव तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका असर खाड़ी देशों की तेल आपूर्ति और आम नागरिक जीवन पर भी पड़ने लगा है।
ट्रंप ने ईरान को दी चेतावनी
इस पूरे घटनाक्रम ने मिडिल ईस्ट को एक बार फिर बड़े युद्ध के मुहाने पर ला कर खड़ा कर दिया है। कुवैत, बहरीन और जॉर्डन जैसे देश, जो अमेरिका के करीबी सहयोगी माने जाते हैं, जिनकी धरती पर अमेरिकी सैन्य अड्डे मौजूद हैं, अब सीधे तौर पर इस संघर्ष की चपेट में आ गए हैं। इन हमलों की वजह से न सिर्फ क्षेत्रीय सुरक्षा खतरे में आ गई है, बल्कि वैश्विक स्तर पर तेल की कीमतों और शिपिंग रूट्स पर भी असर पड़ने की आशंका तेज हो गई है, क्योंकि इस क्षेत्र से दुनिया के एक बड़े हिस्से का तेल व्यापार होता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से भी ईरान को चेतावनी दी जा चुकी है कि, अगर उसने बातचीत में देरी की या हमले जारी रखे, तो उसे इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। इसका जवाब देते हुए ईरानी नेतृत्व ने कहा कि, जब तक अमेरिका अपने हमले पूरी तरह बंद नहीं करता, तब तक जवाबी कार्रवाई जारी रहेगी।
फिर अस्थिर हुआ मिडिल ईस्ट
फिलहाल मिडिल ईस्ट में स्थिति बेहद अस्थिर बनी हुई है। जॉर्डन, कुवैत और बहरीन समेत पश्चिम एशिया के कई अन्य देशों ने अपने एयर डिफेंस सिस्टम को पूरी तरह एक्टिव कर दिया है, जबकि अमेरिका और ईरान दोनों ही अपनी सैन्य कार्रवाइयों को और तेज़ करने की बात कर रहे हैं। आने वाले दिनों में यह संघर्ष किस दिशा में जाएगा, इस पर पूरी दुनिया की नज़र टिकी हुई है, क्योंकि अगर संघर्ष तेज हुआ तो वैश्विक व्यापार पूरी तरह से चरमरा जायेगा और दुनिया भर में हाहाकर मच जायेगा।
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