यूपी में कुदरत का कहर: 130 kmph की रफ्तार से आए तूफान ने उजाड़े घर-पेड़, 117 जिंदगियों को भी लील गया

लखनऊ। यूपी में बुधवार का दिन काल बनकर आया, जब प्रकृति के भीषण तांडव ने समूचे प्रदेश को हिला कर रख दिया। चक्रवात जैसी भयावहता लिए 130 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली विनाशकारी हवाओं, धूल भरी आंधी और आकाशीय बिजली ने देखते ही देखते मौत का ऐसा मंजर बिछाया कि, अब तक 117 मासूम जिंदगियां काल के गाल में समा चुकी हैं। यह केवल एक मौसमी बदलाव नहीं था, बल्कि एक ऐसी प्राकृतिक आपदा थी जिसने प्रयागराज से लेकर मिर्जापुर तक तबाही की अमिट इबारत लिख दी। सैकड़ों घर जमींदोज हो गए, बिजली के खंभे तिनकों की तरह बिखर गए और किसानों की महीनों की मेहनत मिट्टी में मिल गई।

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सीएम ने जताया दुख

सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस त्रासदी पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए तत्काल राहत कार्यों के निर्देश दिए हैं और मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे का ऐलान किया है, लेकिन इस जख्म की भरपाई करना फिलहाल नामुमकिन नजर आ रहा है।

CM Yogi

बुधवार की दोपहर जब लोग अपने दैनिक कार्यों में व्यस्त थे, तभी आसमान में अचानक छाई काली घटाओं ने खतरे का संकेत दिया। राहत आयुक्त कार्यालय से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, यह तूफान पिछले कई वर्षों का सबसे भयावह मंजर था। चक्रवाती स्तर तक पहुंची हवाओं की गति ने बरेली और प्रयागराज जैसे जिलों में 130 किलोमीटर प्रति घंटे का आंकड़ा छू लिया।

तूफान की तीव्रता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मरने वाले 117 लोगों में से 113 की जान मकान ढहने, दीवारों के गिरने और पेड़ों की चपेट में आने से हुई, जबकि 4 लोग आकाशीय बिजली की भेंट चढ़ गए। इस आपदा ने केवल इंसानों को ही नहीं, बल्कि बेजुबान पशुओं को भी नहीं बख्शा। अब तक 177 से अधिक मवेशियों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा आघात है।

प्रयागराज और मिर्जापुर इस प्राकृतिक आपदा का मुख्य केंद्र रहे। अकेले प्रयागराज में 23 लोगों ने अपनी जान गंवाई, जहां आंधी इतनी भीषण थी कि, विशालकाय बरगद और पीपल के पेड़ भी जड़ से उखड़ गए। मिर्जापुर में भी स्थिति हृदयविदारक रही, जहां 19 लोगों की मौत की खबर ने पूरे जिले को शोक में डुबो दिया।

धूल भरी आंधी से शून्य हुई दृश्यता

इसके अलावा संत रविदास नगर में 16 और फतेहपुर में 11 मौतों ने इस आपदा की व्यापकता को दर्शाया है। रायबरेली, उन्नाव और बदायूं जैसे जिले भी इस विनाशकारी हवाओं के थपेड़ों से अछूते नहीं रहे, जहां मलबे में दबने से 79 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिनका इलाज विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है।

मौसम विभाग ने इस आपदा को असाधारण करार दिया है। विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ और स्थानीय चक्रवाती परिसंचरण के बीच हुए जबरदस्त टकराव ने इस विनाशकारी प्रणाली को जन्म दिया। हवा की जो गति तटीय इलाकों में आए चक्रवातों के दौरान देखी जाती है, वैसी ही स्थिति उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों में पैदा हो गई थी।

धूल भरी इस आंधी ने दृश्यता को शून्य कर दिया, जिससे सड़कों पर वाहन आपस में टकरा गए और लोग सुरक्षित स्थानों तक नहीं पहुंच सके। मौसम विज्ञानियों के अनुसार, भीषण गर्मी के बाद नमी और हवा के कम दबाव के क्षेत्र ने इस तूफान को सुपर-सेल जैसी ताकत दी, जिसके परिणामस्वरूप ओलावृष्टि और बिजली गिरने की घटनाएं एक साथ हुईं।

इस तबाही ने उत्तर प्रदेश के अन्नदाता की कमर तोड़कर रख दी है। अप्रैल-मई का यह समय आम की फसल के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है, लेकिन इस तूफान ने बागों के बाग उजाड़ दिए हैं। लखनऊ के मलिहाबाद से लेकर पश्चिमी यूपी के बागों तक, आम की कच्ची फसल जमीन पर बिछ गई है, जिससे बागवानों को करोड़ों का नुकसान हुआ है। वहीं, जिन इलाकों में गेहूं की कटाई शेष थी या कटी हुई फसल खेतों में रखी थी, वहां बारिश और धूल ने सब कुछ बर्बाद कर दिया।

मुख्यमंत्री ने संभाली कमान

पशुपालन पर निर्भर परिवारों के लिए 177 पशुओं की मौत एक अपूरणीय क्षति है। ग्रामीण अंचल में घर के साथ-साथ आजीविका के साधनों का छिन जाना एक दोहरी मार की तरह है। करीब 330 घरों के पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने की रिपोर्ट है, जिससे हजारों लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हो गए हैं। इस संकट की घड़ी में सीएम योगी आदित्यनाथ ने संवेदनशील रुख अपनाते हुए राहत कार्यों की कमान संभाली है।

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उन्होंने प्रत्येक मृतक के आश्रितों को राज्य आपदा राहत कोष से 4-4 लाख रुपये की तत्काल आर्थिक सहायता देने का आदेश दिया है। इसके साथ ही घायलों के समुचित उपचार के लिए स्वास्थ्य विभाग को मुफ्त चिकित्सा सेवाएं  उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। राहत आयुक्त हृषिकेश भास्कर यशोद ने स्पष्ट किया है कि प्रशासन वॉर फुटिंग पर काम कर रहा है। सभी जिलाधिकारियों को आदेश दिए गए हैं कि वे 24 घंटे के भीतर नुकसान का सर्वे पूरा करें ताकि पीड़ितों को जल्द से जल्द मुआवजा मिल सके।

फिलहाल, उत्तर प्रदेश का प्रशासन हाई अलर्ट पर है। बिजली विभाग टूटे हुए खंभों और तारों को जोड़ने में जुटा है ताकि प्रभावित क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बहाल की जा सके। प्रशासन ने जनता से अपील की है कि वे अभी भी सतर्क रहें, क्योंकि मौसम का मिजाज अभी भी पूरी तरह स्थिर नहीं हुआ है। कमजोर इमारतों और पुराने पेड़ों के पास जाने से बचने की सलाह दी गई है।

 

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