
लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन शनिवार, 4 जुलाई से सूबे की राजधानी लखनऊ के दो दिवसीय दौरे पर पहुंच रहे हैं। माना जा रहा है कि उनके आने से अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारियों को औपचारिक रूप से गति मिलेगी। भाजपा के आंतरिक सूत्रों के अनुसार, यह दौरा सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम भर नहीं है, बल्कि इसे पार्टी की “मिशन 2027” रणनीति की विधिवत शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है।
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पदाधिकारियों से करेंगे सीधा संवाद
इस दौरे के दौरान नितिन नबीन प्रदेश भर के जिलाध्यक्षों, सांसदों और विधायकों के साथ सीधा संवाद करेंगे और आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी की रणनीति पर विस्तार से चर्चा करेंगे। पार्टी के भीतर यह दौरा इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि इसी के जरिए कार्यकर्ताओं को आगामी लक्ष्यों के प्रति एकजुट होकर काम करने का स्पष्ट संदेश दिया जाएगा।

अपने प्रवास के दौरान भाजपा अध्यक्ष प्रदेश इकाई के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ एक अहम बैठक करेंगे, जिसमें संगठन की मौजूदा कार्ययोजना की गहन समीक्षा की जाएगी। पार्टी सूत्रों का कहना है कि, इस बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत बनाना, जनसंपर्क अभियानों को नई रफ्तार देना और आगामी चुनाव के लिए ठोस रणनीति तैयार करना होगा।
वास्तविक स्थिति का लेंगे जायजा
इसके अतिरिक्त नितिन नबीन जिला अध्यक्षों, सांसदों और विधायकों से अलग-अलग मुलाकात कर जमीनी स्तर की वास्तविक स्थिति का जायजा भी लेंगे। पार्टी का मानना है कि, इस तरह के सीधे संवाद से न केवल जमीनी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि संगठन की कमजोर कड़ियों की पहचान कर उन्हें समय रहते दुरुस्त करने में भी मदद मिलेगी।
‘शक्ति केंद्र’ संयोजकों का होगा विशेष सम्मेलन
दौरे के दौरान भाजपा अध्यक्ष अवध क्षेत्र के ‘शक्ति केंद्र’ संयोजकों के एक विशेष सम्मेलन को भी संबोधित करेंगे। यह सम्मेलन पार्टी संगठन के सबसे आधारभूत ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। दरअसल, शक्ति केंद्र, बूथ स्तर से ठीक ऊपर का संगठनात्मक ढांचा होता है, जो चुनावी प्रबंधन और मतदाताओं तक सीधी पहुंच बनाने में अहम भूमिका निभाता है। इस सम्मेलन के जरिए पार्टी नेतृत्व की कोशिश रहेगी कि निचले स्तर के कार्यकर्ताओं में सक्रियता बढ़े और चुनावी तैयारियों को व्यावहारिक धरातल पर उतारा जा सके।
42 स्वागत मंच बने
भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष के स्वागत को लेकर पार्टी की प्रदेश इकाई ने व्यापक तैयारियां की हैं। जानकारी के अनुसार, लखनऊ हवाई अड्डे से लेकर पार्टी के राज्य मुख्यालय तक कुल 42 स्वागत मंच तैयार किए गए हैं। इन मंचों पर पार्टी कार्यकर्ता, विभिन्न जनप्रतिनिधि और सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों से जुड़े लोग उनका भव्य स्वागत करेंगे।
लखनऊ महानगर अध्यक्ष आनंद द्विवेदी ने इस संबंध में बताया कि यह दौरा संगठन के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है और पार्टी की कोशिश है कि इसे यादगार और ऐतिहासिक तरीके से आयोजित किया जाए। उन्होंने कहा कि कार्यकर्ताओं में इस दौरे को लेकर गजब का उत्साह देखने को मिल रहा है, और सभी लोग राष्ट्रीय अध्यक्ष के स्वागत की तैयारियों में पूरी शिद्दत से जुटे हुए हैं।
संगठन मंत्री ने की समीक्षा बैठक
दौरे से पहले प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी और संगठन महामंत्री धरमपाल सिंह ने गुरुवार को एक अहम समीक्षा बैठक की, जिसमें दौरे से जुड़ी सभी तैयारियों का जायजा लिया गया। इस बैठक में दोनों वरिष्ठ नेताओं ने कार्यकर्ताओं को स्पष्ट निर्देश दिए कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के आगमन के दौरान कोई भी कमी न रहने पाए।
पंकज चौधरी ने बैठक में कहा कि, राष्ट्रीय अध्यक्ष का यह दौरा संगठन को नई ऊर्जा और स्पष्ट दिशा प्रदान करेगा, जिससे आने वाले चुनावी वर्ष में पार्टी और अधिक प्रभावी ढंग से काम कर सकेगी। वहीं धरमपाल सिंह ने इस यात्रा को संगठनात्मक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण करार देते हुए कहा कि इससे प्रदेश भर के कार्यकर्ताओं को एक स्पष्ट संदेश और लक्ष्य मिलेगा, जिस पर आगे की रणनीति तय होगी।
बांटी जा सकती हैं जिम्मेदारियां
पार्टी के भीतर इस पूरे दौरे को सीधे तौर पर 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि, उत्तर प्रदेश जैसे बड़े और राजनीतिक रूप से संवेदनशील राज्य में संगठन की मजबूती आगामी चुनाव में पार्टी की सफलता के लिए बेहद अहम होगी। यही वजह है कि राष्ट्रीय नेतृत्व शुरुआती चरण से ही राज्य में सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना चाहता है।

माना जा रहा है कि, इस दौरे के दौरान नितिन नबीन संगठन के हर स्तर, राज्य से लेकर बूथ तक, पर सीधा संवाद स्थापित करेंगे, ताकि जमीनी हकीकत को समझते हुए एक व्यावहारिक और प्रभावी रोडमैप तैयार किया जा सके। पार्टी सूत्रों की मानें तो इस यात्रा के जरिए संगठन में मौजूद कमजोरियों को दूर करने के साथ-साथ नए सिरे से जिम्मेदारियां भी बांटी जा सकती हैं।
विपक्ष हुआ एक्टिव
भाजपा के इस दौरे के बाद प्रदेश की सियासी सरगर्मियां और तेज होने की संभावना है। विपक्षी दल भी इस दौरे पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं, क्योंकि 2027 का विधानसभा चुनाव उत्तर प्रदेश की राजनीति के लिहाज से बेहद निर्णायक माना जा रहा है। ऐसे में भाजपा की यह शुरुआती संगठनात्मक कवायद आने वाले महीनों में और तेज होने की उम्मीद है, जिसमें पार्टी हर स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश करेगी।
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