मोबाइल ऐप से बंद हो रहे ई-रिक्शे, चालू करने के नाम पर वसूली, सैकड़ों वाहन हुए लॉक

लखनऊ।  देश के अलग-अलग राज्यों में इन दिनों ई-रिक्शा चलाने वाले चालकों के सामने एक अनोखी और बेहद परेशान करने वाली समस्या खड़ी हो गई है। यह समस्या शुरुआत में उत्तर प्रदेश के नोएडा, ग्रेटर नोएडा और बिजनौर जिलों से सामने आई थी, लेकिन अब इसका दायरा बढ़ते हुए उत्तराखंड और मध्य प्रदेश तक पहुंच चुका है। हैरानी की बात यह है कि इन सभी राज्यों से आ रही शिकायतें एक जैसी ही हैं… चलते-चलते अचानक ई-रिक्शा बंद हो जाना।

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दोबारा चालू करने के लिए वसूलते हैं पैसे

चालकों का आरोप है कि, कुछ शरारती और तकनीकी रूप से माहिर लोग मोबाइल ऐप के माध्यम से ई-रिक्शा में लगी लिथियम बैटरी के बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) से छेड़छाड़ करते हैं और वाहन को रिमोट के जरिए बंद कर देते हैं। इसके बाद यही लोग वाहन को दोबारा चालू कराने के बहाने चालकों से पैसे वसूलते हैं। यह पूरा मामला अब एक संगठित डिजिटल ठगी के रूप में सामने आ रहा है, जिसने प्रशासन की चिंता भी बढ़ा दी है।

नोएडा-ग्रेटर नोएडा में सबसे ज्यादा शिकायतें

नोएडा और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में बड़ी संख्या में ई-रिक्शा चालक इस समस्या से जूझ रहे हैं। चालकों का कहना है कि, उनका वाहन पूरी तरह ठीक-ठाक हालत में होता है, बिना किसी तकनीकी खराबी के, फिर भी सड़क पर चलते-चलते अचानक बंद हो जाता है। ग्रेटर नोएडा वेस्ट के एक चालक रादिल खान ने बताया कि दोपहर के समय उनका ई-रिक्शा अचानक बंद हो गया और कई कोशिशों के बावजूद वह दोबारा चालू नहीं हो सका।

BAT-BMS

इसी तरह एक और चालक राहुल कुमार ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि सूरजपुर से भंगेल की ओर जाते समय हल्द्वानी मोड़ के नजदीक उनका रिक्शा अचानक रुक गया। इस घटना की वजह से उनके साथ सवार यात्रियों को बीच रास्ते में ही उतरना पड़ा, जिससे उन्हें काफी परेशानी उठानी पड़ी।

बिजनौर में सौ से ज्यादा ई-रिक्शे हुए ‘लॉक’

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में यह समस्या और भी गंभीर रूप ले चुकी है। नगीना, बिजनौर और किरतपुर क्षेत्र में बीते कुछ दिनों में सौ से अधिक ई-रिक्शों के अचानक बंद होने की शिकायतें दर्ज कराई जा चुकी हैं। पीड़ित चालकों का आरोप है कि कुछ लोग मोबाइल ऐप के जरिए बैटरी को लॉक कर देते हैं।

खासतौर पर किरतपुर क्षेत्र में यह आरोप लगाया गया है कि वाहन बंद करने वाले लोग ही बाद में उसे दोबारा चालू करने के नाम पर हर बार 200 रुपये तक वसूल रहे हैं। पीड़ित चालकों ने इस मामले में स्थानीय पुलिस को लिखित शिकायतें भी सौंपी हैं, ताकि इस संगठित ठगी पर रोक लगाई जा सके।

उत्तराखंड में चालकों ने किया विरोध प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश के बाद अब उत्तराखंड से भी इसी तरह की शिकायतें सामने आने लगी हैं। काशीपुर और रामनगर क्षेत्र के ई-रिक्शा चालकों ने बताया कि गाड़ी चलाते समय अचानक मोटर और हेडलाइट दोनों बंद हो जाती हैं, जिससे सड़क दुर्घटना का खतरा काफी बढ़ जाता है।

इस समस्या को लेकर रामनगर में करीब 300 ई-रिक्शा चालकों ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किया और स्थानीय प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा। चालकों ने प्रशासन से इस कथित साइबर ठगी पर तुरंत प्रभावी कार्रवाई करने और दोषियों को पकड़ने की मांग की है।

उज्जैन में पुलिस ने पकड़ा संदिग्ध

मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर से भी इसी तरह का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां पुलिस जांच में यह बात सामने आई कि कुछ युवक देर रात सुनसान और वीरान इलाकों को निशाना बनाकर मोबाइल ऐप के जरिए ई-रिक्शा को बंद कर देते थे। इसके बाद वही युवक खुद को तकनीकी विशेषज्ञ बताकर वहां पहुंचते और कुछ ही मिनटों में वाहन चालू करने के बदले चालकों से 200 से 300 रुपये तक वसूल लेते थे।

शिकायत मिलने के बाद उज्जैन पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए क्राइम ब्रांच और स्थानीय थाना पुलिस की एक संयुक्त टीम गठित की। जांच के दौरान पुलिस ने 18 वर्षीय एक संदिग्ध युवक को हिरासत में लेकर उससे गहन पूछताछ शुरू कर दी है।

आखिर क्या है ‘BAT-BMS’ ऐप 

तकनीकी विशेषज्ञों और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दावों के अनुसार, इस पूरे मामले में ‘BAT-BMS’ नामक एक मोबाइल ऐप के इस्तेमाल की बात कही जा रही है। दरअसल, कई सस्ते ई-रिक्शों में चीन निर्मित स्मार्ट लिथियम बैटरियां लगाई जाती हैं, जिनमें ब्लूटूथ आधारित बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) होता है।

BAT-BMS

आरोप यह है कि, यदि इस सिस्टम में उचित सुरक्षा फीचर मौजूद न हों, तो आसपास मौजूद कोई भी व्यक्ति मोबाइल ऐप के जरिए बैटरी से कनेक्ट होकर उसकी पावर सप्लाई को बंद कर सकता है। हालांकि, तकनीकी जानकारों का यह भी कहना है कि, हर बैटरी को इस तरह नियंत्रित कर पाना संभव नहीं होता, यह पूरी तरह उस बैटरी में मौजूद सुरक्षा फीचर्स पर निर्भर करता है, इसीलिए अभी यह पुष्टि नहीं हो पाई है कि, सभी राज्यों में सामने आए मामलों में एक ही तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है।

चालक संगठनों की कार्रवाई की मांग

लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने देशभर के ई-रिक्शा चालकों में गहरी चिंता पैदा कर दी है। कई चालक संगठनों ने प्रशासन, साइबर सेल और परिवहन विभाग से मिलकर इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय और गहन जांच कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने बैटरी निर्माता कंपनियों से भी अपील की है कि वे अपने उत्पादों की सुरक्षा व्यवस्था की गंभीरता से समीक्षा करें।
चालक संगठनों का कहना है कि जब तक इस तरह की डिजिटल ठगी करने वाले गिरोहों के खिलाफ सख्त और त्वरित कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक देशभर के लाखों ई-रिक्शा चालकों की रोजी-रोटी और सुरक्षा दोनों खतरे में बनी रहेंगी।

 

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