
दुनिया अभी कोविड-19 की विभीषिका से पूरी तरह उबर भी नहीं पाई थी कि, एक और सूक्ष्म लेकिन अत्यंत घातक वायरस ‘हंतावायरस’ ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है। हाल के दिनों में वैश्विक स्तर पर इसके बढ़ते मामलों और उच्च मृत्यु दर ने चिकित्सा जगत में खतरे की घंटी बजा दी है। हंतावायरस कोई नया नाम नहीं है, लेकिन इसकी मारक क्षमता और इसके फैलने के रहस्यमयी तरीके इसे किसी भी अन्य वायरल इंफेक्शन से कहीं अधिक खतरनाक बनाते हैं।
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मामूली होते हैं शुरुआती लक्षण
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें, तो यह वायरस किसी भी स्वस्थ व्यक्ति के सामान्य बुखार को पल भर में मेडिकल इमरजेंसी में तब्दील करने की ताकत रखता है। सबसे डरावनी बात यह है कि, इसके शुरुआती लक्षण इतने मामूली होते हैं कि, मरीज अक्सर इसे साधारण फ्लू या थकान समझकर टाल देता है, जो आगे चलकर जानलेवा साबित होता है। हंतावायरस संक्रमण की सबसे बड़ी जटिलता इसके लक्षणों का भ्रामक होना है।

हेल्थ एक्सपर्ट का कहना है कि, जब किसी मरीज को बुखार, बदन दर्द या सिरदर्द शुरू होता है, तो पहली प्राथमिकता में डेंगू, स्वाइन फ्लू या कोविड-19 जैसी बीमारियों को रखा जाता है। हंतावायरस एक रेयर यानी दुर्लभ संक्रमण होने के कारण अक्सर डॉक्टरों और मरीजों के रडार से बाहर रहता है। यही अज्ञानता वायरस को शरीर के भीतर अपनी जड़ें मजबूत करने का समय दे देती है।
चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि, संक्रमण के पहले कुछ दिनों में मरीज को तेज बुखार के साथ मांसपेशियों में दर्द महसूस होता है। खासकर जांघों, कूल्हों और पीठ के निचले हिस्से में असहनीय दर्द इसके शुरुआती संकेत हो सकते हैं। इसके साथ ही चक्कर आना, उल्टी होना और पेट में मरोड़ उठना भी इसके लक्षणों में शामिल हैं। चूंकि ये सभी लक्षण फूड पॉइजनिंग या सामान्य वायरल बुखार में भी देखे जाते हैं, इसलिए सही समय पर इसकी जांच और पहचान करना एक बड़ी चुनौती बन जाता है।
चूहों और गिलहरियों से पहुंचता है इंसानों में
अक्सर लोग यह मान बैठते हैं कि, यह वायरस कोविड की तरह किसी के छींकने या खांसने से फैल जाएगा, लेकिन हंतावायरस के मामले में कहानी थोड़ी अलग और अधिक डरावनी है। यह संक्रमण मुख्य रूप से कृन्तकों यानी चूहों और गिलहरियों के जरिए इंसानों तक पहुंचता है। वायरस इन जीवों के मूत्र, लार और मल में जीवित रहता है। चिकित्सक बताते हैं कि, संक्रमण का सबसे सामान्य तरीका एयरोसोलाइजेशन है। जब कोई व्यक्ति किसी पुराने स्टोर रूम, गोदाम, गैरेज या खेत की सफाई करता है, जहां चूहों का बसेरा रहा हो, तो वहां जमा धूल में वायरस के सूक्ष्म कण मौजूद हो सकते हैं। सफाई के दौरान जैसे ही यह धूल उड़ती है, वायरस हवा में मिल जाता है और सांस के जरिए सीधे इंसान के फेफड़ों में प्रवेश कर जाता है।
हालांकि, एंडीज वायरस जैसी इसकी कुछ प्रजातियां इंसानों से इंसानों में फैलने की क्षमता रखती हैं, लेकिन ऐसे मामले बेहद कम देखे गए हैं। असल खतरा उन जगहों से है, जहां चूहों की मौजूदगी अधिक होती है। चूहों के काटने या उनके द्वारा दूषित किए गए भोजन के सेवन से भी यह संक्रमण शरीर में घर कर सकता है।
मरीज की हालत बिगड़ते देर नहीं लगती
जैसे ही यह वायरस फेफड़ों में पहुंचता है, यह अपना असली और खौफनाक रूप दिखाना शुरू कर देता है। इसे मेडिकल भाषा में ‘हंतावायरस फुफ्फुसीय सिंड्रोम’ (HPS) कहा जाता है। संक्रमण के कुछ दिनों बाद अचानक मरीज की हालत बिगड़ने लगती है। फेफड़ों के भीतर की रक्त वाहिकाएं रिसने लगती हैं, जिससे फेफड़ों में पानी भरने लगता है। इसे पल्मोनरी एडिमा कहा जाता है। इस स्थिति में मरीज को ऐसा महसूस होता है जैसे उसके सीने पर कोई भारी पत्थर रख दिया गया हो।
सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई, हृदय गति का असामान्य रूप से बढ़ जाना और शरीर में ऑक्सीजन के स्तर का तेजी से गिरना ऐसे संकेत हैं, जो बताते हैं कि अब समय हाथ से निकल रहा है। द लैंसेट जैसी प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल्स की रिपोर्ट बताती है कि, इस स्तर पर पहुंचने के बाद मरीज को तत्काल आईसीयू और वेंटिलेटर सपोर्ट की आवश्यकता होती है। अमेरिकी स्वास्थ्य संस्था सीडीसी (CDC) के आंकड़े बताते हैं कि, हंतावायरस के गंभीर मामलों में मृत्यु दर 35 से 40 प्रतिशत तक हो सकती है, जो इसे दुनिया के सबसे घातक वायरसों की सूची में खड़ा करती है।
मास्क पहनकर करें सफाई
फिलहाल हंतावायरस का कोई सटीक इलाज या विशेष टीका उपलब्ध नहीं है, इसलिए बचाव ही सबसे बड़ी औषधि है। चिकित्सा विशेषज्ञों का सुझाव है कि घरों और कार्यस्थलों पर चूहों के नियंत्रण के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए। यदि आप किसी पुराने या बंद कमरे की सफाई कर रहे हैं, तो उसे सीधे झाड़ू से साफ करने के बजाय पहले गीले पोंछे या कीटाणुनाशक का छिड़काव करें ताकि धूल न उड़े। सफाई के दौरान उच्च गुणवत्ता वाले मास्क (N95) और दस्ताने पहनना अनिवार्य होना चाहिए।

यदि किसी व्यक्ति को चूहों के संपर्क वाले क्षेत्र में रहने के बाद बुखार या सांस लेने में थोड़ी भी तकलीफ महसूस हो, तो उसे बिना देरी किए पल्मोनोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए। याद रखें, हंतावायरस के मामले में देर करना जीवन के लिए महंगा पड़ सकता है। यह एक ऐसी बीमारी है,जहां चंद घंटों की देरी मरीज को वेंटिलेटर तक पहुंचा सकती है।
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