
नई दिल्ली। त्योहारी सीजन शुरू होने से पहले ही लोगों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिलता है, क्योंकि यही वह समय है जब बाजार में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों जगह जबरदस्त सेल का दौर चलता है। हर भारतीय परिवार साल के इसी मौसम का इंतजार करता है, ताकि जरूरी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और अन्य सामान थोड़ा सस्ते दामों पर खरीदे जा सकें। इस साल यह इंतजार और भी फायदेमंद साबित होने वाला है, क्योंकि इस बार सिर्फ फेस्टिव डिस्काउंट ही नहीं, बल्कि सरकार की एक बड़ी नीतिगत पहल भी ग्राहकों की जेब पर पड़ने वाले बोझ को कम करने जा रही है।
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सरकार का फैसला
भारत सरकार ने देश में इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के मकसद से कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स पर लगने वाली कस्टम ड्यूटी को पूरी तरह हटाने का फैसला लिया है। इस फैसले के तहत अब डिस्प्ले मॉड्यूल और वायरलेस चार्जिंग सिस्टम बनाने में इस्तेमाल होने वाले कई अहम कंपोनेंट्स पर आयात शुल्क नहीं लगेगा। इसका सीधा लाभ न सिर्फ स्मार्टफोन बनाने वाली कंपनियों को मिलेगा, बल्कि ऑटोमोबाइल सेक्टर, मेडिकल गैजेट्स और इंडस्ट्रियल मशीनों के लिए डिस्प्ले तैयार करने वाली कंपनियों को भी इसका फायदा पहुंचेगा।

यह कदम इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि आजकल स्मार्टफोन से लेकर कार और मेडिकल डिवाइस तक, लगभग हर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरण में हाई-टेक डिस्प्ले और वायरलेस चार्जिंग जैसी सुविधाएं आम हो चुकी हैं। ऐसे में इन जरूरी पार्ट्स की लागत घटने का असर सीधे तौर पर अंतिम उत्पाद की कीमत पर भी दिखेगा।
किन-किन पार्ट्स पर हटी कस्टम ड्यूटी
सरकार ने जिन प्रमुख इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स पर कस्टम ड्यूटी हटाने का ऐलान किया है, वे हैं…
- डिस्प्ले सेल
- बैकलाइट यूनिट
- फ्लेक्सिबल प्रिंटेड सर्किट असेंबली (FPCA)
- NFC कॉइल
- NdFeB मैग्नेट
ये सभी कंपोनेंट्स आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उद्योग की रीढ़ माने जाते हैं। इनका इस्तेमाल स्मार्टफोन, कारों में लगने वाले डिजिटल डिस्प्ले, मेडिकल उपकरणों और तमाम अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स के निर्माण में बड़े पैमाने पर होता है। सरकार ने यह छूट फौरी तौर पर नहीं, बल्कि एक लंबी अवधि के लिए दी है, यह रियायत 31 मार्च तक प्रभावी रहेगी। इतनी लंबी अवधि की छूट देने के पीछे मकसद यह है कि कंपनियों को अपने निवेश की योजना बनाने और देश के भीतर उत्पादन क्षमता बढ़ाने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
घरेलू उत्पादन को मिलेगी रफ्तार
सरकार का मानना है कि, इस फैसले से इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों के उत्पादन खर्च में सीधी कमी आएगी, जिससे भारत के भीतर ही ज्यादा से ज्यादा इलेक्ट्रॉनिक पार्ट्स तैयार किए जा सकेंगे। फिलहाल स्थिति यह है कि, कई महत्वपूर्ण कंपोनेंट्स अब भी विदेशों से आयात करने पड़ते हैं, जिसकी वजह से मैन्युफैक्चरिंग की लागत ऊंची बनी रहती है। कस्टम ड्यूटी हटने के बाद इन पार्ट्स की आयात लागत में कमी आएगी, जिससे भारत में तैयार होने वाले इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद वैश्विक बाजार में कहीं ज्यादा प्रतिस्पर्धी साबित हो सकेंगे।
ग्राहकों को क्या फायदा होगा
इस नीतिगत बदलाव का सबसे सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ने वाला है। जब स्मार्टफोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स बनाने में इस्तेमाल होने वाले जरूरी पार्ट्स सस्ते होंगे, तो स्वाभाविक रूप से इसका असर अंतिम उत्पाद की कीमत पर भी दिखाई देगा। खासतौर पर उन उपकरणों की कीमतों में राहत मिल सकती है जिनमें एडवांस्ड डिस्प्ले टेक्नोलॉजी और वायरलेस चार्जिंग जैसे फीचर्स शामिल होते हैं।
चूंकि यह फैसला फेस्टिव सीजन की शुरुआत से ठीक पहले लिया गया है, इसलिए संभावना है कि आने वाले महीनों में ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों बाजारों में इलेक्ट्रॉनिक्स प्रोडक्ट्स की कीमतों में गिरावट देखने को मिल सकती है। यह उन ग्राहकों के लिए एक अतिरिक्त राहत साबित होगी जो पहले से ही फेस्टिव डिस्काउंट और सेल ऑफर्स का इंतजार कर रहे हैं।
लंबी अवधि की छूट क्यों जरूरी
किसी भी बड़े मैन्युफैक्चरिंग निवेश के लिए कंपनियों को दीर्घकालिक नीतिगत स्थिरता की जरूरत होती है। इसी सोच के तहत सरकार ने यह छूट केवल कुछ महीनों या एक साल के लिए नहीं, बल्कि करीब चार वर्षों की लंबी अवधि यानी 2029 तक के लिए दी है। इससे कंपनियों को यह भरोसा मिलेगा कि वे भारत में उत्पादन इकाइयां स्थापित करने या मौजूदा क्षमता का विस्तार करने में बड़ी पूंजी लगा सकती हैं, बिना इस डर के कि नीति में जल्द बदलाव हो जाएगा।

इसके अलावा, यह कदम भारत सरकार की व्यापक मेक इन इंडिया रणनीति के अनुरूप भी है, जिसका उद्देश्य देश को इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में एक वैश्विक हब के रूप में स्थापित करना है। जब जरूरी कच्चे पार्ट्स और कंपोनेंट्स की लागत घटेगी, तो घरेलू कंपनियों के लिए न सिर्फ उत्पादन बढ़ाना आसान होगा, बल्कि वे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी विदेशी प्रतिस्पर्धियों को टक्कर देने की स्थिति में आ सकेंगी।
कई मोर्चों पर राहत
कुल मिलाकर, सरकार का यह फैसला एक साथ कई मोर्चों पर फायदेमंद साबित हो सकता है। एक तरफ यह घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को मजबूती देगा, वहीं दूसरी तरफ आम उपभोक्ताओं को भी सस्ते फोन-गैजेट्स के रूप में सीधा लाभ मिलेगा। फेस्टिव सीजन के आगमन के साथ ही यह नीतिगत बदलाव ग्राहकों के लिए दोहरी खुशखबरी लेकर आया है, एक तरफ सेल और डिस्काउंट, तो दूसरी तरफ सरकार की टैक्स राहत, जिससे इलेक्ट्रॉनिक्स खरीदना पहले से कहीं ज्यादा किफायती हो सकता है।
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