
लखनऊ। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विश्व पर्यावरण दिवस के भाषण में दिए गए ‘टोंटी’ वाले तंज पर तेज पलटवार किया है। अखिलेश ने इसे व्यक्तिगत हमला बताते हुए सीएम योगी के बचपन, किशोरावस्था और राजनीतिक उदय पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर विस्तृत पोस्ट में विज्ञान और मनोविज्ञान के हवाले से तीखा जवाब दिया।
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योगी का बयान
दरअसल, विश्व पर्यावरण दिवस यानी 5 जून को सीएम योगी आदित्यनाथ ने जल संरक्षण पर जोर देते हुए कहा था, हम हर घर नल जल योजना को आगे बढ़ा रहे हैं, लेकिन कोई टोंटी चोरी कर ले रहा है।

कोई टोंटी खुली छोड़ दे रहा है। इस दौरान सीएम मंद-मंद मुस्कुराते भी नजर आए। उनके इस बयान को राजनीतिक विश्लेषकों और समाजसेवी कार्यकर्ताओं ने तुरंत अखिलेश यादव पर लगे पुराने ‘टोंटी चोरी’ के आरोपों से जोड़कर देखा। योगी ने भूमाफिया, वन माफिया, खनन माफिया और स्मगलरों के खिलाफ सजग रहने की भी अपील की।
अखिलेश का पलटवार
सीएम के इस तंज का जवाब देते हुए अखिलेश यादव ने लिखा, विज्ञान कहता है कि, किशोरावस्था में किया गया वनस्पति का अत्यधिक सेवन व्यक्ति के बोलने और समझने की क्षमता को प्रभावित करता है। वहीं, मनोविज्ञान कहता है कि, बचपन और किशोरावस्था के अनुभव व्यक्ति की भाषा, व्यवहार और व्यक्तित्व पर गहरी छाप छोड़ते हैं। वही संस्कार आगे चलकर सार्वजनिक जीवन में भी झलकते हैं। सीएम के ‘करप्ट माउथ’ होने की वजह शायद यही है। अखिलेश ने आगे सीएम योगी के पूर्व जीवन और राजनीतिक उदय पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि जिन्हें सीएम का इतिहास नहीं पता, उनके लिए यह दबाई गई जानकारी है।
अखिलेश ने उठाए ये सवाल
1994 के आसपास अजय सिंह बिष्ट (योगी आदित्यनाथ) अपने पारिवारिक परिवहन व्यवसाय में सक्रिय थे। उनके पास तीन बसें और एक ट्रक था। संभवतः उन्होंने यह भाषिक अभद्रता उसी दौर में डग्गामार वाहन चलवाते समय सीखी।
अजय सिंह बिष्ट के पिता आनंद सिंह बिष्ट और गोरखनाथ मठ के पूर्व महंत अवैद्यनाथ जी (कृपाल सिंह बिष्ट) रिश्ते में भाई बताए जाते हैं। बाद में उनके चाचा ने उन्हें मठ में बुलाया और महंत अवैद्यनाथ ने अपने भतीजे को कुछ ही वर्षों में मठ का उत्तराधिकारी बना दिया।
अखिलेश यादव ने पूछा, “उत्तराधिकारी के रूप में उन्हीं को क्यों चुना गया? क्या यह केवल योग्यता का निर्णय था या रिश्तेदारी का भी प्रभाव था? पहले मठ की गद्दी मिली, फिर कुछ ही वर्षों में लोकसभा की सीट भी। स्पष्ट किया जाए कि मठ में महंत चुनने के लिए क्या कोई औपचारिक चुनाव प्रक्रिया हुई थी?”
उन्होंने आगे तंज कसते हुए कहा, डग्गामार वाहन चलवाने वाला व्यक्ति क्या 4 वर्षों में ही इतना योग्य हो गया? यदि नहीं, तो क्या इसे पक्षपाती परिवारवाद नहीं कहा जाना चाहिए? पद और परिधान रिश्तों और समय की मदद से मिल सकते हैं, पर भाषा और व्यवहार नहीं।
तेज हुई जुबानी जंग
यह विवाद उत्तर प्रदेश की सत्तारूढ़ भाजपा और मुख्य विपक्षी समाजवादी पार्टी के बीच तीखी शब्द जंग को फिर से जीवंत कर गया है। योगी आदित्यनाथ का बयान भले ही पर्यावरण संरक्षण पर केंद्रित था, लेकिन ‘टोंटी चोरी’ वाला वाक्यांश विपक्ष के लिए सुनहरा मौका बन गया। अखिलेश यादव ने इसे मौके का फायदा उठाते हुए न केवल व्यक्तिगत जवाब दिया, बल्कि योगी के संन्यासी से सांसद और फिर मुख्यमंत्री बनने वाले सफर पर भी सवाल उठाए। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि, अखिलेश यादव का यह हमला योगी की साधु छवि को चुनौती देने की कोशिश है।
उन्होंने योगी के पारिवारिक और मठ से जुड़े रिश्तों को उठाकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि उनका उदय योग्यता से ज्यादा रिश्तेदारी पर आधारित था।
अखिलेश पर लगा था टोंटी चोरी का आरोप
गौरतलब है कि अखिलेश यादव पर पूर्व में टोंटी चोरी का आरोप लगा था, जिसे उन्होंने हमेशा सिरे से खारिज किया है। योगी का हालिया बयान इसी पुराने विवाद की याद दिलाता है। वहीं, योगी आदित्यनाथ 1998 में पहली बार लोकसभा सांसद बने थे और 2014 से गोरखपुर से सांसद हैं। 2017 में वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने।

अखिलेश यादव का यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। समर्थक इसे अखिलेश का दमदार जवाब बता रहे हैं, जबकि भाजपा कार्यकर्ता इसे अपमानजनक और घटिया हमला करार दे रहे हैं।
तेज हुआ आरोप-प्रत्यारोप का दौर
इस पूरे प्रकरण से साफ है कि, 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू हो चुकी है। योगी आदित्यनाथ विकास, कानून-व्यवस्था और सांस्कृतिक मुद्दों पर हमला बोल रहे हैं, जबकि अखिलेश यादव सामाजिक न्याय, परिवारवाद विरोध और व्यक्तिगत हमलों के जरिए जवाबी हमला कर रहे हैं।
अखिलेश ने अपने पोस्ट के अंत में स्पष्ट संदेश दिया कि बाहरी चमक-दमक या पद कितना भी बड़ा हो जाए, लेकिन व्यक्ति की भाषा और व्यवहार उसके असली चरित्र को दर्शाते हैं। यह विवाद आने वाले दिनों में और तीखा हो सकता है। दोनों ही पार्टियां इसे अपने-अपने तरीके से भुनाने की कोशिश करेंगी। योगी सरकार जल संरक्षण और पर्यावरण को अपनी प्राथमिकता बता रही है, वहीं सपा इसे ‘टोंटी राजनीति’ कहकर विपक्षी हमला बोल रही है।
अखिलेश यादव का पलटवार एक बार फिर साबित करता है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में व्यक्तिगत हमले और पुरानी बातों को खोदकर निकालना आम बात है। अब देखना यह होगा कि सीएम योगी इस पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं। क्या वे चुप रहेंगे या फिर अखिलेश को करारा जवाब देंगे?
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