सिपाही की गर्लफ्रेंड चला रही थी सट्टा रैकेट, करोड़ों का हिसाब-किताब देख चौधियां गईं पुलिस की आंखें

झांसी। उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में सट्टेबाजी का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है।  दरअसल, यहां पुलिस कर्मी के संरक्षण में ही सट्टा रैकेट चल रहा  था। जिले की पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपये के सोने, चांदी और नगदी के साथ दो युवतियों को दबोचा है, जिनमें से मुख्य आरोपी महिला एक सिपाही की प्रेमिका बताई जा रही है, फिलहाल सिपाही को बर्खास्त कर दिया गया है।  इस खुलासे से महकमे में हड़कंप मच गया है, क्योंकि इसमें सीधे तौर पर विभाग के ही एक सिपाही की संलिप्तता पाई गई है, जो न केवल इस काले धंधे में शामिल था, बल्कि इसे पूरी तरह से संरक्षण भी दे रहा था।

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‘ऑपरेशन 72’ के तहत हुई कार्रवाई

झांसी के एसएसपी बीवीजीटीएस मूर्ति के निर्देशन में चलाए जा रहे ऑपरेशन 72 के तहत पुलिस को सूचना मिली थी कि, सीपरी बाजार थाना क्षेत्र के एक पॉश इलाके में सट्टे का बड़ा कारोबार संचालित हो रहा है। सूचना मिलते ही स्वाट टीम और सीपरी बाजार पुलिस ने रॉयल सिटी स्थित एक फ्लैट पर छापेमारी की। पुलिस जब वहां पहुंची तो नजारा देखकर दंग रह गई।

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एक आलीशान फ्लैट में सट्टे का पूरा नेटवर्क चलाया जा रहा था। पुलिस ने मौके से यशस्वी द्विवेदी और निशा खान नामक दो युवतियों को गिरफ्तार किया। जांच में जो सबसे चौंकाने वाला तथ्य सामने आया, वह यह था कि गिरफ्तार यशस्वी द्विवेदी झांसी पुलिस में तैनात सिपाही रजत की गर्लफ्रेंड हैं। रजत ही वह मुख्य कड़ी है

जिसने सट्टे के इस कारोबार को पुलिसिया सुरक्षा कवच प्रदान कर रखा था। छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से सट्टे के कारोबार का जो हिसाब-किताब बरामद किया, वह करोड़ों में था। पुलिस की इस छापेमारी में बरामदगी का आंकड़ा इतना बड़ा है कि, जिसने भी सुना वह हैरान रह गया।

सोने के बिस्किट बरामद

अधिकारियों के अनुसार, फ्लैट से 1 करोड़ 46 लाख रुपये की कीमत के सोने के बिस्किट बरामद किए गए हैं। इसके अलावा लगभग 11 लाख रुपये के चांदी के जेवर और 18 लाख 92 हजार रुपये की भारी-भरकम नगदी भी पुलिस के हाथ लगी है। सट्टा चलाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले तकनीकी उपकरणों में एक लैपटॉप और 12 मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं। साथ ही एक रजिस्टर भी मिला है जिसमें करोड़ों के लेन-देन और सट्टेबाजी के आंकड़ों का पूरा कच्चा चिट्ठा दर्ज है। इस गैंग से जुड़ा एक अन्य आरोपी आशीष उपाध्याय पहले ही पुलिस के हत्थे चढ़ चुका है और अभी सलाखों के पीछे है।

बताया जा रहा है कि रजत झांसी के कई महत्वपूर्ण थानों और स्वाट टीम में तैनात रहा है, जहां उसने अपने रसूख और पद का दुरुपयोग करते हुए इस अवैध धंधे को फलने-फूलने में मदद की। एसएसपी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सिपाही रजत को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त कर दिया है।

फिलहाल रजत फरार है और पुलिस की कई टीमें उसकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही हैं। यह पहली बार नहीं है जब रजत का नाम किसी विवाद में आया हो। बीते दिनों बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के पास हुए एक भीषण सड़क हादसे में, जहां एक थार की टक्कर से स्कूटी सवार रिटायर्ड असिस्टेंट रजिस्ट्रार की जान चली गई थी, उस मामले में भी रजत की भूमिका संदिग्ध पाई गई थी। वह घटना अभी ठंडी भी नहीं पड़ी थी कि सट्टे के इस बड़े सिंडिकेट में उसका नाम सामने आने से उसकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

तफतीश शुरू, दायरे में कई और चेहरे

पुलिस की जांच अब केवल रजत तक सीमित नहीं है। विभाग इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रहा है कि स्वाट टीम में पूर्व में तैनात रहे किन-किन पुलिसकर्मियों ने रजत को संरक्षण दिया था। संदेह जताया जा रहा है कि इस रैकेट की जड़ें पुलिस महकमे में काफी गहरी हो सकती हैं और कई अन्य चेहरे भी जांच के दायरे में आ सकते हैं। रजत के अलावा सुमित साहू, विशेष भार्गव और प्रभात अग्रवाल भी इस मामले में नामजद हैं और फरार चल रहे हैं। दूसरी गिरफ्तार आरोपी निशा खान को सुमित साहू ने ही इस फ्लैट में संरक्षण दे रखा था और वह यशस्वी के साथ मिलकर सट्टे का मैनेजमेंट देख रही थी।

एसएसपी बीवीजीटीएस मूर्ति ने स्पष्ट किया है कि, सट्टे और अवैध गतिविधियों के खिलाफ ऑपरेशन 72 जारी रहेगा और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह वर्दी में ही क्यों न हो। उन्होंने कहा कि सिपाही रजत के खिलाफ पहले से ही एक विभागीय जांच चल रही थी, लेकिन इस नए मामले ने उसकी आपराधिक मानसिकता को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है।

संपत्तियों की भी जांच शुरू

पुलिस अब उन सभी संपत्तियों की भी जांच कर रही है, जो इस अवैध कारोबार से अर्जित की गई हैं। यह कार्रवाई झांसी में अपराधियों और उनके मददगार पुलिसकर्मियों के बीच के गठजोड़ को तोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है। रॉयल सिटी जैसे रिहायशी इलाके में इस तरह का संगठित अपराध चलना स्थानीय निवासियों के लिए भी चिंता का विषय बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि फरार रजत और उसके अन्य साथी कब तक पुलिस की गिरफ्त में आते हैं और इस मामले में और कितने सफेदपोशों या वर्दीधारियों के नाम सामने आते हैं।

 

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