रूस-यूक्रेन युद्ध: जेलेंस्की से मिलने को तैयार हुए पुतिन, क्या यूक्रेन में 4 साल बाद आएगी शांति

मॉस्को। दुनिया को दहला देने वाले रूस-यूक्रेन युद्ध के मोर्चे से एक ऐसी खबर आई है, जिसने पूरी दुनिया की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। पिछले चार वर्षों से जारी भीषण रक्तपात और तबाही के बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पहली बार सीधे तौर पर यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से मुलाकात की संभावना जताई है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता में तीन दिवसीय युद्धविराम चल रहा है।

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तेज हुई हलचल

पुतिन के इस नरम रुख ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है और कयास लगाए जा रहे हैं कि, क्या अब यूरोप का यह सबसे विनाशकारी युद्ध अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है। पुतिन ने स्पष्ट किया है कि, वे वार्ता के लिए तैयार हैं, लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें और प्रोटोकॉल तय किए जाने जरूरी हैं।

Putin-Zelensky

रूस में द्वितीय विश्वयुद्ध की जीत के उपलक्ष्य में मनाए जाने वाले विजय दिवस के भव्य आयोजन के दौरान राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने न केवल अपनी सैन्य शक्ति का प्रदर्शन किया, बल्कि शांति की  तरफ भी एक बड़ा इशारा किया। विजय दिवस की परेड को संबोधित करते हुए पुतिन ने यूक्रेन में चल रहे विशेष सैन्य अभियान को द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद की सबसे बड़ी ऐतिहासिक जीत करार दिया।

हालांकि, समारोह के बाद जब वे विदेशी संवाददाताओं से रूबरू हुए, तो उनका स्वर कूटनीतिक रूप से काफी संतुलित नजर आया। पुतिन ने स्वीकार किया कि, यूक्रेन के साथ चल रहा यह संघर्ष यूरोप के लिए द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद का सबसे खूनी और दर्दनाक अध्याय है। उन्होंने कहा कि, अब उन्हें लगता है कि यह युद्ध समाप्ति के करीब पहुंच रहा है और रूस भी क्षेत्र में स्थायी शांति और नई सुरक्षा व्यवस्था स्थापित करने के पक्ष में है।

तटस्थ देश में होगी मुलाकात

पुतिन ने जेलेंस्की से मुलाकात के सवाल पर कहा कि, उन्हें अपने प्रतिद्वंद्वी से आमने-सामने बैठने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन यह मुलाकात महज औपचारिकता नहीं होनी चाहिए। रूसी राष्ट्रपति के अनुसार, यह बैठक तभी संभव है जब पहले दोनों देशों के बीच एक व्यापक शांति समझौते के मसौदे पर सहमति बन जाए। इसके अलावा, पुतिन ने एक महत्वपूर्ण शर्त यह भी रखी कि, यह मुलाकात किसी तीसरे देश (तटस्थ स्थान) पर आयोजित की जानी चाहिए।

पुतिन ने यह भी खुलासा किया कि, वे यूरोप के साथ भविष्य के संबंधों और नई सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जर्मनी के पूर्व चांसलर जेरहार्ड श्रोएडर के माध्यम से यूरोपीय नेताओं के संपर्क में हैं। यह दर्शाता है कि, रूस अब युद्ध के मैदान से हटकर कूटनीति की मेज पर अपनी शर्तों को मजबूती से रखना चाहता है। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे इस घटनाक्रम के पीछे सबसे बड़ी भूमिका अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मानी जा रही है।

ट्रंप ने सत्ता संभालने के बाद से ही इस युद्ध को खत्म कराने का वादा किया था और वर्तमान तीन दिवसीय युद्धविराम उन्हीं की कोशिशों का नतीजा है। यह सीजफायर शनिवार से सोमवार तक के लिए प्रभावी किया गया है, जिस पर कीव और मॉस्को दोनों ने अपनी सहमति दी थी। ट्रंप का उद्देश्य इस अल्पकालिक युद्धविराम को एक दीर्घकालिक शांति समझौते में बदलना है।

एक हजार युद्ध बंदियों को रिहा करने की प्रक्रिया शुरू

इस समझौते के तहत एक बड़ी मानवीय पहल भी शामिल है, जिसमें दोनों देश मिलकर करीब एक हजार युद्धबंदियों को रिहा करने की प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं। यह कदम दोनों पक्षों के बीच अविश्वास की खाई को पाटने की एक कोशिश है, ताकि भविष्य में होने वाली उच्च स्तरीय वार्ताओं के लिए जमीन तैयार की जा सके।

हालांकि, शांति की इस डगर में रोड़े कम नहीं हैं। सीजफायर की घोषणा के बावजूद पिछले 24 घंटों के भीतर सीमावर्ती इलाकों में छिटपुट गोलाबारी और हमलों की खबरें आई हैं। इन हमलों ने एक बार फिर दोनों देशों के बीच तनाव को चरम पर पहुंचा दिया है और शांति प्रयासों पर संशय के बादल मंडराने लगे हैं, जहां यूक्रेन ने रूस पर सीजफायर उल्लंघन का आरोप लगाया है, वहीं क्रेमलिन का कहना है कि वे केवल उकसावे की कार्रवाई का जवाब दे रहे हैं।

इन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद डोनाल्ड ट्रंप ने अपना रुख स्पष्ट कर दिया है कि, वे इस युद्धविराम को टूटने नहीं देना चाहते और वे दोनों पक्षों पर दबाव बनाए हुए हैं कि वे बातचीत की मेज पर टिके रहें। ट्रंप की टीम लगातार दोनों राजधानियों के संपर्क में है ताकि किसी भी तरह की गलतफहमी को बड़े संघर्ष में तब्दील होने से रोका जा सके। फरवरी 2022 में शुरू हुआ यह युद्ध अब अपने पांचवें वर्ष की ओर बढ़ रहा है।

लाखों लोग जान गंवा चुके हैं इस युद्ध में

इन चार सालों में लाखों लोगों की जान जा चुकी है, करोड़ों विस्थापित हुए हैं और यूक्रेन का एक बड़ा हिस्सा खंडहर में तब्दील हो चुका है। वैश्विक अर्थव्यवस्था भी इस युद्ध की वजह से महंगाई और ऊर्जा संकट के दौर से गुजर रही है। पुतिन का यह बयान कि, युद्ध खत्म होने के करीब है, न केवल रूस की आंतरिक थकान को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि रूस अब पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच अपनी जीत को आधिकारिक जामा पहनाकर बाहर निकलना चाहता है।

Putin-Zelensky

पुतिन की योजना यूरोप में एक ऐसी नई सुरक्षा व्यवस्था बनाने की है जिसमें रूस के हितों को नजरअंदाज न किया जाए। अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि, यदि पुतिन और जेलेंस्की की मुलाकात किसी तीसरे देश में सफल होती है, तो यह सदी की सबसे बड़ी कूटनीतिक घटना होगी, लेकिन सवाल अभी भी वही है कि क्या यूक्रेन अपने कब्जे वाले क्षेत्रों को छोड़ने के लिए तैयार होगा? और क्या रूस नाटो के विस्तार को रोकने की अपनी मांग पर अड़ा रहेगा?

ट्रंप के अगले कदम पर टिकीं निगाहें

फिलहाल, सबकी नजरें ट्रंप के अगले कदम और इस तीन दिवसीय सीजफायर के खत्म होने के बाद की स्थिति पर टिकी हैं। यदि बंदियों की रिहाई शांतिपूर्वक संपन्न होती है और हमले रुकते हैं, तो पुतिन और जेलेंस्की की मेज पर होने वाली मुलाकात की उम्मीद हकीकत में बदल सकती है। दुनिया को अब एक ऐसी सुबह का इंतजार है जब मिसाइलों के शोर के बजाय शांति वार्ता की खबरें सुर्खियों में हों।

 

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