राम मंदिर दान घोटाला: चांदी चोरी होने के आरोप को SIT ने किया खारिज, ट्रस्ट को राहत

अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर को लेकर बीते कुछ समय से चल रहे दान चोरी के विवाद पर अब विराम लग गया है। मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दान की गई चांदी गायब होने के आरोपों की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी रिपोर्ट में इन दावों को खारिज कर दिया है। रिपोर्ट के सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को बड़ी राहत मिली है, क्योंकि इससे ट्रस्ट का यह पक्ष मजबूत हुआ है कि, दान से जुड़ी अनियमितता किसी सुनियोजित अपराध का नतीजा नहीं थी, बल्कि यह कुछ लोगों की व्यक्तिगत गलतियों की वजह से हुआ।

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SIT जांच में क्या निकला

एसआईटी की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रस्ट के भीतर दान की चोरी को लेकर किसी बड़ी साजिश के सबूत नहीं मिले हैं। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि, दान की गिनती करने वाले केंद्र में कुछ कर्मचारियों या जिम्मेदार लोगों की लापरवाही और प्रशासनिक खामियां जरूर सामने आई हैं, जिन्हें आपराधिक लापरवाही की श्रेणी में रखा जा सकता है, लेकिन यह पूरी घटना ट्रस्ट की ओर से जानबूझकर की गई संगठित चोरी नहीं थी, जैसा कि कुछ हलकों में आरोप लगाए जा रहे थे।

ट्रस्ट ने दिखाई 5 करोड़ की रामायण

विवाद तब और गहरा गया जब कई दानदाताओं और सामाजिक संगठनों ने सार्वजनिक रूप से दावा किया कि, उनके द्वारा मंदिर को भेंट की गई सोने-चांदी की वस्तुएं मंदिर से गायब हो गई हैं।

Ram Temple donation scam C

इन आरोपों के जवाब में एसआईटी ने कहा कि, दान में मिली हर वस्तु का पूरा हिसाब-किताब ट्रस्ट के पास सुरक्षित है। इसी सिलसिले में सोमवार को ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने दान की गई कुछ बहुमूल्य वस्तुओं को सार्वजनिक तौर पर प्रदर्शित कीं, जिनमें सोने की परत चढ़ी हुई रामचरितमानस की एक विशेष प्रति भी शामिल थी।

किन आरोपों की हुई जांच

इस पूरे प्रकरण में दो प्रमुख आरोप सबसे ज्यादा चर्चा में रहे। पहला आरोप पूर्व केंद्रीय गृह सचिव और सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एस. लक्ष्मीनारायण से जुड़ा था, जिन्होंने मंदिर को सोने की परत चढ़ी रामचरितमानस भेंट की थी। इस अनमोल भेंट की कीमत करीब 5 करोड़ रुपये आंकी गई थी। चढ़ावा चोरी का विवाद गहराने के बाद दावा किया गया था कि, यह वस्तु मंदिर से गायब हो गई है।

दूसरा आरोप अनीता भारद्वाज नाम की एक महिला की तरफ से लगाया गया था। उनका कहना था कि, उन्होंने ट्रस्ट के पदाधिकारियों को चांदी से बनी बेशकीमती ‘कागभुशुंडी’ प्रतिमा सौंपी थी, जो अब मंदिर में नहीं मिल रही। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि दोनों ही वस्तुओं का पूरा रिकॉर्ड ट्रस्ट के पास मौजूद है और वे कहीं गायब नहीं हुई थीं। इस तरह दोनों बड़े आरोप जांच में निराधार साबित हुए।

6 जुलाई को हुई अहम बैठक

इसी विवाद के बीच 6 जुलाई को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक अहम बैठक हुई, जिसमें मंदिर का प्रबंधन देखने वाले ट्रस्ट की संरचना में बदलाव किया गया। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का इस्तीफा स्वीकार कर लिया गया और उनकी जगह कृष्ण मोहन को अंतरिम महासचिव नियुक्त किया गया। नई जिम्मेदारी संभालते हुए कृष्ण मोहन ने कहा है कि, लाखों राम भक्तों का भरोसा फिर से कायम करना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।

दिलचस्प बात यह है कि, दान चोरी के मामले में शिकायत दर्ज कराने वाले कृष्ण मोहन ही अब खुद ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव की भूमिका में हैं, जिससे उम्मीद जताई जा रही है कि, पारदर्शिता को लेकर आगे और सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।

सोने-चांदी को पिघलाकर बनाई गईं सिल्लियां

ट्रस्ट की वार्षिक रिपोर्ट में एक अहम जानकारी सामने आई है। इसके अनुसार, श्रद्धालुओं द्वारा दान में दी गई चांदी की मूर्तियों, बर्तनों और आभूषणों जैसी वस्तुओं को पिघलाकर चांदी की सिल्लियों में तब्दील कर दिया गया है, ताकि उन्हें सुरक्षित रूप से लॉकर में रखा जा सके। रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक मंदिर को कुल 32.2 किलोग्राम सोने का सामान और लगभग 1195 किलोग्राम चांदी की वस्तुएं दान में मिल चुकी हैं।

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इन कीमती धातुओं को पिघलाने और सिल्लियों में बदलने का काम ट्रस्ट ने ‘सिक्योरिटी प्रिंटिंग एंड मिंटिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड’ की मदद से करवाया। अब तक करीब 944 किलोग्राम कीमती धातु को रीसाइकल करके ठोस सिल्लियों का रूप दिया जा चुका है, जिससे इनके रखरखाव और सुरक्षा में आसानी हो सके।

2926 वस्तुओं का पूरा रिकॉर्ड मौजूद

एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट कृष्ण मोहन को सौंपी, जो इस मामले में शिकायतकर्ता भी रहे हैं। इस रिपोर्ट में तीन पहले प्रकाशित समाचार रिपोर्टों का हवाला दिया गया था, जिनमें इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन, विश्व हिंदी सेवा समाज और अनिल विश्वकर्मा जैसे स्रोतों के जरिए ट्रस्ट पर दानदाताओं की वस्तुएं गायब करने के आरोप लगाए गए थे, लेकिन जांच के बाद ये सभी आरोप बेबुनियाद पाए गए।

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ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने इस मौके पर स्पष्ट किया कि, मंदिर को अब तक मिली कुल 2926 कीमती वस्तुओं का पूरा और पारदर्शी हिसाब-किताब ट्रस्ट के पास सुरक्षित रखा गया है। उन्होंने यह भी कहा कि, जो भी श्रद्धालु या दानदाता इस रिकॉर्ड को देखना चाहते हैं, वे अयोध्या स्थित ट्रस्ट कार्यालय जाकर प्रशासन से मिल सकते हैं और संबंधित दस्तावेज देख सकते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम से साफ है कि, भले ही दान से जुड़ी कुछ प्रशासनिक खामियां सामने आई हों, लेकिन बड़े पैमाने पर आयोजित चोरी या घोटाले के आरोपों की पुष्टि नहीं हुई है, जिससे ट्रस्ट और मंदिर प्रबंधन को राहत मिली है।

 

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