
लखनऊ। यूपी में योगी कैबिनेट के विस्तार के बाद अब बयानबाजी का सिलसिला शुरू हो गया है। सूबे की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। मायावती ने इस कैबिनेट विस्तार को न सिर्फ राजनीतिक जुगाड़ करार दिया, बल्कि उत्तर प्रदेश में ब्राह्मण समाज की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बसपा प्रमुख ने लखनऊ में भाजपा के ही एक युवा नेता पर हुए हमले का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि, वर्तमान सरकार में ब्राह्मण समाज न केवल उपेक्षित महसूस कर रहा है, बल्कि वह पूरी तरह से असुरक्षित भी है।
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जनता की अपेक्षा सर्वोपरि
मायावती का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब भाजपा आगामी चुनावों को देखते हुए सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश कर रही है और अपने मंत्रिमंडल में ब्रह्मण समाज से आने वाले मनोज पांडे को जगह भी दी है। मायावती ने साफ तौर पर कहा है कि अगर सरकार की नीतियों का लाभ गरीबों, मजदूरों और युवाओं तक नहीं पहुंचता, तो ऐसे विस्तार केवल सरकारी खजाने पर बोझ ही साबित होते हैं।

मायावती ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल के जरिए भाजपा सरकार की कार्यप्रणाली पर विस्तृत टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी सरकार के लिए मंत्रिमंडल का घटाना, बढ़ाना या उसका विस्तार करना विशुद्ध रूप से सत्ताधारी पार्टी का आंतरिक मामला होता है। उन्होंने कहा कि, संवैधानिक मर्यादाओं के तहत इस पर सीधे तौर पर टीका-टिप्पणी करना उचित नहीं है, लेकिन लोकतंत्र में जनता की अपेक्षाएं सर्वोपरि होती हैं।
मायावती के अनुसार, किसी भी कैबिनेट विस्तार की सफलता की कसौटी यह होनी चाहिए कि, उसका जमीनी स्तर पर क्या प्रभाव पड़ता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि, अगर इस विस्तार से सर्वसमाज के गरीबों, असहाय मजदूरों, अन्नदाता किसानों और रोजगार की तलाश में भटक रहे युवाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव नहीं आता, तो जनता इसे महज एक चुनावी स्टंट और सरकारी संसाधनों की बर्बादी ही मानेगी।
कागजों पर नहीं हकीकत में दिलाएं सुरक्षा का एहसास
बसपा प्रमुख ने महिला सुरक्षा और सम्मान को लेकर भी सरकार को घेरा और कहा कि कागजी दावों के बजाय सुरक्षा का अहसास महिलाओं के दैनिक जीवन में परिलक्षित होना चाहिए। अपने विस्तृत बयान में मायावती ने समाज के कमजोर तबकों की सुरक्षा और न्याय प्रक्रिया पर भी गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि, सरकार और उसके मंत्रियों की यह पहली संवैधानिक जिम्मेदारी बनती है कि वे हर वर्ग के व्यक्ति को, चाहे वह किसी भी मजहब या जाति का हो, उसकी जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करें।
मायावती ने उत्तर प्रदेश की वर्तमान कानून-व्यवस्था की तुलना अपनी पूर्ववर्ती सरकारों से करते हुए कहा कि, बसपा के शासनकाल में ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ की नीति पर चलते हुए हर वर्ग को समान रूप से न्याय दिया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि, वर्तमान परिवेश में लोगों को न्याय मिलता हुआ महसूस नहीं हो रहा है, जो किसी भी स्वस्थ लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है। मायावती ने कहा कि सरकार को केवल पदों का बंटवारा करने के बजाय अपने मंत्रियों के कार्यकलापों पर ध्यान देना चाहिए ताकि जनता को संवैधानिक सुरक्षा का लाभ मिल सके।
इस पूरे बयान का सबसे अहम हिस्सा ब्राह्मण राजनीति से जुड़ा रहा। मायावती ने लखनऊ में हाल ही में हुए एक घटनाक्रम का उल्लेख करते हुए भाजपा को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने बताया कि, राजधानी में ही ब्राह्मण समाज से ताल्लुक रखने वाले भाजपा के एक युवा नेता पर जानलेवा हमला हुआ है, जिसने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया है। मायावती ने इस घटना को आधार बनाते हुए कहा कि जब सत्ताधारी दल का अपना युवा नेता सुरक्षित नहीं है, तो आम ब्राह्मण समाज की क्या स्थिति होगी।
भाजपा की दुखती रग पर हाथ
उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि आज उत्तर प्रदेश के कोने-कोने में यह चर्चा आम हो गई है कि ब्राह्मण समाज यहां केवल उपेक्षित ही नहीं है, बल्कि वह अत्यंत असुरक्षित महसूस कर रहा है। मायावती के इस बयान को उत्तर प्रदेश की जातिगत राजनीति में एक बड़े दांव के रूप में देखा जा रहा है, क्योंकि उन्होंने सीधे तौर पर भाजपा के कोर वोट बैंक माने जाने वाले वर्ग की दुखती रग पर हाथ रखा है।
मायावती ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि ब्राह्मणों की सुरक्षा को लेकर उत्पन्न हुई यह स्थिति अति-चिंतनीय है। उन्होंने याद दिलाया कि, बहुजन समाज पार्टी की जब भी उत्तर प्रदेश में सरकार रही, तब समाज के हर वर्ग के जान, माल और मजहब की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई थी। उन्होंने कहा कि बसपा शासन में कानून का इकबाल इतना मजबूत था कि अपराधी जेल के भीतर होते थे और आम नागरिक, विशेषकर ब्राह्मण और दलित समाज, खुद को सुरक्षित महसूस करता था।
मायावती ने कहा कि, उनकी सरकार की नीतियां किसी एक वर्ग के लिए नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए थीं, जिसमें ब्राह्मणों को भी उचित प्रतिनिधित्व और सम्मान मिला था। उन्होंने वर्तमान सरकार को चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर कानून-व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ और समाज के हर वर्ग को न्याय नहीं मिला, तो जनता आगामी समय में इसका करारा जवाब देगी।
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