लखनऊ में घर बनाना हुआ महंगा, बढ़े आवास विकास की जमीन के दाम, जानें नए रेट

लखनऊ। लखनऊ में अपना आशियाना बनाने का सपना देख रहे लोगों को अब अपनी जेब और ढीली करनी पड़ेगी, क्योंकि उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद ने शहर की तीन सबसे प्रमुख आवासीय योजनाओं में जमीन की कीमतों में भारी बढ़ोतरी का फैसला किया है। परिषद की हालिया बोर्ड बैठक और नई गणना नीति के बाद अब जमीन के दाम 3,000 रुपये प्रति वर्गमीटर तक महंगे हो गए हैं।

इसे भी पढ़ें- मिशन 2027: मायावती ने चला ब्राह्मण कार्ड, लखनऊ की घटना का जिक्र कर लगाया उपेक्षा का आरोप

रियल एस्टेट मार्केट में हलचल

खास बात यह है कि, जहां एक तरफ खाली प्लॉट और जमीन की कीमतों में वृद्धि की गई है, वहीं फ्लैटों की कीमतों को फिलहाल स्थिर रखा गया है। परिषद का यह फैसला शहर के रियल एस्टेट मार्केट में हलचल पैदा कर सकता है, खासकर उन इलाकों में जहां हाल के वर्षों में बुनियादी ढांचों का तेजी से विकास हुआ है।

Housing development land

आमतौर पर आवास विकास परिषद की संपत्तियों की दरें हर साल 1 अप्रैल से संशोधित की जाती हैं। इस वर्ष बोर्ड बैठक के समय पर न हो पाने और चुनाव व अन्य प्रशासनिक कारणों के चलते इसमें थोड़ी देरी हुई। 29 अप्रैल को हुई महत्वपूर्ण बोर्ड बैठक में लंबी चर्चा के बाद नई गणना नीति और मार्जिन कॉस्ट लैंड रेट (एमसीएलआर) के आधार पर कीमतों को बढ़ाने का प्रस्ताव पास किया गया। अधिकारियों के अनुसार, इस बढ़ोतरी का औपचारिक आदेश अगले तीन-चार दिनों में पूरी तरह लागू हो जाएगा, लेकिन प्रभावी दरें 1 अप्रैल से ही मानी जाएंगी।

परिषद की इस नई नीति ने उन निवेशकों और घर खरीदारों को चौंका दिया है, जो डीएम सर्किल रेट के आधार पर राहत की उम्मीद कर रहे थे। नीति में प्रावधान है कि नई विकसित होने वाली कॉलोनियों में जमीन के दाम डीएम सर्किल रेट से अधिक नहीं होंगे, लेकिन परिषद ने अपनी पुरानी और चालू योजनाओं में एमसीएलआर अधिनियम के तहत 8.7 प्रतिशत सालाना की दर से वृद्धि करने की छूट का लाभ उठाया है।

इन तीन योजनाओं में रेट में इजाफा

लखनऊ में आवास विकास परिषद की दर्जनों योजनाएं हैं, लेकिन परिषद के पास फिलहाल केवल तीन मुख्य योजनाओं अवध विहार,  वृंदावन और आम्रपाली योजना में ही आवंटन के लिए जमीन उपलब्ध है। पुरानी योजनाओं जैसे राजाजीपुरम या इंदिरानगर में परिषद के पास अब कोई नई भूमि शेष नहीं है। इसी कमी और बढ़ती मांग के चलते इन तीन योजनाओं में रेट बढ़ाए गए हैं।

सबसे ज्यादा मांग वाली अवध विहार योजना जो सुल्तानपुर रोड और शहीद पथ के पास स्थित है, वहां बुनियादी ढांचे के विकास के कारण जमीन की कीमत में अच्छी-खासी वृद्धि हुई है। वहीं रायबरेली रोड स्थित वृंदावन योजना और हरदोई रोड स्थित आम्रपाली योजना में भी कीमतों को संशोधित किया गया है। वर्तमान में आम्रपाली योजना में जमीन की कीमत 30,000 रुपये, अवध विहार में 38,000 रुपये और वृंदावन योजना में 41,000 रुपये प्रति वर्ग मीटर तक पहुंच गई है। यह बढ़ोत्तरी लगभग 9 प्रतिशत के करीब बैठती है, जिससे मध्यम वर्ग के लिए प्लॉट लेना अब और भी चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।

राजधानी लखनऊ के भौगोलिक विस्तार और आधारभूत संरचना में सुधार ने इन इलाकों की किस्मत बदल दी है। सुल्तानपुर रोड पर स्थित अवध विहार योजना की मांग आसमान छू रही है। इसके पीछे मुख्य कारण शहीद पथ से इसकी कनेक्टिविटी, पास में स्थित बड़े शॉपिंग मॉल्स, विश्वस्तरीय अस्पताल और इकाना इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम हैं। पिछले साल परिषद ने यहां दरें नहीं बढ़ाई थीं, जिसका कैरियर फॉरवर्ड असर इस साल की कीमतों में दिख रहा है।

कम हो सकती है बिक्री

इसी तरह हरदोई रोड पर स्थित आम्रपाली योजना को ग्रीन कॉरिडोर और मेट्रो के दूसरे फेज के काम से संजीवनी मिली है। आने वाले समय में मेट्रो कनेक्टिविटी की संभावना ने यहां निवेशकों की भीड़ बढ़ा दी है। दूसरी तरफ, वृंदावन योजना डिफेंस एक्सपो के आयोजन और प्रस्तावित एआई सिटी (AI City) के चलते चर्चा में है। इन तमाम कारकों ने परिषद को जमीन की कीमतें बढ़ाने का ठोस आधार प्रदान किया है।

Housing development land

जहां एक ओर जमीन की कीमतों में परिषद ने एमसीएलआर का हवाला देते हुए वृद्धि की है। वहीं फ्लैट खरीदारों के लिए राहत भरी खबर है। परिषद ने स्पष्ट किया है कि फ्लैटों के दाम में कोई इजाफा नहीं किया जाएगा। इसके पीछे मुख्य कारण फ्लैटों की कम मांग और परिषद के पास पहले से मौजूद अनबिके फ्लैटों का स्टॉक है। रियल एस्टेट विशेषज्ञों का मानना है कि फ्लैटों की कीमत बढ़ाने से उनकी बिक्री और कम हो सकती थी, इसलिए परिषद ने केवल जमीन (प्लॉट्स) पर ही फोकस किया है, जहां मांग की कोई कमी नहीं है।

निजी बिल्डर भी बढ़ा सकते हैं दाम

आवास विकास परिषद की नई गणना नीति में यह स्पष्ट किया गया है कि, संपत्तियों के दाम डीएम सर्किल रेट से ज्यादा नहीं होने चाहिए। हालांकि, जानकारों का कहना है कि अवध विहार और वृंदावन जैसे पॉश इलाकों में परिषद के वर्तमान रेट पहले से ही सर्किल रेट से अधिक हैं। परिषद ने यहां तर्क दिया है कि, गणना नीति में उन चालू योजनाओं के लिए छूट दी गई है, जहां विकास कार्य अभी भी प्रगति पर हैं। इसी तकनीकी छूट का उपयोग करते हुए परिषद ने सालाना करीब 9 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी को लागू कर दिया है।

इस फैसले से लखनऊ के प्रॉपर्टी मार्केट में निजी बिल्डरों को भी अपनी कीमतें बढ़ाने का मौका मिल सकता है। जब सरकारी संस्था जमीन के दाम बढ़ाती है, तो इसका सीधा असर आसपास की निजी जमीनों की कीमतों पर भी पड़ता है। ऐसे में लखनऊ के आउटर इलाकों में भी अब प्रॉपर्टी के रेट बढ़ने की पूरी आशंका जताई जा रही है।

 

इसे भी पढ़ें-  लखनऊ में आंधी-पानी में मचाया तांडव, कई इलाकों में बत्ती गुल-उड़े टेंट, गर्मी से मिली राहत

Related Articles

Back to top button