
बीजिंग। चीन की सेना (PLA) ने हाल ही में एक ऐसा वीडियो जारी किया है, जिसमें भारत के अत्याधुनिक एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम को ध्वस्त होते दिखाया गया है। इस वीडियो में एक साथ कई रॉकेट लॉन्च करते हुए दिखाया गया है, जिसके सामने एस-400 सिस्टम इंटरसेप्ट करने में नाकाम रहता है और अंततः चीनी रॉकेट उसे तबाह कर देते हैं। दिलचस्प बात यह है कि, यह प्रोपेगेंडा वीडियो ऐसे समय पर आया है जब पिछले साल भारतीय एस-400 ने पाकिस्तान के खिलाफ बेहद प्रभावशाली प्रदर्शन किया था।
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पाकिस्तान भी कर चुका है दावा
गौरतलब है कि, पिछले एक साल में पाकिस्तान ने भी एस-400 को ध्वस्त करने के सैकड़ों दावे किए हैं, लेकिन उन दावों पर पाकिस्तानियों के अलावा किसी और ने भरोसा नहीं किया। इसके उलट, भारत ने अपने सटीक ड्रोन हमले के जरिए लाहौर में चीन निर्मित HQ-9 एयर डिफेंस सिस्टम को तबाह कर दिया था।

अब ऐसा लगता है कि, चीन इसी झटके के जवाब में एक प्रोपेगेंडा वीडियो के जरिए माइंडगेम खेलने की कोशिश कर रहा है, जिससे यह संदेश दिया जा सके कि, भारत का सबसे मजबूत एयर डिफेंस सिस्टम भी बेअसर किया जा सकता है।
चीन द्वारा जारी इस वीडियो में पीएलए के PCL-191 लॉन्ग-रेंज मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम (MLRS) को भारतीय सीमा के पास तैनात एस-400 सिस्टम पर हमला करते दिखाया गया है। वीडियो को गौर से देखने पर यह स्पष्ट हो जाता है कि, यह एक सुनियोजित मनोवैज्ञानिक अभियान के तहत तैयार किया गया है, जिसका मकसद भारतीय वायुसेना के आत्मविश्वास को हिलाना है। ऐसी रणनीतियों में चीन पहले भी माहिर रहा है।
500 किमी तक हमला करने में सक्षम
PCL-191 दरअसल एक लंबी दूरी तक सटीक निशाना साधने वाला रॉकेट आर्टिलरी सिस्टम है, जो गाइडेड मिसाइलों या रॉकेटों के जरिए 350 से 500 किलोमीटर तक की दूरी पर हमला करने में सक्षम है। तकनीकी दृष्टि से देखा जाए, तो इतनी दूरी से भारतीय सीमा पर तैनात एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाया जाना संभव जरूर है।
इस वीडियो के जरिए चीन यह जताना चाहता है कि, उसके पास सटीक हमला करने की क्षमता है और वह एक साथ कई गाइडेड रॉकेट दागकर एयर डिफेंस नेटवर्क की रडार ट्रैकिंग और इंटरसेप्शन क्षमता पर भारी दबाव बना सकता है। हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि एनिमेशन से बने वीडियो और वास्तविक युद्ध की स्थिति में जमीन-आसमान का फर्क होता है। यह जरूर सच है कि एस-400 को भेदना पूरी तरह असंभव नहीं है, यूक्रेन में ऐसा हो भी चुका है, लेकिन यह उतना आसान भी नहीं जितना एनिमेशन वीडियो में दिखाया गया है।
कई परतों में फ़ैली है सुरक्षा प्रणाली
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने जिस चीज से पूरी दुनिया को चौंकाया था, वह थी उसकी बहु-स्तरीय एयर डिफेंस प्रणाली। यह जानकारी शायद पाकिस्तान और चीन तो दूर, खुद अमेरिका को भी पूरी तरह नहीं थी। भारत की एयर डिफेंस प्रणाली कई परतों में फैली हुई है, यानी अलग-अलग रेंज पर आने वाले खतरों को अलग-अलग स्तर पर बेअसर किया जा सकता है, अगर दुश्मन की मिसाइल पहली परत में नाकाम नहीं हुई तो दूसरी परत और वह भी असफल रही, तो तीसरी परत उसे रोकने के लिए तैयार रहती है।

एस-400 की बात करें, तो यह दुनिया के सबसे उन्नत लॉन्ग-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम में गिना जाता है, जो लंबी दूरी से ही एयरक्राफ्ट, क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल जैसे खतरों को निशाना बना सकता है। इसने पहले ही 314 किलोमीटर की दूरी से पाकिस्तानी अवाक्स एयरक्राफ्ट को मार गिराकर एक वर्ल्ड रिकॉर्ड कायम किया था।
जल्द मिलेगा 5वां स्क्वाड्रन
फिलहाल भारत पाकिस्तान और चीन दोनों मोर्चों से जुड़े खतरों से निपटने के लिए अपने पश्चिमी और उत्तरी सीमा क्षेत्रों में चार एस-400 स्क्वाड्रन तैनात किए हुए है। रूस से पांचवां स्क्वाड्रन जल्द मिलने की उम्मीद है, जिसके साथ ही दोनों देशों के बीच हुई रक्षा डील पूरी तरह लागू हो जाएगी।
एक दिलचस्प तथ्य यह भी है कि, चीन खुद भी एस-400 सिस्टम का इस्तेमाल करता है। अनुमान है कि, पीएलए के पास कम से कम छह एस-400 स्क्वाड्रन मौजूद हैं। इससे बीजिंग को एक खास बढ़त मिलती है, उसे इस प्लेटफॉर्म की कार्यप्रणाली, रडार संरचना और संभावित कमजोरियों की गहरी समझ है। इस जानकारी का इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर तकनीक विकसित करने, सिस्टम को बेअसर करने की रणनीति बनाने और खास तौर पर इसी सिस्टम को कमजोर करने के मकसद से सटीक हमले की योजना बनाने में किया जा सकता है।
सुरक्षा परिचालन में बदलाव
इसी खतरे को भांपते हुए भारतीय वायुसेना ने अपने एस-400 सिस्टम की सुरक्षा के लिए कई परिचालन बदलाव किए हैं। इनमें सबसे अहम है चलते हुए फायर करने की क्षमता। भारत ने अपने एस-400 सिस्टम को इस तरह अनुकूलित किया है कि वह अब एक जगह स्थिर रहने के बजाय गतिशील अवस्था में भी हमला कर सकता है। यह बदलाव इसलिए भी अहम है क्योंकि यूक्रेन में जिस रूसी एस-400 सिस्टम को ड्रोन हमले से तबाह किया गया था वह और उसका रडार दोनों एक स्थिर स्थान पर स्थापित किए गए थे।

भारतीय एस-400 सिस्टम को लेकर मिली जानकारी के अनुसार, यह अब 5 से 7 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलते हुए भी हमला करने में सक्षम है। इस गतिशीलता के चलते सैटेलाइट और लंबी दूरी की निगरानी प्रणालियों के लिए इसका सटीक पता लगाना और उसे निशाना बनाना काफी कठिन हो जाता है।
प्रोजेक्ट कुशा पर तेज हुआ काम
इसके अतिरिक्त, भारत ने अपनी एयर डिफेंस यूनिट्स को एक व्यापक ‘काउंटर-अनमैन्ड एयरक्राफ्ट सिस्टम’ (C-UAS) नेटवर्क से भी जोड़ा है, जिससे इनकी सुरक्षा और मजबूत हो जाती है। इसका उद्देश्य ड्रोन के झुंडों के जरिए जासूसी करने या एक साथ कई दिशाओं से हमला कर एयर डिफेंस सिस्टम पर दबाव बनाने की कोशिशों को नाकाम करना है।
इसके साथ ही भारत प्रोजेक्ट कुशा पर भी तेजी से काम कर रहा है, जो पूरी तरह स्वदेश में विकसित एक लंबी दूरी का एयर डिफेंस कार्यक्रम है। इसे एस-400 के साथ मिलकर काम करने के लिए तैयार किया जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि यह घरेलू प्रणाली भारत के रडार और मिसाइल नेटवर्क में विविधता लाएगी, जिससे किसी एक सिस्टम पर पूरी निर्भरता कम होगी और दुश्मनों के लिए किसी एक प्रणाली की जानी-पहचानी कमजोरियों का फायदा उठाना कहीं ज्यादा मुश्किल हो जाएगा।
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