
नई दिल्ली। दिल्ली-एनसीआर में लगातार बढ़ती आबादी और शहरी क्षेत्रों पर पड़ रहे बोझ को कम करने के मकसद से यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण यानी यीडा ने एक बड़ी और महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। मास्टर प्लान 2041 के तहत हाथरस जिले में हाथरस अर्बन सेंटर नाम से एक बिल्कुल नया हाईटेक सैटेलाइट शहर बसाया जाएगा। यह शहर आधुनिक सुविधाओं, स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतरीन कनेक्टिविटी से पूरी तरह लैस होगा। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि, यह प्रस्तावित शहर नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, यमुना एक्सप्रेसवे और आने वाले हाई-स्पीड ट्रांसपोर्ट नेटवर्क से सीधे तौर पर जुड़ा होगा।
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2041 के मास्टर प्लान को आकर
यमुना प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि, एनसीआर क्षेत्र पर लगातार बढ़ते दबाव और तेजी से हो रहे शहरीकरण को ध्यान में रखते हुए ही मास्टर प्लान 2041 को आकार दिया गया है।

इस योजना को लेकर सरकार की सोच है कि, दिल्ली-एनसीआर की तेजी से बढ़ती आबादी को नए सैटेलाइट शहरों की तरफ मोड़ा जाए, ताकि मौजूदा शहरों पर पड़ने वाला दबाव कम हो सके। इसी रणनीति के तहत हाथरस जिले में करीब 10 हजार एकड़ जमीन पर एक पूरी तरह आधुनिक अर्बन सेंटर विकसित करने की योजना बनाई गई है।
358 गांवों को किया जाएगा शामिल
अधिकारियों का कहना है कि, इस नए शहर को बसाने की प्रक्रिया में सबसे पहले कुल 358 गांवों को इस योजना का हिस्सा बनाया जाएगा। शुरुआती चरण में करीब 2000 से 4000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में विकास कार्य आरंभ किया जाएगा। फिलहाल, इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए सर्वे का काम, जरूरी डेटा जुटाने की प्रक्रिया और जीआईएस यानी जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम आधारित मास्टर प्लान तैयार करने का काम चल रहा है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि, इस नए शहर का विकास पूरी तरह वैज्ञानिक तरीके से और सुनियोजित ढंग से हो, ताकि भविष्य में किसी तरह की अव्यवस्था न फैले।

खास बात यह है कि, इस महत्वाकांक्षी योजना का दायरा सिर्फ हाथरस तक सीमित नहीं रहने वाला है। इसका सीधा और व्यापक असर नोएडा, ग्रेटर नोएडा, जेवर, अलीगढ़, आगरा सहित पूरे एनसीआर क्षेत्र पर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि, इस पहल से दिल्ली-एनसीआर की तेजी से बढ़ती आबादी का दबाव काफी हद तक कम हो सकेगा।
आवास के साथ रोजगार भी बढ़ेगा
इस योजना के लागू होने के बाद नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे पहले से ही घनी आबादी वाले क्षेत्रों में आवास को लेकर बढ़ता दबाव काफी हद तक घट जाएगा। वहीं, दूसरी ओर हाथरस, अलीगढ़ और आगरा जैसे क्षेत्रों में रोजगार के नए दरवाजे खुलेंगे। स्थानीय उद्योगों को नई जमीन के साथ-साथ बेहतर लॉजिस्टिक सुविधाएं भी मिलेंगी, जिससे इन क्षेत्रों में औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा जेवर एयरपोर्ट के आसपास के इलाकों में भी आर्थिक हलचल तेज होने की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि यह नया शहर सीधे तौर पर उस क्षेत्र से जुड़ा होगा।
यमुना एक्सप्रेस के किनारे विकसित होगा अर्बन सेंटर
प्रस्तावित हाथरस अर्बन सेंटर को यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे ही विकसित किया जाएगा, जिससे यहां से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक पहुंचना बेहद आसान हो जाएगा। इसके अतिरिक्त इस नए शहर को नमो भारत ट्रेन सेवा, प्रस्तावित बुलेट ट्रेन कॉरिडोर और मौजूदा एक्सप्रेसवे नेटवर्क से भी जोड़ने की योजना है। हाथरस रेलवे जंक्शन पहले से ही दो प्रमुख रेल लाइनों के मिलन बिंदु के रूप में जाना जाता है। इसी वजह से यह माना जा रहा है कि, इस जंक्शन के दम पर माल ढुलाई और औद्योगिक निवेश दोनों को नई रफ्तार मिलेगी।
स्वरोजगार के विकल्प भी खुलेंगे
अधिकारियों का कहना है कि, इस पूरी योजना का लाभ केवल इंफ्रास्ट्रक्चर और परिवहन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका सकारात्मक असर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं, होटल इंडस्ट्री, व्यापार और रियल एस्टेट क्षेत्र पर भी पड़ेगा। इन सभी क्षेत्रों में नई परियोजनाओं और निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी। इसके साथ ही स्थानीय स्तर पर युवाओं के लिए रोजगार के साथ-साथ स्वरोजगार के भी कई नए विकल्प खुलने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे क्षेत्र के आर्थिक ढांचे में मजबूती आएगी।

YEIDA का यह मास्टर प्लान 2041 सिर्फ एक नया शहर बसाने भर की योजना नहीं है, बल्कि यह पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश और एनसीआर क्षेत्र के संतुलित और सुनियोजित विकास की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अगर यह योजना समय पर और प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र आवास, उद्योग और परिवहन के लिहाज से एक नए और आधुनिक केंद्र के रूप में उभर सकता है, जो दिल्ली-एनसीआर पर बढ़ते दबाव को कम करने में अहम भूमिका निभाएगा।
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