
लखनऊ। UP TET 2026: उत्तर प्रदेश में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) का आयोजन आज से शुरू हो रहा है। यह परीक्षा तीन दिनों तक चलेगी और दो, तीन तथा चार जुलाई को अलग-अलग पालियों में संपन्न होगी। प्रदेश भर के 60 जिलों में करीब 16 लाख अभ्यर्थी इस परीक्षा में बैठेंगे। खास बात यह है कि केवल उत्तर प्रदेश के ही नहीं, बल्कि अन्य राज्यों से भी एक लाख से ज़्यादा अभ्यर्थियों ने इस परीक्षा के लिए पंजीकरण कराया है, जो यह दर्शाता है कि यह परीक्षा राज्य की सीमाओं से आगे बढ़कर एक बड़े भौगोलिक क्षेत्र के अभ्यर्थियों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुकी है। परीक्षा के सफल और सुचारु संचालन के लिए कुल 955 केंद्र तैयार किए गए हैं, जो प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में फैले हुए हैं ताकि अभ्यर्थियों को अपने निकटतम स्थान पर परीक्षा देने की सुविधा मिल सके।
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कई गुना बढ़ी सुरक्षा व्यवस्था
इस बार परीक्षा को लेकर प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां विशेष रूप से चौकन्नी हैं। इसका मुख्य कारण महाराष्ट्र में हाल ही में हुई एक घटना है, जहां टीईटी का प्रश्नपत्र लीक हो गया था। इस घटना के बाद उत्तर प्रदेश में भी सुरक्षा के स्तर को कई गुना बढ़ा दिया गया है। विशेष कार्य बल (एसटीएफ) और विभिन्न खुफिया एजेंसियां मिलकर इस पूरी प्रक्रिया पर नज़र रख रही हैं।

सैकड़ों कोचिंग संस्थानों के संचालकों के फोन नंबरों को निगरानी के दायरे में रखा गया है, ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी या साजिश की पूर्व सूचना मिल सके। इसके साथ ही कुछ संदिग्ध व्यक्तियों से भी पूछताछ की जा रही है। हालांकि, इस बारे में अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह सतर्कता इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि उत्तर प्रदेश में पहले भी इस तरह की घटनाएं घट चुकी हैं।
खुफिया एजेंसियां मुस्तैद
गौरतलब है कि, वर्ष 2021 में जब परीक्षा नियामक प्राधिकारी कार्यालय की ओर से टीईटी परीक्षा कराई गई थी, तब उसका प्रश्नपत्र लीक हो गया था। उस घटना ने न केवल लाखों अभ्यर्थियों के भविष्य को प्रभावित किया था, बल्कि परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े कर दिए थे। इसी कड़वे अनुभव को ध्यान में रखते हुए इस बार प्रशासन कोई कसर नहीं छोड़ना चाहता। यही वजह है कि एसटीएफ और खुफिया एजेंसियां इस बार पूरी तरह मुस्तैद हैं और परीक्षा शुरू होने से पहले ही निगरानी तंत्र को सक्रिय कर दिया गया है।
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुमार ने इस संबंध में आश्वासन दिया है कि परीक्षा को पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता के साथ संपन्न कराया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रशासन इस बात के प्रति पूरी तरह सजग है कि किसी भी योग्य अभ्यर्थी के साथ अन्याय न हो और परीक्षा प्रक्रिया में किसी प्रकार की अनियमितता की गुंजाइश न रहे।
पांच पालियों में होगी परीक्षा
टीईटी परीक्षा का आयोजन इस बार पांच अलग-अलग पालियों में किया जाएगा, जो तीन दिनों में फैली हुई हैं। दो जुलाई को उच्च प्राथमिक स्तर की परीक्षा आयोजित की जाएगी। इसके अगले दिन, यानी तीन जुलाई को दो पालियों में परीक्षा होगी—पहली पाली में उच्च प्राथमिक स्तर की और दूसरी पाली में प्राथमिक स्तर की परीक्षा ली जाएगी।

इसके बाद चार जुलाई को पहली पाली में प्राथमिक स्तर की परीक्षा के साथ यह पूरी प्रक्रिया संपन्न होगी। इस प्रकार का विभाजन इसलिए किया गया है ताकि अलग-अलग स्तर के अभ्यर्थियों को पर्याप्त समय और संसाधन मिल सकें और परीक्षा केंद्रों पर अनावश्यक भीड़ या दबाव न बने।
अभ्यर्थियों के आंकड़ों पर एक नज़र
इस परीक्षा में कुल मिलाकर 19 लाख 94 हज़ार 661 अभ्यर्थी शामिल होंगे। इनमें से 17 लाख 67 हज़ार 180 अभ्यर्थी उत्तर प्रदेश के निवासी हैं, जबकि शेष 2 लाख 27 हज़ार 481 अभ्यर्थी अन्य राज्यों से हैं। यह आंकड़ा साफ दिखाता है कि, उत्तर प्रदेश की यह परीक्षा केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि अंतर-राज्यीय स्तर पर भी बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को आकर्षित करती है।
इन अभ्यर्थियों में एक दिलचस्प विभाजन यह भी है कि इसमें 1 लाख 85 हज़ार 791 ऐसे अभ्यर्थी हैं जो पहले से ही सेवारत शिक्षक हैं, यानी वे पहले से शिक्षण कार्य से जुड़े हुए हैं और अपनी योग्यता को और मजबूत करने के लिए इस परीक्षा में बैठ रहे हैं। वहीं दूसरी ओर 18 लाख 8 हज़ार 870 ऐसे नए अभ्यर्थी हैं जो पहली बार इस क्षेत्र में करियर बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं।
स्तर के हिसाब से देखा जाए तो प्राथमिक स्तर के लिए 3 लाख 88 हज़ार 179 अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है, जबकि उच्च प्राथमिक स्तर के लिए यह संख्या 8 लाख 16 हज़ार 436 है। इसके अतिरिक्त 3 लाख 95 हज़ार 23 अभ्यर्थी ऐसे भी हैं जिन्होंने दोनों ही स्तरों प्राथमिक और उच्च प्राथमिक के लिए आवेदन किया है, जिससे उनके सफलता की संभावनाएं दोगुनी हो जाती हैं।
जब बात सबसे अधिक परीक्षा केंद्रों और अभ्यर्थियों वाले जिलों की आती है, तो इस सूची में वाराणसी सबसे पहले आता है। इसके अलावा प्रयागराज, लखनऊ, गोरखपुर, कानपुर नगर, मेरठ, मऊ, मुरादाबाद, आगरा और जौनपुर जैसे जिले भी इस सूची में शामिल हैं। ये सभी जिले प्रदेश के प्रमुख शहरी और शैक्षणिक केंद्र माने जाते हैं, इसलिए यहां अभ्यर्थियों की संख्या भी स्वाभाविक रूप से अधिक है।
लद्दाख में एक अभ्यर्थी देगा टेस्ट
आंकड़ों पर गौर करें तो जौनपुर जिले से इस परीक्षा के लिए सबसे अधिक 67,597 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया है, जो किसी भी अन्य जिले या राज्य की तुलना में सबसे बड़ी संख्या है। इसके ठीक विपरीत, लद्दाख से केवल एक अभ्यर्थी ने पंजीकरण कराया है, जो सूची में सबसे कम है।

अन्य राज्यों की बात करें तो बिहार से 31,766 अभ्यर्थी इस परीक्षा में शामिल होंगे, जो उत्तर प्रदेश के बाहर से आने वाले अभ्यर्थियों में सबसे बड़ी संख्या है। इसके बाद मध्य प्रदेश से 20,375, दिल्ली से 16,411 और राजस्थान से 12,774 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण कराया है। इसके अतिरिक्त हरियाणा से 5,748, झारखंड से 5,635, उत्तराखंड से 2,710 और पश्चिम बंगाल से 1,909 अभ्यर्थी इस परीक्षा में भाग लेंगे।
इन आंकड़ों से यह साफ पता चलता है कि उत्तर प्रदेश की टीईटी परीक्षा न केवल राज्य के भीतर, बल्कि पूरे उत्तर भारत में शिक्षक बनने की चाह रखने वाले युवाओं के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर मानी जाती है। प्रशासन की कोशिश यही है कि इतने बड़े स्तर पर आयोजित होने वाली इस परीक्षा को बिना किसी विवाद और गड़बड़ी के सफलतापूर्वक संपन्न कराया जाए, ताकि अभ्यर्थियों की मेहनत का उचित मूल्यांकन हो सके और शिक्षा व्यवस्था में योग्य शिक्षकों का चयन सुनिश्चित हो सके।
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