
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं को राहत देते हुए विद्युत वितरण व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव किया गया है। लखनऊ स्थित मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (MVVNL) ने अपने अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले 19 जिलों में व्यापक अभियान चलाते हुए लाखों स्मार्ट मीटरों की कार्यप्रणाली को बदल दिया है।
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पोस्टपेड मोड में बदले गए 8.67 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटर
उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के निर्देशों के क्रम में अब इन क्षेत्रों में लगे 18.67 लाख स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को वापस पोस्टपेड मोड में परिवर्तित कर दिया गया है। इस तकनीकी बदलाव के साथ ही उपभोक्ताओं के मोबाइल फोन पर संदेश पहुंचने भी शुरू हो गए हैं, जिसमें उन्हें मीटर के पोस्टपेड होने और बकाया बिल के बारे में सूचित किया जा रहा है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब स्मार्ट मीटरों की विश्वसनीयता और उनकी जांच रिपोर्ट को लेकर उपभोक्ता परिषद ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे बिजली विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गई है।

मध्यांचल विद्युत वितरण निगम के इस बड़े फैसले का असर राजधानी लखनऊ समेत अवध और रुहेलखंड के एक बड़े हिस्से पर पड़ा है। विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, निगम के कार्यक्षेत्र में आने वाले लखनऊ, रायबरेली, उन्नाव, हरदोई, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, बाराबंकी, अयोध्या, बहराइच, गोंडा, श्रावस्ती, बलरामपुर, अंबेडकरनगर, सुल्तानपुर, अमेठी, बरेली, शाहजहांपुर, बदायूं और पीलीभीत जिलों में कुल 19.53 लाख स्मार्ट मीटर विभिन्न श्रेणियों के उपभोक्ताओं जैसे घरों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और दुकानों पर स्थापित किए गए थे।
मोबाइल पर मिल रहे संदेश
पहले विभाग की योजना इन मीटरों को पूरी तरह से प्रीपेड मोड पर चलाने की थी, जिसके तहत उपभोक्ता को पहले रिचार्ज करना होता था और फिर बिजली का उपयोग संभव था। इसी प्रक्रिया के तहत लगभग 18.67 लाख स्मार्ट मीटरों को प्रीपेड मोड में सक्रिय भी कर दिया गया था। हालांकि, अब विभाग ने अपनी नीति में बदलाव करते हुए इन सभी 18.67 लाख मीटरों को दोबारा पोस्टपेड श्रेणी में डाल दिया है, जिससे अब उपभोक्ताओं को बिजली इस्तेमाल करने के बाद महीने के अंत में बिल का भुगतान करना होगा।
इस परिवर्तन के व्यावहारिक पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए मध्यांचल निगम के निदेशक (वाणिज्य) रजत जुनेजा ने स्पष्ट किया कि विभाग पारदर्शिता बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने जानकारी दी कि, जिन उपभोक्ताओं के मीटर पोस्टपेड किए गए हैं, उन्हें विभाग की तरफ से आधिकारिक संदेश भेजे जा रहे हैं। इन संदेशों में न केवल मीटर की वर्तमान स्थिति की जानकारी दी जा रही है, बल्कि यदि किसी उपभोक्ता का पिछला बैलेंस या बकाया राशि है, तो उसका भी स्पष्ट उल्लेख किया जा रहा है, ताकि भविष्य में किसी प्रकार का भ्रम न रहे।
शुरू हुई बिल तैयार करने की प्रक्रिया
यह प्रक्रिया केवल मध्यांचल तक ही सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश के अन्य वितरण निगमों जैसे पूर्वांचल, पश्चिमांचल, केस्को (कानपुर) और दक्षिणांचल में भी इसी तर्ज पर उपभोक्ताओं को सूचित करने का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है। पावर कॉर्पोरेशन के इस नए डिजिटल ढांचे के तहत बिलिंग की प्रक्रिया को भी बेहद सरल और समयबद्ध बनाने का दावा किया गया है। कॉर्पोरेशन के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, उपभोक्ताओं द्वारा मई माह के दौरान जितनी भी बिजली की खपत की गई है, उसका बिल तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
आगामी 10 जून तक सभी संबंधित उपभोक्ताओं के पंजीकृत मोबाइल नंबरों और व्हाट्सएप पर बिल का विवरण भेज दिया जाएगा। उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए विभाग ने स्मार्ट ऐप को अपडेट किया है, जहां से वे सीधे अपना बिल डाउनलोड कर सकेंगे। विभाग की योजना है कि, भविष्य में भी हर महीने की 10 तारीख तक उपभोक्ताओं को उनके बिल का संदेश सीधे उनके फोन पर मिल जाए। इससे उपभोक्ताओं को अपनी मासिक बिजली खपत की निगरानी करने और समय पर भुगतान कर पेनल्टी से बचने में बड़ी मदद मिलेगी।
संदेह के घेरे में कार्य प्रणाली
विभाग का मानना है कि, इस व्यवस्था से राजस्व वसूली में तेजी आएगी और उपभोक्ताओं की शिकायतों में भी कमी आएगी। हालांकि, एक ओर जहां विभाग अपनी व्यवस्थाओं को सुदृढ़ करने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की गुणवत्ता की जांच को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पावर कॉर्पोरेशन द्वारा स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की टेस्टिंग के लिए गठित चार सदस्यीय विशेष समिति की कार्यप्रणाली अब संदेह के घेरे में है।

राज्य उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने इस जांच प्रक्रिया पर कड़े प्रहार किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि, समिति ने विभिन्न मीटर निर्माता कंपनियों के लगभग 24 स्मार्ट प्रीपेड मीटरों की जांच मध्यांचल निगम की अपनी प्रयोगशाला (लैब) में की है और इसी आधार पर एक अंतरिम रिपोर्ट तैयार कर दी गई है। परिषद का कहना है कि, यह जांच प्रक्रिया न केवल तकनीकी रूप से त्रुटिपूर्ण है बल्कि मानकों के भी विपरीत है।
नहीं है अधिकृत लैब
उपभोक्ता परिषद ने इस मुद्दे पर विस्तृत तकनीकी दलीलें पेश करते हुए बताया कि, राष्ट्रीय परीक्षण एवं अंशांकन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (NABL) ने मध्यांचल की इस लैब को केवल साधारण मीटरों के परीक्षण के लिए मान्यता प्रदान की है। साधारण मीटरों के लिए निर्धारित मानकों में मुख्य रूप से इंडियन स्टैंडर्ड (IS) 14697 और IS 13779 आते हैं। इसके विपरीत, स्मार्ट प्रीपेड मीटरों के लिए एक विशेष मानक IS 16444 निर्धारित किया गया है।
चूंकि मध्यांचल की प्रयोगशाला के पास इस विशिष्ट मानक (IS 16444) के तहत जांच करने की आधिकारिक मान्यता या प्रमाणन नहीं है, इसलिए वहां की गई जांच की विश्वसनीयता शून्य हो जाती है। अवधेश कुमार वर्मा ने दो टूक शब्दों में कहा कि, यद्यपि कुछ सामान्य पैरामीटर साधारण लैब में चेक किए जा सकते हैं, लेकिन स्मार्ट मीटरों की क्रिटिकल यानी महत्वपूर्ण जांच के लिए यह लैब अधिकृत नहीं है।
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