SIR का तीसरा चरण शुरू, 19 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में शुरू हुआ वोटर लिस्ट शुद्धिकरण अभियान

नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए 16 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का निर्देश दे दिया है। चुनाव आयोग का यह कदम आगामी चुनावों की तैयारियों और मतदाता सूचियों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। इस पूरी प्रक्रिया को जनगणना की चल रही हाउस लिस्टिंग गतिविधियों और मैदानी स्तर पर उपलब्ध मशीनरी के साथ सामंजस्य बैठाते हुए तैयार किया गया है, ताकि फील्ड स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े और डेटा की सटीकता भी बनी रहे।

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पहाड़ी राज्यों में बाद में होगा SIR 

चुनाव आयोग ने गुरुवार को जारी एक बयान में कहा कि, SIR के तीसरे फेज़ में हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर और लद्दाख में वोटर लिस्ट रिवीजन शामिल नहीं होगा। इन तीन राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए SIR का शेड्यूल बाद में घोषित किया जाएगा, इन तीन राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में सेंसस का दूसरा फेज़ पूरा होने के बाद और ऊंचाई वाले इलाकों और बर्फ से ढके इलाकों में मौसम की स्थिति पर ध्यान देने के बाद।

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आयोग ने ये भी कहा कि, इस विशेष अभियान के दौरान जमीनी स्तर पर व्यापक रूप से कार्य किया जाएगा। SIR के इस तीसरे चरण की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि, इसमें लगभग 3.94 लाख से अधिक बूथ स्तरीय अधिकारी सीधे तौर पर शामिल होंगे। ये अधिकारी घर-घर जाकर लगभग 36.73 करोड़ मतदाताओं से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात करेंगे।

इस विशाल कार्य को संपन्न करने के लिए उन्हें राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त किए गए 3.42 लाख बूथ स्तरीय एजेंटों का भी सहयोग प्राप्त होगा। चुनाव आयोग का मानना है कि, घर-घर जाकर किया जाने वाला यह सत्यापन न केवल फर्जी मतदाताओं को हटाने में मदद करेगा, बल्कि उन नए पात्र नागरिकों को भी जोड़ने का अवसर देगा जिनकी आयु मतदान के लिए योग्य हो चुकी है।

राजनीतिक दलों की भागीदार अनिवार्य

इस अभियान की भौगोलिक सीमाओं और क्षेत्रीय चुनौतियों को देखते हुए चुनाव आयोग ने कुछ राज्यों को फिलहाल इस चरण से अलग रखा है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि, हिमाचल प्रदेश, जम्मू और कश्मीर तथा लद्दाख में मतदाता सूची में संशोधन का काम फिलहाल तीसरे चरण में आयोजित नहीं किया जाएगा। इन क्षेत्रों के लिए विशेष रणनीति अपनाई गई है क्योंकि यहां की भौगोलिक परिस्थितियां और मौसम की स्थिति देश के अन्य हिस्सों से काफी भिन्न है।

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इन तीन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में जनगणना के दूसरे चरण के पूरा होने के बाद और विशेष रूप से ऊपरी इलाकों तथा बर्फ से ढके क्षेत्रों में मौसम की स्थिति का बारीकी से आकलन करने के बाद ही SIR के कार्यक्रम की घोषणा बाद में की जाएगी। यह निर्णय यह सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है कि दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाला कोई भी नागरिक इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया से वंचित न रह जाए।निर्वाचन आयोग ने इस पूरी प्रक्रिया में राजनीतिक दलों की भागीदारी को अनिवार्य और अत्यंत आवश्यक बताया है।

बूथ स्तरीय एजेंट की नियुक्ति के आदेश

आयोग के बयान के अनुसार, विशेष गहन पुनरीक्षण एक सहभागी प्रक्रिया है, जिसमें मतदाता, राजनीतिक दल और चुनाव अधिकारी सभी महत्वपूर्ण हितधारक के रूप में शामिल होते हैं। आयोग ने सभी मान्यता प्राप्त और गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से पुरजोर अपील की है कि, वे प्रत्येक मतदान केंद्र के लिए अपने बूथ स्तरीय एजेंट की नियुक्ति अवश्य करें।

आयोग का तर्क है कि, जब राजनीतिक दल इस प्रक्रिया में पूरी तरह से शामिल होंगे तभी SIR का कार्य पूरी पारदर्शिता, निष्पक्षता और सटीकता के साथ संपन्न हो सकेगा। इससे न केवल चुनावी डेटा पर भरोसा बढ़ेगा, बल्कि भविष्य में मतदाता सूची को लेकर होने वाले विवादों की संभावना भी न्यूनतम हो जाएगी। आयोग ने पिछले चरणों की सफलता का हवाला देते हुए बताया कि SIR के पहले दो चरणों में भी अभूतपूर्व भागीदारी देखी गई थी।

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पहले दो चरणों के दौरान 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कवर किया गया था, जहां लगभग 59 करोड़ मतदाता पंजीकृत थे। उस दौरान 6.3 लाख से अधिक बूथ स्तरीय अधिकारियों और राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त किए गए 9.2 लाख बूथ स्तरीय एजेंटों ने अपना सक्रिय योगदान दिया था। उन चरणों के अनुभव और डेटा का लाभ अब तीसरे चरण में उठाया जा रहा है, जिससे 19 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मतदाता सूचियों को त्रुटिहीन बनाने में मदद मिलेगी।

मतदान के प्रति जागरूक भी कर रहा आयोग

चुनाव आयोग की यह कवायद केवल आंकड़ों के सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आम नागरिक को उसके मताधिकार के प्रति जागरूक करने का भी एक प्रयास है। घर-घर जाकर बीएलओ द्वारा किए जाने वाले सत्यापन से उन मतदाताओं का विवरण सुधारा जा सकेगा जिनके नाम में गलती है, पते बदल गए हैं या जिनकी मृत्यु हो चुकी है।

आयोग ने फील्ड मशीनरी को सख्त निर्देश दिए हैं कि, वे पूरी संवेदनशीलता के साथ डेटा का मिलान करें। विशेष रूप से उन क्षेत्रों पर ध्यान दिया जा रहा है, जहां आबादी का पलायन अधिक होता है।

 

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