
नई दिल्ली। देशभर में इन दिनों E20 फ्यूल, यानी पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने की नीति को लेकर बहस लगातार गरमाती जा रही है। रोज नए-नए दावे और आरोप सामने आ रहे हैं। आम जनता का एक बड़ा तबका माइलेज घटने, गाड़ी की परफॉर्मेंस प्रभावित होने और इंजन में खराबी आने जैसी शिकायतें खुलकर सामने रख रहा है। इस पूरे विवाद ने तब और तूल पकड़ा जब बिहार के एक लोकप्रिय यूट्यूबर मनीष कश्यप ने अपने दावों के जरिए इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर आग की तरह फैला दिया।
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नहीं खराब होता गाड़ी का इंजन
मामला इतना बढ़ा कि, केंद्र सरकार को इस पर सीधे प्रतिक्रिया देनी पड़ी। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने अब सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया है कि E20 पेट्रोल का माइलेज पर थोड़ा असर जरूर पड़ता है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि, इससे किसी भी गाड़ी के इंजन में कोई खराबी नहीं आती।
मामूली गिरावट होती है माइलेज में- गडकरी
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक इंटरव्यू में इस विषय पर विस्तार से बात की। उन्होंने माना कि, इथेनॉल की कैलोरिफिक वैल्यू पेट्रोल की तुलना में कम होती है। इसी वजह से गाड़ियों के माइलेज में थोड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। हालांकि उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह असर इतना बड़ा नहीं है जितना दावा किया जा रहा है।

गडकरी के मुताबिक, शहरों में गाड़ी चलाने की परिस्थितियां, जैसे दिल्ली, मुंबई और अन्य महानगरों में लगातार ट्रैफिक जाम और बार-बार ब्रेक लगाने की मजबूरी, माइलेज को प्रभावित करने में फ्यूल से कहीं ज्यादा भूमिका निभाती हैं। असल में माइलेज में अंतर काफी हद तक ड्राइविंग स्टाइल पर निर्भर करता है, न कि सिर्फ इस्तेमाल किए जा रहे ईंधन पर। ऐसे में सोशल मीडिया पर जो दावे चल रहे हैं कि E20 फ्यूल की वजह से माइलेज 20 से 40 प्रतिशत तक गिर गया है, उन्हें गडकरी ने पूरी तरह भ्रामक करार दिया।
फैलाया जा रहा गलत नैरेटिव
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा कि, सोशल मीडिया पर इंजन खराब होने की जो खबरें वायरल हो रही हैं। वे दरअसल एक गलत नैरेटिव गढ़ने की कोशिश का हिस्सा हैं। उनका कहना था कि, E20 फ्यूल को बिना ठोस परीक्षण के लॉन्च नहीं किया गया है, इसे ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) और वाहन निर्माता कंपनियों द्वारा सख्त जांच-परख के बाद ही मंजूरी दी गई थी।
गडकरी ने इस विवाद के बीच सीधी चुनौती भी दी। उन्होंने कहा कि, अगर किसी के पास ऐसा एक भी उदाहरण हो जहां किसी कार को सिर्फ E20 ईंधन की वजह से नुकसान पहुंचा हो, तो वह उन्हें दिखाए। उन्होंने यह भी बताया कि, जिन मामलों की जांच हुई है, उनमें अक्सर यह सामने आया कि, इंजन खराब होने की असली वजह मिलावटी ईंधन था, न कि E20 पेट्रोल।
यूट्यूबर ने किया दावा
गौरतलब है कि, यह पूरा विवाद तब भड़का जब यूट्यूबर मनीष कश्यप ने दावा किया कि, उनकी टोयोटा इनोवा हाईक्रॉस गाड़ी E20 फ्यूल की वजह से खराब हो गई। उन्होंने इसे लेकर नितिन गडकरी की जमकर आलोचना की, जिसके बाद यह मुद्दा तेजी से सोशल मीडिया पर फैल गया और सरकार पर जवाब देने का दबाव बढ़ गया। इसी दबाव में गडकरी को सार्वजनिक तौर पर सामने आकर स्पष्टीकरण देना पड़ा।
पुरानी गाड़ियों के लिए राहत
अपने स्पष्टीकरण के साथ ही नितिन गडकरी ने एक अहम जानकारी भी साझा की। उन्होंने बताया कि पुरानी गाड़ियों के मालिकों के लिए वाहन निर्माता कंपनियों को निर्देश दिए गए हैं कि, सर्विसिंग के दौरान गाड़ियों के वॉशर बदले जाएं। यह सुविधा ग्राहकों के लिए पूरी तरह मुफ्त रहेगी। इन नए वॉशर को खासतौर पर रबर से तैयार किया जा रहा है, ताकि वे इथेनॉल मिश्रित ईंधन के साथ बेहतर तरीके से तालमेल बैठा सकें और गाड़ी को किसी तरह के नुकसान से बचाया जा सके।
इस पूरे विवाद के बीच सरकार की एक बड़ी योजना भी सामने आई है। केंद्र सरकार ब्राजील के फ्यूल मॉडल को भारत में अपनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है, जहां ग्राहकों को अपनी पसंद का ईंधन चुनने की पूरी आजादी दी जाती है। इसी क्रम में टाटा, महिंद्रा, हुंडई, टोयोटा और मारुति सुजुकी जैसी बड़ी कंपनियां फ्लेक्स-फ्यूल इंजन तकनीक विकसित कर रही हैं। यह तकनीक ऐसी गाड़ियों में इस्तेमाल होगी जो सिर्फ E20 ही नहीं, बल्कि इससे भी अधिक इथेनॉल मिश्रण पर चल सकेंगी, यानी 85 प्रतिशत तक इथेनॉल मिले पेट्रोल पर या फिर पूरी तरह 100 प्रतिशत इथेनॉल पर भी।
विदेशी मुद्रा बचत पर काम कर रही सरकार
इस पूरे मामले में सबसे अहम पहलू यह है कि, नरेंद्र मोदी सरकार तेल आयात कम करने और इस जरिए विदेशी मुद्रा में भारी बचत करने के लक्ष्य पर काम कर रही है। इसी उद्देश्य से इथेनॉल के साथ-साथ मेथनॉल और आइसो-ब्यूटेनॉल जैसे स्वदेशी ईंधन विकल्पों को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जो न सिर्फ आर्थिक रूप से सस्ते हैं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी बेहतर साबित होते हैं क्योंकि इनसे प्रदूषण कम होता है।
नितिन गडकरी ने इस मौके पर स्पष्ट रूप से कहा कि इथेनॉल मिश्रित ईंधन की पूरी नीति के पीछे मकसद है देश की विदेशी ईंधन पर निर्भरता को खत्म करना और साथ ही किसानों की आमदनी बढ़ाना। उनका कहना था कि, सरकार विदेशी ईंधन के बजाय स्वदेशी ईंधन के इस्तेमाल को प्राथमिकता देना चाहती है। केंद्रीय मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार की मंशा ग्राहकों को ईंधन के मामले में विकल्प देना और साथ ही देश को प्रदूषण-मुक्त बनाने की दिशा में आगे बढ़ना है।
सरकार ने स्वीकार की हकीकत
गडकरी के मुताबिक, आने वाले समय में मेथनॉल और आइसो-ब्यूटेनॉल जैसे ईंधन विकल्पों का इस्तेमाल सिर्फ कारों तक सीमित नहीं रहेगा। निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाले भारी उपकरणों के साथ-साथ सार्वजनिक परिवहन के साधनों यानी बसों और ट्रकों में भी इनका उपयोग किया जाएगा, जिसे सरकार एक क्रांतिकारी और दूरगामी कदम मान रही है।
कुल मिलाकर, E20 फ्यूल को लेकर उठा यह विवाद भले ही सोशल मीडिया पर तीव्र बहस का रूप ले चुका हो, लेकिन सरकार का रुख साफ है, माइलेज पर हल्का असर स्वीकार करते हुए भी वह इस नीति को स्वदेशी ईंधन, आयात में कटौती और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक जरूरी और दीर्घकालिक कदम मानती है।
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