
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में प्रीपेड स्मार्ट मीटर अब जी का जंजाल बनता जा रहा है। हालांकि, सरकार और बिजली विभाग भले ही स्मार्ट मीटरों को लेकर बड़े-बड़े दावे कर रहे हों, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। शनिवार को राजधानी के अलग-अलग इलाकों में आयोजित बिजली शिविरों में उपभोक्ताओं का गुस्सा सातवें आसमान पर देखने को मिला। सबसे हैरान करने वाला और सनसनीखेज मामला तालकटोरा पावर हाउस के शिविर में सामने आया, जहां एक उपभोक्ता के प्रीपेड मीटर ने कुछ ही मिनटों के भीतर पूरे 990 रुपये का बैलेंस साफ कर दिया।
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विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल
इस घटना के बाद शिविर में जमकर हंगामा हुआ और उपभोक्ताओं ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। आलम यह रहा कि, मौके पर मौजूद आला अधिकारियों को मामले को शांत कराने के लिए तुरंत मीटर बदलने के आदेश जारी करने पड़े। पूरा मामला ऐशबाग हाइट्स के रहने वाले उपभोक्ता अब्दुल रशीद से जुड़ा हुआ है। अब्दुल रशीद ने तालकटोरा पावर हाउस में आयोजित बिजली शिविर में पहुंचकर अधिकारियों के सामने अपनी आपबीती सुनाई और विभाग की इस कथित स्मार्ट व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी।

पीड़ित उपभोक्ता ने बताया कि, शनिवार की सुबह अचानक उनके घर के प्रीपेड मीटर का बैलेंस पूरी तरह खत्म हो गया था, जिसके चलते घर की बिजली गुल हो गई। इसके बाद उन्होंने बिना किसी देरी के तत्काल एक हजार रुपये का ऑनलाइन रिचार्ज कराया। रिचार्ज सफल होने के बाद उनके मीटर में 990 रुपये का बैलेंस दिखाने लगा और घर की बिजली वापस आ गई, लेकिन अब्दुल रशीद की यह राहत कुछ ही पलों की मेहमान साबित हुई।
चंद मिनट में खत्म हुआ 990 रूपये का बैलेंस
रिचार्ज होने के महज चंद मिनट के भीतर ही उनके घर की बत्ती दोबारा गुल हो गई और चारों तरफ अंधेरा छा गया, जब उन्होंने हैरान होकर अपना मोबाइल चेक किया, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उनके मोबाइल पर मैसेज आया था कि, उनका करंट बैलेंस शून्य हो चुका है।
इस अजीबोगरीब और चौंकाने वाली घटना से परेशान होकर जब अब्दुल रशीद बिजली शिविर पहुंचे, तो उनका गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने अधिकारियों के सामने जमकर हंगामा किया और पूछा कि आखिर चंद मिनटों के भीतर बिना किसी भारी लोड के 990 रुपये का बैलेंस कैसे गायब हो सकता है?
उपभोक्ता के इस उग्र रूप और हंगामे को देखकर शिविर में मौजूद अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। मौके पर मौजूद अधीक्षण अभियंता मुकेश त्यागी ने किसी तरह उपभोक्ता को समझा-बुझाकर शांत कराया। मामले की गंभीरता को देखते हुए उन्होंने तुरंत तकनीकी गड़बड़ी को स्वीकार किया और तत्काल स्मार्ट प्रीपेड मीटर को बदलने के कड़े निर्देश जारी किए। विभागीय मुस्तैदी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हंगामा बढ़ने के डर से महज दो घंटे के भीतर ही पीड़ित के घर का मीटर बदल दिया गया।
3 किलो वाट के लोड पर 5 किलो वाट का चार्ज
तालकटोरा शिविर में सिर्फ अब्दुल रशीद ही नहीं, बल्कि कई अन्य उपभोक्ता भी बिजली विभाग के कारनामों से त्रस्त नजर आए। करेहटा के रहने वाले राजेंद्र कुमार त्रिपाठी ने अधिकारियों के सामने अपनी लिखित शिकायत दर्ज कराई कि, विभाग की लापरवाही का खामियाजा उन्हें पिछले छह महीनों से भुगतना पड़ रहा है।
राजेंद्र कुमार ने बताया कि उनका स्वीकृत कनेक्शन केवल तीन किलोवाट का है, लेकिन पिछले छह महीने से उनके बिजली बिल में जबरन पांच किलोवाट का लोड दिखाकर चार्ज वसूला जा रहा है। इतना ही नहीं, हर महीने बिल में 220 रुपये की पेनाल्टी भी जोड़कर आ रही है। बार-बार चक्कर काटने के बाद भी जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो वे शिविर में पहुंचे।
इस मामले में अधिकारियों ने जांच की और पाया कि तकनीकी त्रुटि के कारण ऐसा हो रहा था, जिसके बाद समस्या का समाधान किया गया। शिविर के नोडल अधिकारी और एसडीओ विनय कुमार विमल ने बताया कि, अकेले इस शिविर में नए कनेक्शन, मीटर की खराबी और बिलिंग से जुड़ी कुल 48 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 10 मामलों का मौके पर ही त्वरित निस्तारण कर दिया गया, जबकि शेष मामलों को समयबद्ध तरीके से हल करने का आश्वासन दिया गया है।
ठगा महसूस कर रहे उपभोक्ता
लखनऊ के जानकीपुरम जोन स्थित जीपीआरए उपकेंद्र में आयोजित बिजली शिविर की स्थिति भी कुछ अलग नहीं थी। यहां तो जैसे स्मार्ट मीटर से पीड़ित उपभोक्ताओं का मेला लग गया था। शिविर में पहुंचे 38 अलग-अलग उपभोक्ताओं ने सीधे तौर पर स्मार्ट मीटर से संबंधित गंभीर समस्याएं दर्ज कराईं। उपभोक्ताओं का सबसे बड़ा आरोप यह था कि, जब से ये नए मीटर लगे हैं, तब से पारदर्शिता पूरी तरह खत्म हो गई है।

लोगों ने बताया कि पहले बिजली बिल जेनरेट होते ही उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर बकायदा मैसेज आता था, जिससे उन्हें पता रहता था कि, कितनी यूनिट खर्च हुई है और कितना बिल आया है, लेकिन अब यह मैसेज आना पूरी तरह से बंद हो गया है, जिससे उपभोक्ता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। कई उपभोक्ताओं ने शिविर में मौजूद अधिकारियों से मांग की कि उनके मीटर का सिम कार्ड बदला जाए या फिर इस स्मार्ट मीटर को हटाकर पुराना मीटर ही वापस लगा दिया जाए।
इसी शिविर में आनंद चटर्जी और दीपक कुमार नामक उपभोक्ताओं ने शिकायत की कि उनके पुराने मीटरों में नो रीडिंग की समस्या आ रही है, जिसके कारण उनका बिल सही तरीके से नहीं बन पा रहा है।
11 हजार रूपये आया मासिक बिल
ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों की बात करें तो वहां बिजली विभाग के मीटर रीडरों और सॉफ्टवेयर की लापरवाही और भी बड़े पैमाने पर सामने आई। मलिहाबाद के ओल्ड उपकेंद्र अमानीगंज में आयोजित बिजली शिविर में कुल 22 पीड़ित अपनी फरियाद लेकर पहुंचे, जिनमें से 18 की समस्याओं का मौके पर निस्तारण करने का दावा विभाग ने किया है। यहां मुजीबुर्रहमान नामक उपभोक्ता का मामला बेहद चौंकाने वाला था।
मीटर रीडर की गलत रीडिंग की वजह से उनका मासिक बिजली बिल सीधे 11 हजार रुपये थमा दिया गया था। जब अधिकारियों ने सॉफ्टवेयर और मीटर की दोबारा जांच की, तो पता चला कि वास्तविक बिल मात्र 2500 रुपये था, जिसके बाद बिल को संशोधित किया गया। इसी तरह कलीमुल्ला खान नाम के एक अन्य उपभोक्ता ने भी विभाग की बड़ी लापरवाही को उजागर किया।
कलीमुल्ला ने बताया कि गलत मीटर रीडिंग के कारण उनके घर का बिल भारी-भरकम 28,000 रुपये भेज दिया गया था, जिसे देखकर उनके पूरे परिवार के होश उड़ गए थे। शिविर में जब इस मामले की फाइल खुली और री-रीडिंग की गई, तो विभाग को अपनी गलती माननी पड़ी और बिल को आधा करके 14 हजार रुपये किया गया, जिसे उपभोक्ता ने मौके पर जमा किया। इसके अलावा निखिल सैनी, रामू और मुनेश कुमार जैसे कई अन्य ग्रामीणों ने भी जरूरत से ज्यादा और गलत बिल आने की लिखित शिकायतें दर्ज कराईं।
मानसिक प्रताड़ना का सबब बना प्रीपेड मीटर
राजधानी लखनऊ के अलग-अलग कोनों से आई ये खबरें साफ तौर पर इशारा करती हैं कि, बिजली विभाग का स्मार्ट होने का दावा फिलहाल कागजी ज्यादा और जमीनी कम लग रहा है, जिस तकनीक को उपभोक्ताओं की सहूलियत और विभाग के घाटे को कम करने के लिए लाया गया था, वह आज जनता के लिए मानसिक प्रताड़ना का सबब बन चुकी है।
कभी मिनटों में सैकड़ों रुपये का बैलेंस गायब हो जाना, कभी बिना लोड के पेनाल्टी लग जाना और कभी हजारों रुपये का फर्जी बिल आ जाना यह साबित करता है कि, सिस्टम में अभी भी बड़े सुधार की गुंजाइश है। हालांकि विभाग के आला अधिकारियों का कहना है कि इन शिविरों के माध्यम से वे जनता की हर समस्या को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन उपभोक्ताओं का कहना है कि जब तक इस पूरी प्रणाली को पारदर्शी और त्रुटिहीन नहीं बनाया जाता, तब तक आम जनता को इस तरह की दिक्कतों से निजात मिलना नामुमकिन है।
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