राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद: ट्रस्ट ने मंजूर किया चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्र का इस्तीफा

 अयोध्या। अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में आज एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे को बैठक में मंजूर कर लिया गया है। थोड़ी देर में ट्रस्ट की ओर से इस संबंध में आधिकारिक बयान जारी किया जा सकता है। यह विकास राम मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी के विवाद के बीच आया है, जिसने पूरे देश का ध्यान खींचा है।

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ट्रस्ट की बैठक आज 6 जुलाई को दोपहर 3 बजे अयोध्या के मंदिर परिसर में बुलाई गई थी। इस बैठक में मुख्य एजेंडे में चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर चर्चा और फैसला शामिल था। सूत्रों के अनुसार, इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए हैं, जिसके बाद दोनों पदों से अलग हो जाएंगे। हालांकि, ट्रस्ट के नियमों के मुताबिक वे स्थायी सदस्य के रूप में कुछ समय तक जुड़े रह सकते हैं, जब तक कि पूरी प्रक्रिया पूरी न हो। ट्रस्ट जल्द ही इस पर विस्तृत बयान जारी कर स्पष्टता प्रदान करेगा।

 चढ़ावा चोरी विवाद

यह पूरा मामला राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे (नकदी, चांदी की ईंटें, आभूषण आदि) की कथित हेराफेरी से जुड़ा है। विशेष जांच टीम (SIT) ने इसकी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें प्रबंधन में कुछ कमियों का जिक्र था। इसके बाद नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए चंपत राय और अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ गिरफ्तारियां भी हुईं और जांच जारी है।

ट्रस्ट ने पहले ही स्पष्ट किया था कि, सभी दान मूल्यवान वस्तुएं सुरक्षित हैं और दोषियों को सख्त सजा दी जाएगी। कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि सहित अन्य अधिकारियों ने भक्तों को आश्वासन दिया कि, राम लला के मंदिर की पवित्रता और पारदर्शिता बनी रहेगी। यह विवाद राम मंदिर आंदोलन और निर्माण के प्रतीकात्मक महत्व को देखते हुए संवेदनशील रहा है।

कौन हैं चंपत राय

चंपत राय विश्व हिंदू परिषद के उपाध्यक्ष रहे हैं और राम मंदिर आंदोलन से लंबे समय से जुड़े हैं। सुप्रीम कोर्ट के 2019 के फैसले के बाद फरवरी 2020 में ट्रस्ट गठित होने पर उन्हें महासचिव बनाया गया। मंदिर निर्माण की निगरानी, दैनिक प्रशासन, दान प्रबंधन और समन्वय में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही। वे एक रसायन शास्त्र के प्रोफेसर के रूप में भी जाने जाते हैं, लेकिन उनका पूरा जीवन हिंदू जागरण और राम जन्मभूमि आंदोलन को समर्पित रहा।

नैतिक आधार पर दिया इस्तीफा

अनिल मिश्रा अयोध्या के एक होम्योपैथिक डॉक्टर हैं और ट्रस्ट के मूल सदस्यों में शामिल रहे। उन्होंने भी नैतिक आधार पर इस्तीफा दिया। ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास स्वास्थ्य कारणों से बैठक में शामिल नहीं हो सके। ट्रस्ट में कुल 15 सदस्य हैं, जिनमें से 10 मतदान योग्य हैं। फैसले दो-तिहाई बहुमत से लिए जाते हैं। नियमों में स्थायी सदस्य को हटाने के लिए एक महीने का नोटिस और वोटिंग की प्रक्रिया है। इसलिए इस्तीफा स्वीकार करने के बाद भी कुछ प्रक्रियाएं पूरी करनी पड़ सकती हैं।

ट्रस्ट की बैठक के अन्य एजेंडेआज की बैठक में इस्तीफों के अलावा SIT रिपोर्ट पर चर्चा, 2025-26 के आय-व्यय की समीक्षा, श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए भविष्य की व्यवस्थाएं, और प्रशासनिक सुधार शामिल थे। संभावना है कि नए महासचिव या CEO जैसी पदों पर चर्चा हो और ट्रस्ट की संरचना को और मजबूत किया जाए। कुछ सूत्रों ने बजरंगलाल बागड़ा जैसे नामों का जिक्र किया है संभावित उत्तराधिकारी के रूप में।

2019 में हुआ था ट्रस्ट का गठन

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन नवंबर 2019 के सुप्रीम कोर्ट फैसले के अनुपालन में फरवरी 2020 में हुआ। इसका मुख्य उद्देश्य राम मंदिर का निर्माण, रखरखाव, तीर्थ क्षेत्र का विकास और धार्मिक गतिविधियां संचालित करना है। ट्रस्ट स्वायत्त है, केंद्र या राज्य सरकार से सीधे वित्तीय सहायता नहीं लेता और RTI के दायरे में नहीं आता, लेकिन पारदर्शिता बनाए रखने की जिम्मेदारी उसकी है।

मंदिर का निर्माण पूरा होने के बाद श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। लाखों भक्त राम लला के दर्शन करते हैं और उदार दान देते हैं। ऐसे में प्रबंधन, सुरक्षा और लेखा-जोखा की मजबूत व्यवस्था अत्यंत जरूरी है। इस विवाद ने उसी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए।

 जल्द आएगा अधिकारिक बयान

ट्रस्ट का आधिकारिक बयान जल्द जारी होने वाला है, जिसमें इस्तीफों की स्वीकृति, जांच की स्थिति, भविष्य की योजनाएं और भक्तों को आश्वासन शामिल होगा। उम्मीद है कि यह घटनाक्रम ट्रस्ट को और अधिक मजबूत और पारदर्शी बनाने का अवसर बनेगा। राम मंदिर पूरे भारत की आस्था का केंद्र है। भक्तों की भावनाओं का सम्मान करते हुए किसी भी अनियमितता को सख्ती से निपटाया जाना चाहिए।

चंपत राय का लंबा योगदान राम आंदोलन में अविस्मरणीय रहा है। उनका इस्तीफा नैतिक जिम्मेदारी का प्रतीक माना जा रहा है। अब नई टीम के साथ ट्रस्ट आगे बढ़ेगा। जांच पूरी होने के बाद दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई होगी, जबकि निर्दोषों की प्रतिष्ठा बनी रहेगी।यह पूरा मामला हमें याद दिलाता है कि बड़े धार्मिक संस्थानों में जवाबदेही, पारदर्शिता और निरंतर सुधार कितना जरूरी है। राम मंदिर न केवल एक मंदिर है, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आस्था, एकता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है। ट्रस्ट इस विश्वास को बनाए रखने के लिए हर संभव कदम उठाएगा।

 

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