NEET 2026 केस: गुरुग्राम के डॉक्टर से 30 लाख में हुई डील, व्हाट्सएप-टेलीग्राम के जरिए 700 छात्रों तक पहुंचा पर्चा

 लखनऊ।  एक बार फिर से देशभर के लाखों युवाओं का डॉक्टर बनने का सपना सिस्टम की खामियों और माफियाओं के लालच की भेंट चढ़ गया। परीक्षा प्रकिया शुरू होने से पहले जताई जा रही पेपर लीक की आशंका आखिर कर सच हो गई और  NEET 2026 की परीक्षा को फाइनली रद्द कर दिया गया और जांच की कमान सीबीआई को सौंप दी गई है।

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3 मई को हुई थी परीक्षा

3 मई को हुई परीक्षा में पेपर लीक के मामले की जांच कर रही एजेंसियों की हालिया कार्रवाई ने इस पूरे सिंडिकेट की परतों को उधेड़कर रख दिया है, जिससे स्पष्ट हो गया है कि, यह लोकल नहीं बल्कि नेशनल लेवल का घोटाला है। इसके तार हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड समेत और भी कई राज्यों तक फैले हैं। इस मामले में गुरुग्राम के एक डॉक्टर की संलिप्तता से लेकर सोशल मीडिया के जरिए चंद घंटों में पेपर फैलाने की जो कहानी सामने आई है, उसने शिक्षा जगत और सरकार के दावों की पोल खोल दी है। आइए जानते हैं कि आखिर कैसे 30 लाख रुपये की एक डील ने देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की शुचिता को तार-तार कर दिया।

जांच एजेंसियों के हाथ लगे दस्तावेजों और पूछताछ में जो सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई है, वह है गुरुग्राम के एक डॉक्टर की भूमिका। बताया जा रहा है कि, जमवारामगढ़ के रहने वाले दो भाइयों, मांगीलाल बिवाल और दिनेश बिवाल ने इस पूरे खेल की पटकथा लिखी थी। इन दोनों भाइयों ने अप्रैल के अंतिम सप्ताह में गुरुग्राम के एक रसूखदार डॉक्टर से संपर्क किया और कथित तौर पर 30 लाख रुपये में NEET का प्रश्नपत्र खरीदने का सौदा किया।

26 और 27 अप्रैल को यह डील पूरी हुई और पेपर इन दो भाइयों के हाथ लग गया। इसके बाद दिनेश बिवाल ने सबसे पहले यह पेपर अपने ही बेटे को मुहैया कराया, जो राजस्थान के सीकर में रहकर परीक्षा की तैयारी कर रहा था। जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि बिवाल परिवार का पिछला रिकॉर्ड भी संदेह के घेरे में है, क्योंकि पिछले साल भी इस परिवार के चार बच्चों का चयन NEET में हुआ था। अब एजेंसियां यह जांच रही हैं कि क्या पिछला चयन भी इसी तरह की धांधली का परिणाम था या यह महज एक संयोग है।

पेपर पहुंचाने के लिए वसूली गई थी मोटी रकम

पेपर लीक का यह वायरस केवल एक परिवार तक सीमित नहीं रहा। जैसे ही पेपर इन माफियाओं के हाथ लगा, इसे व्यापार बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। देहरादून से गिरफ्तार किए गए आरोपी राकेश कुमार मंडवारिया की भूमिका इस मामले में सबसे घातक साबित हुई है। जांच एजेंसियों का दावा है कि, राकेश ने अकेले ही करीब 700 छात्रों तक इस पेपर को पहुंचाने का जिम्मा लिया था।

इसके लिए मोटी रकम वसूली गई और तकनीक का सहारा लिया गया। पेपर को पहले डिजिटल फॉर्मेट में पीडीएफ बनाकर भेजा गया और बाद में उन केंद्रों पर इसके प्रिंटआउट्स बांटे गए, जहां छात्रों को सेफ हाउस में रखकर उत्तर रटवाए जा रहे थे। एजेंसियां अब उन 700 छात्रों और उनके अभिभावकों की कुंडली खंगाल रही हैं, जिन्होंने अपने बच्चों का भविष्य संवारने के लिए इस काले कारोबार में निवेश किया।

राजस्थान का सीकर, जिसे कोटा के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा कोचिंग हब माना जाता है, अब इस घोटाले का केंद्र बिंदु बनकर उभरा है। जांच में पाया गया है कि, सीकर के कुछ हॉस्टलों और कोचिंग सेंटरों के आसपास सक्रिय दलालों ने व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर गुप्त ग्रुप बना रखे थे। इन ग्रुप्स के जरिए परीक्षा से पहले ही प्रश्नपत्र और उनके उत्तरों की चाबियां साझा की जा रही थीं।

डिजिटल सबूत मिटाने की कोशिश

डिजिटल फॉरेंसिक टीम ने इन ग्रुप्स के एडमिन और सक्रिय सदस्यों की पहचान कर ली है। जांच अधिकारियों का कहना है कि, डिजिटल सबूतों को मिटाने की कोशिश भी की गई, लेकिन क्लाउड बैकअप और रिकवरी टूल्स की मदद से कई महत्वपूर्ण चैट और ट्रांजेक्शन डिटेल्स बरामद कर ली गई हैं। यह भी अंदेशा है कि, कुछ छोटे कोचिंग संचालकों ने अपने संस्थान का रिजल्ट बेहतर दिखाने के लिए इस सिंडिकेट को संरक्षण दिया था।

इस पूरे मामले में केवल राजस्थान और हरियाणा ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के तार भी जुड़ते नजर आ रहे हैं। हरियाणा से यश यादव नाम के एक अन्य आरोपी की गिरफ्तारी ने इस बात की पुष्टि की है कि, यह नेटवर्क बहुत ही प्रोफेशनल तरीके से काम कर रहा था। यश यादव का काम छात्रों को ढूंढना और उन्हें पेपर के बदले पैसे देने के लिए राजी करना था।

जांच एजेंसियों का मानना है कि, यह पेपर मूल स्रोत यानी प्रिंटिंग प्रेस या परीक्षा वितरण केंद्र से बाहर कैसे आया, यह अभी भी सबसे बड़ा सवाल है। क्या इसमें नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के किसी भीतर के व्यक्ति का हाथ है या फिर परिवहन के दौरान इसे लीक किया गया, इसकी गहराई से पड़ताल की जा रही है। आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि, उन्हें एक महीने पहले ही सूचना मिल गई थी कि, पेपर लीक होने वाला है, जिससे पता चलता है कि, यह साजिश बहुत पहले ही रची जा चुकी थी।

तय हो सिस्टम की जवाबदेही

इस खुलासे के बाद देशभर के ईमानदार छात्रों और उनके अभिभावकों में भारी रोष है, जो छात्र दिन-रात मेहनत कर इस कठिन परीक्षा की तैयारी करते हैं, उनके लिए यह खबर किसी सदमे से कम नहीं है। कई छात्र संगठनों ने सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है और इस साल की परीक्षा को रद्द कर दोबारा पारदर्शी तरीके से आयोजित करने की मांग की है।

सोशल मीडिया पर #NEETPaperLeak ट्रेंड कर रहा है, जहां लोग सिस्टम की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं। विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है, जिससे मामला अब राजनीतिक तूल पकड़ता जा रहा है। जांच एजेंसियां अब इस मामले में मनी ट्रेल का पीछा कर रही हैं। यह देखा जा रहा है कि, करोड़ों रुपये का यह लेनदेन किन बैंक खातों या हवाला के जरिए हुआ। साथ ही, उन सभी संदिग्ध डॉक्टरों और कोचिंग संचालकों की सूची तैयार की जा रही है, जिनके नाम इस जांच के दौरान सामने आए हैं। अधिकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं, जो इस घोटाले की जड़ों तक पहुंचने में मदद करेंगी।

 

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