इजरायल ने हमास और हिजबुल्लाह पर बरसाए बम, 3200 से ज्यादा लोगों की मौत

 तेल अवीव। मिडिल ईस्ट में चल रहा गतिरोध दिन ब दिन बढ़ता जा रहा है। इजरायल-हमास युद्ध, लेबनान की सीमा पर हिजबुल्लाह के साथ जारी झड़पें, ईरान समर्थित गुटों की सक्रियता और अमेरिका-इजरायल के साथ ईरान का प्रत्यक्ष टकराव अब पूरे क्षेत्र को एक बड़े संघर्ष के कगार पर ले आया है। इन घटनाक्रमों ने न केवल स्थानीय स्तर पर मानवीय संकट को बढ़ाया है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, नौवहन मार्गों और आर्थिक स्थिरता को भी प्रभावित किया है।

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भारत ने की सयंम बरतने की अपील

भारत के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है। क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक काम करते हैं, भारत ईरान और खाड़ी देशों से ऊर्जा आयात करता है और आर्थिक-सुरक्षा हित जुड़े हुए हैं। भारतीय विदेश मंत्रालय ने बार-बार सभी पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान की अपील की है, लेकिन हालिया हमलों ने शांति की किसी भी उम्मीद पर पानी फेर दिया है।

 गाजा और लेबनान पर इजराइल पर हमला

इजरायल ने गाजा पट्टी में एक बड़ा हमला करके हमास की सैन्य शाखा के प्रमुख मोहम्मद दीफ (मोहम्मद ओदेह) को निशाना बनाया है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतान्याहू ने खुद इसकी पुष्टि करते हुए कहा, हमने गाजा में हमास की सैन्य शाखा के नेता और 7 अक्टूबर 2023 के नरसंहार के मुख्य आर्किटेक्ट मोहम्मद दीफ को मार गिराया है। हम उन सब तक पहुंचेंगे जो इजरायल के खिलाफ आतंक फैलाते हैं। इजरायल इस कार्रवाई को आतंकवाद के खिलाफ अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रतीक बता रहा है।

Israel Hamas War

विशेषज्ञों का मानना है कि, दीफ जैसे उच्चस्तरीय नेता की मौत से हमास की कमान व्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा। हालांकि, इस हमले से गाजा में नागरिकों की मौतें बढ़ने और मानवीय संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है। हमास ने इसे शांति वार्ता को जानबूझकर बाधित करने वाली कार्रवाई करार दिया है। गाजा में पहले से ही भारी तबाही और विस्थापितों की समस्या बनी हुई है, ऐसे में नया हमला राहत कार्यों को और मुश्किल बना रहा है।

लेबनान सीमा पर तनाव

मंगलवार को इजरायल के पूरे उत्तरी क्षेत्र में कई बार सायरन बज उठे। लेबनान से हिजबुल्लाह के रॉकेट और ड्रोन हमलों के जवाब में इजरायली सेना पूरी तरह सतर्क हो गई है। सूत्रों के अनुसार, इजरायल ने येलो लाइन पार जाकर लेबनान में जमीनी कार्रवाई तेज कर दी है और सैकड़ों ठिकानों पर हमले किए हैं। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च से अब तक 3200 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं। हिजबुल्लाह की तरफ से भी इजरायली ठिकानों पर हमले जारी हैं। दोनों तरफ से लगातार गोलीबारी और मिसाइल हमलों ने सीमा क्षेत्र को जंग के मैदान में बदल दिया है। यह संघर्ष ईरान समर्थित हिजबुल्लाह की क्षमता को कमजोर करने का इजरायली प्रयास लगता है, जो पूरे क्षेत्रीय समीकरण को प्रभावित कर रहा है।

जल्द हो सकती है डील

दो दिन पहले अमेरिका ने ईरान के दक्षिणी हिस्से में मिसाइल साइटों और माइन्स बिछाने वाले जहाजों पर हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इसे अपने सैनिकों की सुरक्षा के लिए आत्मरक्षा की कार्रवाई बताया। ईरान ने इसे युद्धविराम का उल्लंघन करार दिया और जवाबी कार्रवाई की धमकी दी, हालांकि दोनों पक्ष अभी भी युद्धविराम बनाए रखने का दावा कर रहे हैं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कुछ दिन पहले कहा था कि ईरान के साथ समझौता काफी हद तक तैयार हो चुका है, बस अंतिम रूप देने में समय लग रहा है। विदेश मंत्री मार्को रुबियो का कहना है कि डील कुछ दिनों में हो सकती है, लेकिन कोई जल्दबाजी नहीं की जा रही। प्रस्तावित समझौते में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलना, ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर सख्त अंकुश और प्रतिबंधों में कुछ राहत शामिल हो सकती है। ईरान ने प्रगति स्वीकार की है, लेकिन कहा कि डील अभी इमिनेंट नहीं है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि या तो ग्रेट डील होगी या फिर कोई डील नहीं होगी।

 वैश्विक स्तर पर दिखा तनाव

पश्चिम एशिया में कई मोर्चों पर एक साथ तनाव होने से वैश्विक स्तर पर असर दिख रहा है। तेल की कीमतें बढ़ रही हैं, लाल सागर और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण नौवहन मार्ग प्रभावित हो रहे हैं और मानवीय संकट दिन-प्रतिदिन गहराता जा रहा है। लाखों लोग विस्थापित हो चुके हैं, अस्पतालों में दवाओं और खाने-पीने की भारी कमी है। भारत इस पूरे संकट को करीब से देख रहा है।

Israel Hamas War

इजरायल, यूएई, सऊदी अरब और ईरान के साथ भारत के संतुलित संबंध हैं। क्षेत्रीय स्थिरता भारत की ऊर्जा सुरक्षा, भारतीय प्रवासियों की सुरक्षा और आर्थिक हितों के लिए जरूरी है। ब्रिक्स जैसे मंचों पर भारत ने बार-बार चिंता जताई है और संवाद व शांतिपूर्ण समाधान की वकालत की है।

फिर अस्थिर हुआ पश्चिम एशिया

विशेषज्ञों का मानना है कि, अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत सकारात्मक संकेत दे रही है, लेकिन क्षेत्रीय गुटों (हमास, हिजबुल्लाह आदि) की सक्रियता और गहरी अविश्वास की दीवार चुनौती बनी हुई है। इजरायल का रुख स्पष्ट है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जा सकता है, जबकि ईरान समर्थित गुट इसे क्षेत्रीय प्रभुत्व की लड़ाई मानते हैं।

गाजा से लेकर लेबनान तक और ईरान तक फैली इस जंग ने मिडिल ईस्ट को फिर से अस्थिरता के चक्र में धकेल दिया है। फिलहाल कूटनीतिक प्रयास जारी हैं, लेकिन मैदान में हिंसा थमने के कोई स्पष्ट संकेत नहीं दिख रहे। भारत समेत दुनिया के कई देश उम्मीद कर रहे हैं कि सभी पक्ष संयम बरतें और बड़े युद्ध को टाला जा सके। शांति की राह अभी लंबी और कठिन नजर आ रही है। क्षेत्रीय स्थिरता न सिर्फ स्थानीय लोगों के लिए, बल्कि पूरी दुनिया की आर्थिक और सुरक्षा व्यवस्था के लिए बेहद जरूरी है।

 

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