
उम्र बढ़ने के साथ-साथ लगभग हर व्यक्ति को एक समस्या का सामना करना पड़ता है, वह है आंतों की कार्यक्षमता में गिरावट। खासतौर पर 40 साल की उम्र पार करने के बाद शरीर में पाचन से जुड़े एंजाइम बनने की प्रक्रिया धीमी पड़ने लगती है। यही वजह है कि, इस उम्र के बाद खाना पचाने की क्षमता पहले जितनी मजबूत नहीं रह जाती। ऐसे में कई लोग असमंजस में रहते हैं कि आखिर उन्हें अपनी डाइट किस तरह की रखनी चाहिए ताकि पाचन तंत्र स्वस्थ बना रहे। आइए जानते हैं इस बारे में विस्तार से।
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क्या है गैस्ट्रो-शील्ड डाइट
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि, 40 साल की उम्र के बाद पाचन शक्ति स्वाभाविक रूप से कमजोर पड़ने लगती है। इसी वजह से वे ‘गैस्ट्रो-शील्ड’ नाम की डाइट अवधारणा पर भरोसा जताते हैं। दरअसल गैस्ट्रो-शील्ड कोई जादुई फॉर्मूला नहीं बल्कि एक ऐसा पोषण-आधारित तरीका है, जिसका मकसद पेट की भीतरी परत यानी गट लाइनिंग को मजबूत बनाना है। यह तरीका पेट में होने वाली सूजन को रोकने में भी मददगार माना जाता है, जो कई पाचन संबंधी परेशानियों की जड़ होती है।

हेल्थ एक्सपर्ट बताते हैं कि, इस डाइट का सबसे महत्वपूर्ण आधार फाइबर युक्त भोजन है। इसमें साबुत अनाज, दालें, हरी पत्तेदार सब्जियां और मौसमी फल जैसी चीजें शामिल हैं, जो न सिर्फ पेट बल्कि पूरे शरीर की सेहत के लिए भी लाभदायक मानी जाती हैं। इसके अलावा दही, छाछ और इडली-डोसा जैसे परंपरागत भारतीय व्यंजनों को भी डाइट का हिस्सा बनाने की सलाह दी जाती है। इन खाद्य पदार्थों में प्राकृतिक रूप से अच्छे बैक्टीरिया यानी प्रोबायोटिक्स मौजूद होते हैं, जो आंतों के स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद बताए जाते हैं।
पर्याप्त पानी जरूरी
सिर्फ खाने-पीने की चीजों तक ही यह सलाह सीमित नहीं है। लंबे समय से डॉक्टर और पोषण विशेषज्ञ यह भी कहते आए हैं कि, रोजाना पर्याप्त मात्रा में पानी पीना बेहद जरूरी है। पर्याप्त पानी का सेवन पाचन तंत्र को सुचारू रूप से काम करने में मदद करता है और शरीर से विषैले तत्वों को बाहर निकालने की प्रक्रिया को भी आसान बनाता है। कुल मिलाकर, फाइबर युक्त भोजन, प्रोबायोटिक स्रोत और पर्याप्त जलयोग्यता। ये तीनों मिलकर गैस्ट्रो-शील्ड डाइट की बुनियाद तैयार करते हैं।
किन चीजों का परहेज करें
अच्छी डाइट अपनाने के साथ-साथ यह जानना भी उतना ही जरूरी है कि, किन चीजों से दूरी बनानी चाहिए। विशेषज्ञों की सबसे पहली सलाह यही है कि अत्यधिक तेल में तला हुआ, ज्यादा भुना हुआ और मसालेदार भोजन खाने से बचना चाहिए। इस तरह का खाना पेट की भीतरी परत को नुकसान पहुंचा सकता है और लंबे समय में पाचन संबंधी दिक्कतें बढ़ा सकता है।
इसके अलावा ज्यादा मीठा और मैदे से बनी चीजें भी सेहत के लिहाज से नुकसानदायक मानी जाती हैं, क्योंकि ये पेट में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया के संतुलन को बिगाड़ सकती हैं। जब आंतों में अच्छे बैक्टीरिया की संख्या कम हो जाती है, तो पाचन प्रक्रिया धीमी पड़ जाती है और शरीर को पोषक तत्व सोखने में भी दिक्कत आती है।
एक और महत्वपूर्ण बात जिस पर विशेषज्ञ खास जोर देते हैं, वह है बिना जरूरत के बार-बार दर्द निवारक दवाइयों का सेवन। ऐसी दवाइयां पेट की परत को कमजोर कर सकती हैं और लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर आंतों को स्थायी नुकसान भी पहुंचा सकती हैं। इसीलिए यह सलाह दी जाती है कि किसी भी तरह की दवा लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लिया जाए, खासकर उन लोगों को जो पहले से ही पेट संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
एक्टिव नहीं रह पाता पाचन तंत्र
40 साल की उम्र के बाद शरीर में होने वाले प्राकृतिक बदलावों की वजह से पाचन तंत्र पहले जितना सक्रिय नहीं रह पाता। ऐसे में अगर सही समय पर खान-पान की आदतों में बदलाव न किया जाए, तो आगे चलकर गैस, अपच, कब्ज और पेट फूलने जैसी समस्याएं आम हो सकती हैं। गैस्ट्रो-शील्ड जैसी डाइट अपनाकर लोग न सिर्फ इन समस्याओं से बच सकते हैं, बल्कि अपने पाचन तंत्र को लंबे समय तक स्वस्थ और सक्रिय भी बनाए रख सकते हैं।

कुल मिलाकर, यह डाइट कोई अचानक अपनाया जाने वाला कठिन नियम नहीं है, बल्कि रोजमर्रा के खान-पान में छोटे-छोटे लेकिन असरदार बदलाव करने की सलाह देती है। फाइबर युक्त भोजन, प्रोबायोटिक स्रोत, पर्याप्त पानी और अस्वस्थ चीजों से परहेज। इन आदतों को अपनाकर 40 की उम्र पार कर चुके लोग अपने पेट को लंबे समय तक जवां और सक्रिय बनाए रख सकते हैं। हालांकि, किसी भी नई डाइट को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या पोषण विशेषज्ञ से सलाह लेना हमेशा बेहतर रहता है, ताकि व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार सही मार्गदर्शन मिल सके।
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