
उत्तरकाशी। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित हर्षिल क्षेत्र पर एक बार फिर से बड़ी आपदा के बादल मंडराने लगे हैं। लगातार हो रही बारिश के बीच भागीरथी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा है, जिससे इस पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया है। नदी के बढ़ते जलस्तर और लगातार हो रहे भू-कटाव के कारण गढ़वाल मंडल विकास निगम यानी जीएमवीएन के गेस्ट हाउस, हर्षिल पुलिस थाना, कई होटल-होम स्टे, आवासीय भवनों के साथ-साथ यहां के मशहूर सेब के बगीचों पर भी बड़ा संकट खड़ा हो गया है। हालात की गंभीरता को भांपते हुए जिला प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए खतरे की जद में आए कुल आठ भवनों को खाली करा दिया है।
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बस्ती की तरफ बहने लगा पानी
उत्तरकाशी जिला मुख्यालय से करीब 80 किलोमीटर दूर स्थित हर्षिल इन दिनों भागीरथी नदी के बढ़ते जलस्तर की वजह से आपदा के साये में जी रहा है। दरअसल बीते शुक्रवार को हुई भारी बारिश के चलते भागीरथी नदी का जलस्तर अचानक इतना बढ़ गया कि पहले नदी को चैनलाइज करने के लिए बनाया गया मलबे का टीला भी बह गया। इसके परिणामस्वरूप पूरा पानी सीधे आवासीय बस्ती की ओर बहने लगा, और इसी दौरान गढ़वाल मंडल विकास निगम के गेस्ट हाउस का एक टिनशेड भी पानी में बह गया।

इस घटना के बाद से हर्षिल थाना भवन के साथ-साथ नदी किनारे बसे तमाम आवासीय भवनों और सेब के बगीचों पर भू-कटाव का खतरा और भी बढ़ गया है। भागीरथी नदी का पानी लगातार बस्ती की ओर बहने से यहां रहने वाले लोग बुरी तरह सहमे हुए हैं।
गौरतलब है कि, बीते साल आई भीषण आपदा के दौरान भी हर्षिल में एक कृत्रिम झील बन गई थी, तभी से इस इलाके में नदी के कटाव के कारण ग्रामीणों पर हमेशा किसी बड़ी आपदा का साया मंडराता रहता है। स्थानीय ग्रामीण अब रात-रात भर जागकर भागीरथी नदी के बढ़ते जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं।
वायरक्रेट भी बहे
हर्षिल क्षेत्र में बीते गुरुवार दोपहर हुई तेज बारिश के कारण भागीरथी नदी का जलस्तर एक बार फिर बढ़ गया, जिससे सिंचाई विभाग द्वारा शुरू किए गए सुरक्षात्मक कार्य पर भी पानी फिर गया। नदी का जलस्तर बढ़ने से सिंचाई विभाग की ओर से हर्षिल को सुरक्षित करने के लिए लगाई जा रही वायरक्रेट गेबियन वॉल भी पानी में बह गई, जिससे अब पानी सीधे बस्ती की तरफ बहने लगा है।
सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता सचिन सिंघल के मुताबिक, बाढ़ सुरक्षात्मक कार्य को प्राथमिकता देते हुए एक एक्सकेवेटर मशीन उतारकर आर्मी कैंप की ओर से नदी के चैनलाइजेशन का काम युद्धस्तर पर किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हर्षिल को किसी भी तरह के नुकसान से बचाने के लिए फिलहाल तटवर्ती क्षेत्र में वायरक्रेट लगाए जा रहे हैं।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि टेंडर प्रक्रिया में देरी की वजह से सुरक्षात्मक कार्य समय पर शुरू नहीं हो सका। उनके मुताबिक हर्षिल में करीब 10 करोड़ 24 लाख रुपये की लागत से सुरक्षात्मक कार्य होने हैं, जिसके तहत 500 मीटर लंबी आरसीसी दीवार के साथ-साथ एक एप्रोच सड़क का निर्माण भी किया जाना है।
जीएमवीएन गेस्ट हाउस पर भी खतरा
वहीं दूसरी ओर जीएमवीएन गेस्ट हाउस के ठीक नीचे बने पुश्ते पर मोटी-मोटी दरारें साफ नजर आने लगी हैं। इससे जीएमवीएन गेस्ट हाउस, हर्षिल थाना और आसपास के पूरे क्षेत्र पर लगातार खतरा बना हुआ है। स्थिति यह है कि, अगर अगले एक-दो दिन में तेज बारिश होती है और नदी का जलस्तर और बढ़ता है, तो जीएमवीएन गेस्ट हाउस के जमींदोज होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। यही वजह है कि प्रशासन ने एहतियातन इन भवनों को पहले ही खाली करा दिया है।
2025 में भी आई थी बाढ़
हर्षिल की पूर्व प्रधान बसंती नेगी और स्थानीय निवासी दिनेश रावत का कहना है कि, वे साल 2025 में 5 अगस्त को आई भीषण आपदा के बाद से ही लगातार परेशान हैं। उनका आरोप है कि, आपदा के करीब 11 महीने बीत जाने के बावजूद भी हर्षिल की सुरक्षा को लेकर अभी तक कोई ठोस इंतजाम नहीं किया जा सका है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर हर्षिल को समय रहते सुरक्षित नहीं किया गया, तो न सिर्फ उनका आवास बल्कि उनकी पूरी आजीविका ही खतरे में पड़ जाएगी।

इसी बीच जिला प्रशासन ने हर्षिल में बढ़ते खतरे को देखते हुए स्थानीय लोगों को भवन खाली करने के औपचारिक नोटिस भी जारी करने शुरू कर दिए हैं। भटवाड़ी तहसीलदार अर्पिता गर्खाल ने बताया कि शुक्रवार को ही जीएमवीएन गेस्ट हाउस और थाना कोतवाली सहित खतरे की जद में आए भवनों को खाली करने का नोटिस जारी कर दिया गया था। अब अन्य भवनों को भी चिन्हित कर उन्हें खाली कराने की प्रक्रिया जारी है।
पिछले साल भी बरपा था कहर
गौरतलब है कि, पिछले साल 2025 में धराली क्षेत्र में खीरगंगा और तेलगाड़ नदी में आए भीषण जनसैलाब ने धराली और हर्षिल को भारी नुकसान पहुंचाया था। खीरगंगा से आए मलबे में पूरा धराली कस्बा दब गया था। इस आपदा में सात लोगों की मौत की पुष्टि हुई थी, जबकि 68 लोग लापता हो गए थे, जिन्हें बाद में मृत घोषित कर दिया गया। इसके अलावा तेलगाड़ नदी के उफान पर आने से हर्षिल स्थित आर्मी कैंप के नौ जवान भी लापता हो गए थे, जिनमें से केवल दो जवानों के शव ही बरामद हो सके थे।
इस आपदा के दौरान हर्षिल और धराली के बीच भागीरथी नदी का प्रवाह बाधित होने से हाईवे के पास एक विशाल झील बन गई थी, जिसकी वजह से करीब 20 दिनों तक गंगोत्री हाईवे का बड़ा हिस्सा पूरी तरह जलमग्न रहा और गंगोत्री धाम का संपर्क बाकी दुनिया से पूरी तरह कट गया था। हैरानी की बात यह है कि इतने महीने बीत जाने के बावजूद वह झील अब तक पूरी तरह खाली नहीं हो पाई है, जो इस पूरे क्षेत्र के लिए आज भी एक बड़ा खतरा बनी हुई है।
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