
नोएडा। उत्तर प्रदेश के जेवर में बन रहा नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट अब न केवल उत्तर भारत के विकास का इंजन बनने को तैयार है, बल्कि यह हवाई यात्रियों की जेब पर पड़ने वाले बोझ को भी कम करने जा रहा है। एयरपोर्ट इकोनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी (AERA) ने एयरपोर्ट के लिए नई यूजर डेवलपमेंट फीस (UDF) की दरों को आधिकारिक मंजूरी दे दी है।
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सस्ता होगा टिकट
इस फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि, नोएडा एयरपोर्ट से उड़ान भरना दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) एयरपोर्ट के मुकाबले काफी किफायती साबित होगा। कम यूजर फीस का सीधा लाभ यात्रियों को हवाई टिकटों की कम कीमतों के रूप में मिलेगा, जिससे एयरलाइंस के लिए भी प्रतिस्पर्धी किराया तय करना आसान हो जाएगा।

हवाई यात्रा में टिकट की दरों का एक बड़ा हिस्सा एयरपोर्ट शुल्क यानी यूडीएफ होता है। नोएडा एयरपोर्ट प्रबंधन ने शुरुआत में घरेलू यात्रियों के लिए 653 रुपये और अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए 1200 रुपये की फीस का प्रस्ताव रखा था, लेकिन रेगुलेटरी अथॉरिटी (AERA) ने आम यात्रियों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस प्रस्तावित राशि को काफी कम कर दिया है।
अधिकारियों का स्पष्ट मानना है कि, कम शुल्क रखने का मुख्य उद्देश्य नोएडा एयरपोर्ट को दिल्ली एयरपोर्ट के एक मजबूत और किफायती विकल्प के रूप में स्थापित करना है। इससे न केवल यात्रियों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि विमानन कंपनियां भी अपनी सेवाओं को विस्तार देने के लिए उत्साहित होंगी।
शुल्क की रूपरेखा तय
AERA द्वारा निर्धारित नई दरों के मुताबिक, अगले साल 31 मार्च तक नोएडा से प्रस्थान करने वाले घरेलू यात्रियों को 541 रुपये का यूडीएफ देना होगा। वहीं, घरेलू उड़ानों से नोएडा आने वाले यात्रियों के लिए यह शुल्क मात्र 232 रुपये तय किया गया है। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की बात करें तो, यहां से विदेश जाने वाले यात्रियों को 1083 रुपये और विदेशों से नोएडा पहुंचने वाले यात्रियों को 464 रुपये शुल्क के रूप में चुकाने होंगे।
गौरतलब है कि आने वाले वर्षों के लिए भी शुल्क की रूपरेखा तय कर दी गई है। 1 अप्रैल 2028 से 31 मार्च 2029 के बीच घरेलू प्रस्थान शुल्क बढ़कर 598 रुपये और अंतरराष्ट्रीय प्रस्थान शुल्क 1197 रुपये हो जाएगा। इसी तरह 2029-30 के सत्र के लिए भी मामूली बढ़ोतरी के साथ दरें निश्चित की गई हैं।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के औपचारिक संचालन की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। आगामी 15 जून से यहां से घरेलू उड़ानों और कार्गो सेवाओं का विधिवत शुभारंभ होने जा रहा है। देश की दिग्गज एयरलाइंस इंडिगो और अकासा एयर ने पहले ही अपनी समय सारिणी साझा कर दी है और यात्रियों के लिए टिकटों की बुकिंग भी शुरू हो चुकी है।
कम होगा दिल्ली एयरपोर्ट का दवाब
शुरुआत में यह एयरपोर्ट देश के प्रमुख महानगरों और व्यापारिक केंद्रों को सीधी उड़ानों से जोड़ेगा। इससे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिलों जैसे मेरठ, अलीगढ़, आगरा और बुलंदशहर के यात्रियों को अब दिल्ली जाने की मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी। साथ ही, दिल्ली एयरपोर्ट पर यात्रियों के बढ़ते दबाव को कम करने में भी यह हवाई अड्डा मील का पत्थर साबित होगा।
घरेलू उड़ानों के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय सेवाओं को लेकर भी प्रशासन बेहद गंभीर है। टर्मिनल बिल्डिंग का निर्माण कार्य अब अपने अंतिम पड़ाव पर है और फिनिशिंग का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। एयरपोर्ट के नोडल अधिकारी शैलेंद्र भाटिया के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय टर्मिनल सितंबर तक पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों से जरूरी क्लीयरेंस और इमिग्रेशन सुविधाओं की तकनीकी जांच की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
लक्ष्य यह रखा गया है कि, इस साल दिसंबर के अंत तक नोएडा की धरती से अंतरराष्ट्रीय विमानों की आवाजाही भी शुरू हो जाए। यह वैश्विक कनेक्टिविटी न केवल पर्यटन को बढ़ावा देगी बल्कि जेवर और आसपास के इलाकों में औद्योगिक निवेश के नए रास्ते भी खोलेगी।

नोएडा एयरपोर्ट केवल अपनी भव्यता के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी अत्याधुनिक सुरक्षा और संचालन तकनीक के लिए भी जाना जाएगा। एयरपोर्ट को ‘CAT-3’ नेविगेशन प्रणाली से लैस किया गया है। यह तकनीक उन यात्रियों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है जो सर्दियों के मौसम में कोहरे के कारण होने वाली उड़ानों की देरी से परेशान रहते हैं।
ख़राब मौसम में भी टेक ऑफ़ और लैंड करेगा विमान
CAT-3 सिस्टम की मदद से बेहद कम दृश्यता (विजिबिलिटी) और खराब मौसम के बावजूद विमान पूरी सुरक्षा के साथ टेकऑफ और लैंडिंग कर सकेंगे। अधिकारियों का दावा है कि, इस तकनीक के समावेश से नोएडा एयरपोर्ट की विश्वसनीयता बढ़ेगी और यात्रियों को एक निर्बाध यात्रा का अनुभव मिलेगा।
विशेषज्ञों का विश्लेषण है कि दिल्ली-एनसीआर के बढ़ते हवाई यातायात को संभालने के लिए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट एक अनिवार्य आवश्यकता बन गया था। अब जबकि यहाँ यूजर फीस दिल्ली से कम रखी गई है और विश्वस्तरीय तकनीक का इस्तेमाल हो रहा है, यह निश्चित रूप से क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक परिदृश्य को बदल देगा। आने वाले समय में नोएडा एयरपोर्ट केवल एक परिवहन केंद्र नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की नई पहचान के रूप में उभरेगा।
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