
सना। यमन में एक बार फिर हालात बेहद तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन और देश के बड़े हिस्से पर काबिज ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के बीच संघर्ष एक नए और खतरनाक स्तर पर पहुंचता दिख रहा है। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने हूती विद्रोहियों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर जरूरत पड़ी तो वह उन पर कड़ी सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।
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ईरानी फ्लाइट के पहुंचने से बढ़ा तनाव
यह बड़ा बयान ऐसे समय पर आया है जब हूती नियंत्रित राजधानी सना में ईरान की एक फ्लाइट पहुंची, जिसे सऊदी विमानों ने रोकने की कोशिश की। इसके जवाब में हूती विद्रोहियों ने तुरंत अपना एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव कर दिया, जिससे ईरान और सऊदी अरब के बीच पहले से चला आ रहा तनाव और भी ज्यादा बढ़ गया है।

गौरतलब है कि, दोनों देशों के बीच लंबे समय से कई मुद्दों को लेकर टकराव की स्थिति बनी हुई है। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को समर्थन देने वाले सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने साफ शब्दों में कहा है कि अगर कोई भी पक्ष सऊदी अरब को निशाना बनाने की कोशिश करता है या यमन की संप्रभुता का उल्लंघन करने का प्रयास करता है, तो गठबंधन इसका जवाब पूरी ताकत और अभूतपूर्व दृढ़ संकल्प के साथ देगा।
गठबंधन का बयान
गठबंधन के प्रवक्ता मेजर-जनरल तुर्की अल-मलिकी ने शनिवार को इस पूरे विवाद पर एक अहम बयान जारी किया। उन्होंने अपने बयान में कहा कि हूती विद्रोहियों की तरफ से सऊदी अरब के खिलाफ जो हालिया धमकियां दी जा रही हैं, वे असल में यमनी जनता के खिलाफ हूतियों की अपनी गतिविधियों से लोगों का ध्यान भटकाने की एक सोची-समझी कोशिश है।
अल-मलिकी ने आगे आरोप लगाते हुए कहा कि, हूती विद्रोही अपनी ही नीतियों की वजह से पैदा हुई आर्थिक तंगी और घरेलू चुनौतियों से जनता का ध्यान हटाने के लिए इस तरह की धमकियां दे रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि, हूतियों की यह नई धमकी क्षेत्र में तनाव को और भड़काने वाली है, जो न सिर्फ क्षेत्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा साबित हो सकती है।
हूतियों ने पहले दी थी धमकी
इस पूरे विवाद की शुरुआत उस वक्त हुई जब हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने शुक्रवार को एक बयान जारी करते हुए सऊदी अरब के हवाई अड्डों, जमीनी और समुद्री ठिकानों को निशाना बनाने की खुली धमकी दे दी थी। सरी ने अपने बयान में यह भी दावा किया कि उनकी सेना ने सऊदी लड़ाकू विमानों के खिलाफ एयर डिफेंस मिसाइलों का इस्तेमाल इसलिए किया, क्योंकि सऊदी अरब ईरान के एक नागरिक विमान को सना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरने से जबरन रोकना चाहता था।
उन्होंने यह भी बताया कि उस विमान में 200 से ज्यादा मरीज और हूती प्रतिनिधिमंडल के सदस्य सवार थे, जो ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए तेहरान जा रहे थे। इस पूरे घटनाक्रम में सबसे अहम बात यह रही कि यह उड़ान करीब एक दशक में सना में उतरने वाला ईरान का पहला ऐसा नागरिक विमान था, जिसकी सार्वजनिक रूप से पुष्टि की गई हो।
हूतियों के बयान पर भड़का गठबंधन
हूती विद्रोहियों के इस बयान के बाद शनिवार को सऊदी गठबंधन के प्रवक्ता अल-मलिकी ने और भी सख्त प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि हूती विद्रोहियों के आक्रामक सैन्य रुख की वजह से अब यमन के अहम नागरिक बुनियादी ढांचे पर संभावित हमलों का खतरा मंडराने लगा है। उन्होंने इस सिलसिले में होदेइदाह, रास ईसा और अस-सलीफ जैसे महत्वपूर्ण बंदरगाहों के साथ-साथ सना अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, बिजली स्टेशनों और औद्योगिक सुविधाओं का भी जिक्र किया, जो इस खतरे की जद में आ सकते हैं।
हूती विद्रोहियों पर गंभीर आरोप
अल-मलिकी ने दोहराते हुए कहा कि अगर सऊदी अरब या उसकी संपत्तियों को निशाना बनाने की कोई भी कोशिश की गई या यमन की संप्रभुता का उल्लंघन करने का प्रयास किया गया, तो गठबंधन इसका जवाब पूरी ताकत और अभूतपूर्व दृढ़ता के साथ देगा। इसके अलावा गठबंधन ने हूती विद्रोहियों पर एक और गंभीर आरोप भी लगाया। गठबंधन के मुताबिक, हूती लगातार दक्षिणी लाल सागर और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य जैसे अहम समुद्री रास्तों पर शिपिंग मार्गों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को निशाना बनाते रहे हैं, जिससे वैश्विक व्यापार पर भी नकारात्मक असर पड़ रहा है।
यमन में बुलाई गई आपातकालीन बैठक
इस बढ़ते तनाव को देखते हुए यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रेसिडेंशियल लीडरशिप काउंसिल ने शुक्रवार को एक आपातकालीन बैठक बुलाई। यह बैठक राष्ट्रपति रशाद अल-अलीमी की अध्यक्षता में आयोजित की गई। इस बैठक में काउंसिल ने ईरान की उस उड़ान की कड़ी निंदा करते हुए इसे यमन की संप्रभुता का सीधा उल्लंघन करार दिया। काउंसिल ने यह भी कहा कि यह पूरी घटना अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के भी खिलाफ है।

बैठक के दौरान काउंसिल ने ईरान की राजधानी तेहरान को साफ शब्दों में चेतावनी दी कि वह इस तरह के कदमों से बचे, जिससे क्षेत्र में तनाव और न बढ़े। इसके साथ ही काउंसिल ने संयुक्त राष्ट्र और क्षेत्रीय सहयोगी देशों से भी आग्रह किया कि वे ऐसे कड़े कदम उठाएं, जिनसे हूती विद्रोहियों को मिलने वाले समर्थन और हथियारों की आपूर्ति पर सख्ती से नियंत्रण किया जा सके।
2015 से चला आ रहा है संघर्ष
गौरतलब है कि, सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने साल 2015 में यमन में सैन्य हस्तक्षेप किया था। उस समय हूती विद्रोहियों ने यमन की राजधानी सना पर पूरी तरह कब्जा जमा लिया था और पश्चिमी देशों के समर्थन वाली सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया था। इसके बाद से यमन में जारी इस लंबे संघर्ष की वजह से बड़ी संख्या में आम नागरिक अपने घरों से विस्थापित हो चुके हैं।
संयुक्त राष्ट्र ने भी यमन की मौजूदा स्थिति को एक बेहद गंभीर मानवीय संकट करार दिया है। ऐसे में ताजा घटनाक्रम यानी ईरान की फ्लाइट को लेकर पैदा हुआ यह नया विवाद, यमन में पहले से चली आ रही जटिल स्थिति को और भी उलझा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर समय रहते कूटनीतिक स्तर पर तनाव को कम करने के प्रयास नहीं किए गए, तो यह टकराव आने वाले समय में और भी बड़ा रूप ले सकता है, जिसका खामियाजा एक बार फिर यमन की आम जनता को ही भुगतना पड़ सकता है।
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