पीएम मोदी की अपील, एक साल तक न खरीदें सोना, कम इस्तेमाल करें तेल, विपक्ष तमतमाया

नई दिल्ली। होर्मुज में छिड़े महायुद्ध की वजह से विश्व समुदाय में भूचाल सा आ गया है। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सप्लाई चेन में आए भारी व्यवधान के बीच अब पीएम नरेंद्र मोदी ने देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने के लिए देशवासियों से एक भावनात्मक और कड़े सहयोग की अपील की है। रविवार को तेलंगाना के दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री ने सिकंदराबाद की एक विशाल जनसभा में राष्ट्र को संबोधित करते हुए नागरिकों से कहा कि,अब वे कम से कम एक साल तक सोने की खरीदारी न करें और अपने दैनिक आहार में खाने के तेल का इस्तेमाल कम से कम करें।

इसे भी पढ़ें- बंगाल की कमान अब शुभेंदु के हाथ, कल पीएम मोदी की मौजूदगी में लेंगे शपथ

चढ़ा सियासी पारा

प्रधानमंत्री की इस अपील का उद्देश्य देश के विदेशी मुद्रा भंडार को बचाना और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारत की स्थिति को सुरक्षित बनाये रखना है। हालांकि, प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद देश में राजनीतिक पारा हो गया है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि, सरकार अब अपनी आर्थिक विफलता को जनता पर थोप रही है।

पीएम मोदी ने अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए दुनिया के वर्तमान हालात, खासकर मध्य पूर्व और पड़ोस में चल रहे युद्धों का जिक्र किया। उन्होंने कहा, पिछले कुछ समय से जारी युद्ध की वजह से सप्लाई चेन काफी प्रभावित हुई है, जिसका असर भारत भी पड़  रहा है। प्रधानमंत्री ने बेहद व्यावहारिक लहजे में देश को यह समझाया कि भारत के पास बड़े तेल के कुएं नहीं हैं, जिसके कारण हमें अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह से पेट्रोल, डीजल और गैस के आयात पर निर्भर रहना पड़ता है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि, युद्ध की वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में न केवल कच्चे तेल, बल्कि उर्वरक और गैस की कीमतें भी आसमान छू रही हैं, जिससे देश की आर्थिक सेहत पर भारी दबाव पड़ रहा है। पीएम ने इस बात भी पर जोर दिया कि, सरकार पिछले कई महीनों से इस वैश्विक संकट का बोझ खुद अपने कंधों पर उठा रही है, ताकि आम नागरिकों पर इसका सीधा प्रभाव न पड़े, लेकिन, उन्होंने आगाह किया कि यदि सप्लाई चेन पर इसी तरह से संकट बना रहा, तो केवल सरकारी उपायों से मुश्किलें कम नहीं होंगी।

दिया देश के लिए जीने का मंत्र

इसी संदर्भ में उन्होंने जीने की देशभक्ति का नया मंत्र दिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि, देश के लिए मरना ही देशभक्ति नहीं है, बल्कि संकट के समय देश के लिए जीना और अपने कर्तव्यों को निभाना भी सच्ची देशभक्ति है। उन्होंने, विदेशी मुद्रा बचाने के दो सबसे बड़े मोर्चों सोना और खाद्य तेल पर ध्यान केंद्रित किया। भारत दुनिया में सोने और खाद्य तेल के सबसे बड़े आयातकों में से एक है, जिस पर हर साल अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा खर्च होती है।

पीएम मोदी ने स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था को जोड़ते हुए कहा कि, यदि हर भारतीय अपने खाने में तेल के उपयोग में थोड़ी कमी करता है, तो यह देश सेवा के साथ-साथ देह सेवा भी होगी। उन्होंने तर्क दिया कि, इससे न केवल देश का राजकोषीय स्वास्थ्य सुधरेगा, बल्कि परिवारों के लोगों का स्वास्थ्य भी बेहतर होगा।

सोने की खरीदारी पर बोलते हुए प्रधानमंत्री ने इतिहास की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि एक दौर था, जब देश पर संकट आने पर लोग अपना सोना दान कर देते थे, लेकिन आज वे दान नहीं मांग रहे हैं। उन्होंने दशवासियों को चुनौती दी कि, वे अपनी देशभक्ति का परिचय देते हुए यह संकल्प लें कि, अगले एक साल तक घर में किसी भी मांगलिक कार्यक्रम या अवसर पर वे सोने के गहने नहीं खरीदेंगे। प्रधानमंत्री का मानना है कि, सोने की मांग में कमी आने से विदेशी मुद्रा की बड़ी बचत होगी, जो वर्तमान में तेल और अन्य अनिवार्य संसाधनों के आयात के लिए अत्यंत आवश्यक है।

कांग्रेस ने की आलोचना

प्रधानमंत्री की इस अपील पर कांग्रेस ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर सरकार की नीतियों की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि ईरान-अमेरिका और इजराइल के बीच जारी तनाव को लंबा समय बीत चुका है, लेकिन प्रधानमंत्री अब भी भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कोई ठोस योजना नहीं बना पाए हैं। कांग्रेस का आरोप है कि, सरकार अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए आपातकालीन कदम उठाने और अपनी नीतियों में सुधार करने के बजाय, आम नागरिकों को ही त्याग करने के लिए कह रही है, जो बेहद शर्मनाक और गैर-जिम्मेदाराना है।

कांग्रेस ने इसे सरकार की खराब प्लानिंग का नतीजा बताते हुए कहा कि जब राजनीति और चुनाव प्राथमिकता बन जाते हैं, तो अर्थव्यवस्था ऐसी ही तबाही की कगार पर पहुंचती है। विपक्षी दल ने मांग की है कि, सरकार नागरिकों को परेशानी में डालने के बजाय ईंधन का पर्याप्त भंडार सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक इंतजाम करे। विपक्ष का मानना है कि देश की जनता पहले से ही महंगाई की मार झेल रही है, ऐसे में तेल कम खाने और सोना न खरीदने जैसी अपीलें उनकी मुश्किलों को और बढ़ाने वाली हैं।

 रिकॉर्ड स्तर पर हैं सोने की कीमतें

प्रधानमंत्री की यह अपील ऐसे समय में आई है जब साल 2025 में सोने की कीमतों ने ऐतिहासिक रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। वैश्विक अस्थिरता और अमेरिका-ईरान-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव के कारण निवेशकों का भरोसा शेयर बाजार से उठकर सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने पर टिक गया था। यही कारण था कि 2025 में सोने की कीमतों में 60 फीसदी से अधिक का उछाल देखा गया। इसके साथ ही, अमेरिकी नीतियों और डॉलर के प्रभुत्व को लेकर दुनिया भर के केंद्रीय बैंकों में बढ़ रही शंकाओं ने सोने को एक मजबूत रिजर्व एसेट बना दिया है।

 

इसे भी पढ़ें- पीएम मोदी ने यूपीडा की प्रदर्शनी में देखी यूपी के विकास मॉडल की झलक

Related Articles

Back to top button